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Fatehabad News: बारिश से फसलें नष्ट होने पर 465 किसानों को मिला मुआवजा, सेमग्रस्त भूमि वालों को बीमा कंपनियों की ना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 14 Nov 2025 11:26 PM IST
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465 farmers received compensation due to crop damage caused by rain, while those with affected land were denied by insurance companies.
खारा खेड़ी गांव के खेतों में भरा बारिश का पानी।  फाइल फाेटो
फतेहाबाद। मानसून के दौरान अत्यधिक बारिश से प्रभावित किसानों को आखिरकार बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा मिलना शुरू हो गया है। जिन किसानों की फसलें जलभराव के कारण नष्ट हो गई थीं, उन्हें रिलायंस बीमा कंपनी ने फसल बीमा योजना के तहत राशि जारी की है। अब तक 465 किसानों के खातों में कुल दो करोड़ रुपये की राशि डाली गई है। हालांकि, शेष किसानों के दावे और फसल नुकसान की जांच जारी है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन 465 किसानों को खरीफ फसल बीमा के रूप में यह राशि दी गई है, जिनकी फसलें जून महीने के आसपास बीमित की गई थीं।
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कुछ किसानों को बीमा राशि मिलने के बावजूद निराशा का सामना करना पड़ा, क्योंकि बीमा कंपनियों ने सेमग्रस्त भूमि के किसानों के दावों को ठुकरा दिया है। बीमा कंपनियों का कहना है कि सेम की समस्या उनके पॉलिसी के तहत कवर नहीं की जाती है। किसानों का आरोप है कि बीमा कंपनियां और सरकार मिलकर उन्हें प्राकृतिक आपदा के बावजूद राहत देने में नाकामयाब हो रहे हैं।
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कई गांवों के सेमग्रस्त भूमि के किसानों में गहरी निराशा है, क्योंकि बीमा कंपनियों ने उनकी फसलों का बीमा करने से साफ इन्कार कर दिया है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण हुए नुकसान के बावजूद उन्हें बीमा राशि से वंचित किया जा रहा है। कुछ किसानों की बीमा राशि, जो पहले उनके खातों में डाली गई थी, बाद में लौटा दी गई है।
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किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार और बीमा कंपनियां मिलकर उन्हें जानबूझकर बीमा योजना का लाभ नहीं दे रही हैं। उन्होंने सरकार से यह मांग की है कि सेमग्रस्त गांवों के किसानों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे किसानों को भी फसल बीमा का पूरा लाभ मिल सके।

उपनिदेशक कृषि एवं कल्याण विभाग, डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि बाकी किसानों की बीमा क्लेम और फसल नुकसान की जांच प्रक्रिया अभी जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन किसानों को अब तक बीमा राशि नहीं मिली है, उनके दावों की सत्यता की जांच पूरी होते ही, मार्च तक सभी पात्र किसानों के खातों में राशि डाली जाएगी।
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