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Fatehabad News: पिछले साल से 4005 अधिक किसानों ने किया पराली प्रबंधन
Tue, 19 Nov 2024 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 19 Nov 2024 11:20 PM IST
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फतेहाबाद में पराली प्रबंधन कर बनाई गईं गांठें।
फतेहाबाद। जिले में प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से किसानों में पराली प्रबंधन के लिए जागरूकता बढ़ी है। जिले में फसल अवशेष जलाए जाने के कारण बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक किया गया है। वहीं, पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी। इसके लिए 30 नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन मांगे जा रहे हैं। अभी तक जिले के 14005 किसान पराली प्रबंधन के लिए आवेदन कर चुके हैं। पिछले बार यह आंकड़ा 10 हजार था।
जिले में 127803.07 एकड़ में पराली प्रबंधन के लिए आवेदन आ चुके हैं। इनमें से 5864 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने 49448.64 एकड़ में सुपर सीडर से बिजाई करवाई है। इन किसानों ने इस बार फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर सुपर सीडर से बिजाई की है। सरकार ने पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए इस साल 38 बेलर मशीनें किसानों को वितरित की है। अब जिले में कुल 168 बेलर मशीन है और 2480 सुपर सीडर हैं ताकि किसानों को पराली प्रबंधन करने के लिए समय पर कृषि यंत्र मिल सके।
पिछली साल से पांच गुणा कम हुए फसल अवशेष जलाने के मामले
गौरतलब है कि धान जिले की मुख्य फसल है। 15 सितंबर से लेकर नवंबर माह के अंत तक धान की कटाई का काम जारी रहता है। जिले में इस बार 1.54 हेक्टेयर में धान की फसल बुवाई हुई है। इसकी कटाई अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस साल पिछले साल की तुलना में फसल अवशेष जलाने के मामलों में कमी दर्ज हुई है। पिछले साल जिले में 19 नवंबर तक कुल 500 स्थानों पर फसल अवशेष जलाए गए थे। मगर इस बार मात्र 105 स्थानों पर फसल अवशेष जलाए गए हैं।
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मैं पिछले पांच वर्षों से पराली प्रबंधन कर रहा हूं। मैं सुपर सीडर मशीन द्वारा बिजाई करता हूं, जिससे जमीन की उर्वरता शक्ति बढ़ी है। इस कारण मेरे खेत में गेहूं की फसल के उत्पादन में भी बढ़ाेतरी हुई है।
-परमजीत, किसान, फतेहाबाद
मैंने जब से खेती करनी शुरू की है, तब से लेकर अभी तक कभी भी फसल अवशेष में आग नहीं लगाई है। अब सरकार के द्वारा पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र दिए गए हैं। अब पराली प्रबंधन करने में और भी अधिक आसानी हो गई है।
-हरमिंद्र सिंह, किसान, फतेहाबाद
मैं 15 एकड़ जमीन में धान की फसल की खेती करता हूं। जिसमें मैं पराली प्रबंधन करता हूं। वहीं अगर बेलर मशीन आदि नहीं मिलती है तो सुपर सीडर मशीन से बिजाई करवा लेता हूं। लेकिन फसल अवशेषों में कभी आग नहीं लगाता हूं।
-जोगिंद्र किसान, गांव मूसेअहली
:: जिले में लगातार किसानों में पराली प्रबंधन के लिए जागरूकता बढ़ी है। इसके सकारात्मक नतीजे भी सामने आ रहे हैं। पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1000 रुपये की अनुदान राशि दी जा रही है, इसके लिए किसान 30 नवंबर तक आवेदन कर सकते हैं।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, फतेहाबाद
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जिले में 127803.07 एकड़ में पराली प्रबंधन के लिए आवेदन आ चुके हैं। इनमें से 5864 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने 49448.64 एकड़ में सुपर सीडर से बिजाई करवाई है। इन किसानों ने इस बार फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर सुपर सीडर से बिजाई की है। सरकार ने पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए इस साल 38 बेलर मशीनें किसानों को वितरित की है। अब जिले में कुल 168 बेलर मशीन है और 2480 सुपर सीडर हैं ताकि किसानों को पराली प्रबंधन करने के लिए समय पर कृषि यंत्र मिल सके।
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पिछली साल से पांच गुणा कम हुए फसल अवशेष जलाने के मामले
गौरतलब है कि धान जिले की मुख्य फसल है। 15 सितंबर से लेकर नवंबर माह के अंत तक धान की कटाई का काम जारी रहता है। जिले में इस बार 1.54 हेक्टेयर में धान की फसल बुवाई हुई है। इसकी कटाई अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस साल पिछले साल की तुलना में फसल अवशेष जलाने के मामलों में कमी दर्ज हुई है। पिछले साल जिले में 19 नवंबर तक कुल 500 स्थानों पर फसल अवशेष जलाए गए थे। मगर इस बार मात्र 105 स्थानों पर फसल अवशेष जलाए गए हैं।
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मैं पिछले पांच वर्षों से पराली प्रबंधन कर रहा हूं। मैं सुपर सीडर मशीन द्वारा बिजाई करता हूं, जिससे जमीन की उर्वरता शक्ति बढ़ी है। इस कारण मेरे खेत में गेहूं की फसल के उत्पादन में भी बढ़ाेतरी हुई है।
-परमजीत, किसान, फतेहाबाद
मैंने जब से खेती करनी शुरू की है, तब से लेकर अभी तक कभी भी फसल अवशेष में आग नहीं लगाई है। अब सरकार के द्वारा पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र दिए गए हैं। अब पराली प्रबंधन करने में और भी अधिक आसानी हो गई है।
-हरमिंद्र सिंह, किसान, फतेहाबाद
मैं 15 एकड़ जमीन में धान की फसल की खेती करता हूं। जिसमें मैं पराली प्रबंधन करता हूं। वहीं अगर बेलर मशीन आदि नहीं मिलती है तो सुपर सीडर मशीन से बिजाई करवा लेता हूं। लेकिन फसल अवशेषों में कभी आग नहीं लगाता हूं।
-जोगिंद्र किसान, गांव मूसेअहली
:: जिले में लगातार किसानों में पराली प्रबंधन के लिए जागरूकता बढ़ी है। इसके सकारात्मक नतीजे भी सामने आ रहे हैं। पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1000 रुपये की अनुदान राशि दी जा रही है, इसके लिए किसान 30 नवंबर तक आवेदन कर सकते हैं।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, फतेहाबाद