{"_id":"5a2d89d04f1c1b4c528b89f0","slug":"41512933840-fatehabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसरी ढिलाई की इंतहा, 14 साल में आपतियां तक दूर ना करवा सका नप प्रशासन, खंडहर बना स्लाटर हाऊस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसरी ढिलाई की इंतहा, 14 साल में आपतियां तक दूर ना करवा सका नप प्रशासन, खंडहर बना स्लाटर हाऊस
Updated Mon, 11 Dec 2017 12:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुशील सिंगला
टोहाना।
अफसरी ढिलाई की इंतहा का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है टोहाना का स्लाटर हाऊस। भूना रोड़ पर बनाये गए इस स्लाटर हाऊस का निर्माण तो साल 2003 में ही कर दिया गया था लेकिन अफसरी जज्बे की कमी के चलते 14 बरस बाद भी ये स्लाटर हाऊस शुरू नहीं हो सका। हालात ये हो चुके हैं कि अब तो इसकी ईमारत भी खंडहर की शक्ल अख्तियार करती जा रही है लेकिन नगर परिषद प्रशासन का अभी तक इस स्लाटर हाऊस को शुरु करने की कोई प्लानिंग नजर नहीं आ रही है।
ट्रीटमेंट प्लांट ना होने के कारण पर्यावरण अदालत में अटका है मसला
नगर परिषद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार साल 2003 में बनाए गए इस स्लाटर हाऊस में ट्रीटमेंट प्लांट ना होने के चलते प्रदूषण विभाग ने इस पर आपत्ति लगा दी जिसके बाद मामला कुरुक्षेत्र के पर्यावरण विभाग में चला गया। लेकिन नगर परिषद के अधिकारी आज तक इस मसले पर उचित पैरवी नहीं कर सके जिसके चलते ये स्लाटर हाऊस अब खुद ही खंडहर के ढेर में तब्दील होता जा रहा है।
दरवाजे, खिड़कियां तक हो चुकी हैं चोरी, सालों से बंद है इमारत
भूना रोड़ पर बनाये गए इस स्लाटर हाऊस की स्थिति बहुत खराब है। सालों से बंद होने के कारण इस इमारत की हालत किसी खंडहर से कम नहीं है। सफाई के अभाव के चलते भी इस स्लाटर हाऊस की दुर्दशा होती जा रही है। इतना ही नहीं, पिछले कुछ समय में यहां पर लगे कई दरवाजे, खिड़कियां और अन्य सामान भी चोरी हो चुका है लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों के कानों पर कोई जूं तक नहीं रेंग रही। उधर मीट व्यापारियों का कहना है कि स्लाटर हाऊस शहरी आबादी से काफी दूर है, ऐसे मपें इसके चालू होने से उनका कारोबार ठप हो जाएगा।
विज्ञापन
शहरी बोले, शीघ्र स्लाटर हाऊस शुरू करे प्रशासन
स्थानीय शहरी राकेश ने कहा कि शहर में खुले में पशुओं के काटने से लोगों की धार्मिक भावनाएं तो आहत होती ही हैं, साथ ही प्रदूषण को भी नुक्सान होता है। ऐसे में प्रशासन को शीघ्र ही स्लाटर हाऊस शुरू कर मीट शॉप को वहां शिफ्ट करवाना चाहिए।
क्या कहते हैं अधिकारी।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी प्रदीप हुडडा ने कहा कि टोहाना में भूना रोड पर नगर परिषद द्वारा स्लाटर हाउस बनाया हुआ है जिसे ट्रीटमेंट प्लांट न होने के चलते प्रदूषण विभाग ने आपत्ति दर्ज करवाई थी जिसके कारण इसे अभी तक शुरु नहीं किया जा सका। उन्होने कहा कि सरकार को विभाग द्वारा इसे दोबारा बनाने तथा वहां दुकानो को शिफट करने को लेकर प्रस्ताव भेजा हुआ है। इस बारे में संबंधित विभाग से बात करके इसेे दुबारा ठीक कर शुरू किया जाएगा।
क्या कहते हैं मीट कारोबारी।
मीट कारोबारी राजेंद्र कुमार का कहना है कि स्लाटर हाउस शहर से काफी दूरी पर है इससे उनका कारोबार ठप्प हो जाएगा। राजेंद्र कुमार का कहना है कि ये उनका पुस्तैनी कारोबार है। अब तक किसी ने उनके काम पर एतराज भी नहीं जताया है। उन्होंने प्रशासन से आह्वान किया है कि स्लाटर हाउस शहर के नजदीक ही बनाया जाए।
विज्ञापन
टोहाना।
अफसरी ढिलाई की इंतहा का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है टोहाना का स्लाटर हाऊस। भूना रोड़ पर बनाये गए इस स्लाटर हाऊस का निर्माण तो साल 2003 में ही कर दिया गया था लेकिन अफसरी जज्बे की कमी के चलते 14 बरस बाद भी ये स्लाटर हाऊस शुरू नहीं हो सका। हालात ये हो चुके हैं कि अब तो इसकी ईमारत भी खंडहर की शक्ल अख्तियार करती जा रही है लेकिन नगर परिषद प्रशासन का अभी तक इस स्लाटर हाऊस को शुरु करने की कोई प्लानिंग नजर नहीं आ रही है।
ट्रीटमेंट प्लांट ना होने के कारण पर्यावरण अदालत में अटका है मसला
नगर परिषद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार साल 2003 में बनाए गए इस स्लाटर हाऊस में ट्रीटमेंट प्लांट ना होने के चलते प्रदूषण विभाग ने इस पर आपत्ति लगा दी जिसके बाद मामला कुरुक्षेत्र के पर्यावरण विभाग में चला गया। लेकिन नगर परिषद के अधिकारी आज तक इस मसले पर उचित पैरवी नहीं कर सके जिसके चलते ये स्लाटर हाऊस अब खुद ही खंडहर के ढेर में तब्दील होता जा रहा है।
विज्ञापन
दरवाजे, खिड़कियां तक हो चुकी हैं चोरी, सालों से बंद है इमारत
भूना रोड़ पर बनाये गए इस स्लाटर हाऊस की स्थिति बहुत खराब है। सालों से बंद होने के कारण इस इमारत की हालत किसी खंडहर से कम नहीं है। सफाई के अभाव के चलते भी इस स्लाटर हाऊस की दुर्दशा होती जा रही है। इतना ही नहीं, पिछले कुछ समय में यहां पर लगे कई दरवाजे, खिड़कियां और अन्य सामान भी चोरी हो चुका है लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों के कानों पर कोई जूं तक नहीं रेंग रही। उधर मीट व्यापारियों का कहना है कि स्लाटर हाऊस शहरी आबादी से काफी दूर है, ऐसे मपें इसके चालू होने से उनका कारोबार ठप हो जाएगा।
विज्ञापन
शहरी बोले, शीघ्र स्लाटर हाऊस शुरू करे प्रशासन
स्थानीय शहरी राकेश ने कहा कि शहर में खुले में पशुओं के काटने से लोगों की धार्मिक भावनाएं तो आहत होती ही हैं, साथ ही प्रदूषण को भी नुक्सान होता है। ऐसे में प्रशासन को शीघ्र ही स्लाटर हाऊस शुरू कर मीट शॉप को वहां शिफ्ट करवाना चाहिए।
क्या कहते हैं अधिकारी।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी प्रदीप हुडडा ने कहा कि टोहाना में भूना रोड पर नगर परिषद द्वारा स्लाटर हाउस बनाया हुआ है जिसे ट्रीटमेंट प्लांट न होने के चलते प्रदूषण विभाग ने आपत्ति दर्ज करवाई थी जिसके कारण इसे अभी तक शुरु नहीं किया जा सका। उन्होने कहा कि सरकार को विभाग द्वारा इसे दोबारा बनाने तथा वहां दुकानो को शिफट करने को लेकर प्रस्ताव भेजा हुआ है। इस बारे में संबंधित विभाग से बात करके इसेे दुबारा ठीक कर शुरू किया जाएगा।
क्या कहते हैं मीट कारोबारी।
मीट कारोबारी राजेंद्र कुमार का कहना है कि स्लाटर हाउस शहर से काफी दूरी पर है इससे उनका कारोबार ठप्प हो जाएगा। राजेंद्र कुमार का कहना है कि ये उनका पुस्तैनी कारोबार है। अब तक किसी ने उनके काम पर एतराज भी नहीं जताया है। उन्होंने प्रशासन से आह्वान किया है कि स्लाटर हाउस शहर के नजदीक ही बनाया जाए।