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एक ऐसा सरकारी रेस्टोरेंट, जहां ग्राहकों के लिए नहीं, सिर्फ स्टाफ के लिए बनता है भोजन
Updated Thu, 04 Jan 2018 11:25 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
शहर का सबसे पहला हाईफाई मोटेल एवं रेस्टोरेंट पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स पहले शहर की शान हुआ करता था लेकिन ग्राहकों के नहीं आने से यह अब वीरान पड़ा है। यहां पर कर्मचारी ग्राहकों के लिए नहीं केवल अपने लिए ही भोजन तैयार कर रहे हैं। शहरवासियों के मोटल की ओर रुख न करने का यह असर हुआ है कि अब यह रेस्टोरेंट ग्राहकों के बिना वीरान नजर आ रहा है। शहर में जब इसका निर्माण हुआ था तो शहरवासियों की यह पहली पसंद बन गया था, कई समारोह यहां हुए, लेकिन आज स्थिति यह है कि यह मोटेल ग्राहकों के इंतजार में पलक पावड़े बिछाकर खड़ा है, लेकिन ग्राहकों की बेरुखी करोड़ों की लागत से बने इस मोटेल एवं रेस्टोरेंट की छवि को धूमिल करती जा रही है। हालात यह है कि कभी पर्यटन विभाग की आमदनी का जरिया बना यह टूरिस्ट कांप्लेक्स अब हर माह लगभग ढाई लाख रुपये के घाटे में जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फतेहाबाद में पर्यटन विभाग द्वारा करोड़ों की लागत से शहर के माडल टाउन के पास पपीहा पार्क एवं पपीहा मोटेल एवं रेस्टोरेंट का निर्माण किया गया था। वर्ष 1992 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल ने इसकी आधारशिला रखी थी और 1994 में तत्कालीन पर्यटन मंत्री एवं फतेहाबाद के विधायक स्व. लीलाकृष्ण चौधरी ने इसका शुभारंभ किया था। उस समय इस टूरिस्ट कांप्लेक्स में बार व रेस्टोरेंट के साथ-साथ शादी समारोहों व आगंतुकों के लिए कमरों का भी निर्माण किया गया था।
पहले था फतेहाबाद की शान
शुरूआती दौर में पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स फतेहाबाद शहर की शान था। जब इसका निर्माण किया गया था तो यह शहर का पहला ऐसा पैलेस था, जो डिजाइन में तो अनोखा था ही, साथ ही काफी खुला व हवादार था। शुरुआती दिनों में शहरवासी प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में यहां पर व्यंजनों का लुत्फ उठाते थे तो बार में भी अच्छा काम चलता था। लेकिन इसके बाद शहर में अन्य स्थानों पर भी होटल व रेस्टोरेंट खुलने लगे और प्रतिस्पर्धा की इस दौड़ में पपीहा टुरिस्ट कांप्लेक्स पिछड़ता चला गया। अब हालात यह हो गए हैं कि पपीहा रेस्टोरेंट में पक्षी भी पर नहीं मार रहा। ग्राहकों का झुकाव पूरी तरह से इस रेस्टोरेंट से गायब हो चुका है।
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बार व रेस्टोरेंट दोनों हैं बंद, राशन भी नहीं आता
पिछले काफी समय से ग्राहक न आने के कारण इस पैलेस में बने रेस्टोरेंट की कुर्सियां खाली ही रहती हैं। पहले यहां पर बार चलता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के नेशनल हाइवे पर बार बंद करने के आदेशों के बाद अप्रैल में बार को बंद कर दिया गया। इसके बाद हालांकि सरकार के आर्डर आए थे कि बार को खोल दिया जाए, लेकिन जब इसके 5 साल के पिछले रिकार्ड को देखा गया तो यह साल दर साल घाटे में चलता दिखाई दिया। इसके बाद इसे न ही खोलने का फैसला लिया गया है।
ग्राहकों के लिए नहीं, अपने लिए बनाते हैं भोजन
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स की दुर्दशा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर राशन आता है तो वह केवल कर्मचारियों के भोजन के लिए ही मंगाया जाता है। यह एक ऐसा सरकारी टूरिज्म पैलेस है, जहां ग्राहकों के लिए नहीं बल्कि स्टाफ के लिए ही भोजन बनता है।
कमरे पर 12 तो खाने पर 5 फीसदी जीएसटी
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स में हालांकि भोजन आदि के लिए कोई ग्राहक आता ही नहीं, इसलिए आज तक कोई रसीद भोजन की नहीं कटी है। हां इक्का दुक्का लोग यहां पर रात्रि ठहराव के लिए जरूर पहुंचते हैं, जिन पर कमरे के रेट के साथ-साथ 12 फीसदी जीएसटी लगाई जाती है। इसके अलावा खाने पर 5 फीसदी जीएसटी है, लेकिन यहां के कर्मचारियों को यह चार्ज करने की आज तक नौबत ही नहीं पड़ी। ढाई लाख मासिक घाटा हो रहा है सरकार को
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स में इस समय 6 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें एक काउंटर इंचार्ज, दो कुक, एक वेटर, एक स्वीपर व एक माली शामिल है। इन सभी का मासिक वेतन करीब पौने 2 लाख रुपये तक है। इसके अलावा बिजली बिल व अन्य खर्चों को मिलाकर ढाई लाख रुपये मासिक खर्च आता है। आमदनी जीरो होने के कारण सरकार को हर महीने ढाई लाख रुपये का नुक्सान इस टुरिस्ट कांप्लेक्स की वजह से उठाना पड़ रहा है।
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कर्मचारी भी हैं परेशान
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स में पिछले काफी सालों से काम कर रहे कुक किशन प्रसाद ने बताया कि जब यह रेस्टोरेंट खुला था तो उनके पास काफी काम था और उनको काम करने में मजा भी आता था। लेकिन अब सारा दिन खाली बैठकर ही काम चलाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि अगर यहां काम नहीं है तो उनका कहीं और तबादला कर देें, ताकि हम काम तो कर सकें। ऐसे खाली बैठे रहने भी उनको परेशानी होती है।
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शहरवासी नहीं आते रेस्टोरेंट में: काउंटर इंचार्ज
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स के काउंटर इंचार्ज जगजीत सिंह ने बताया कि शहरवासी रेस्टोरेंट में आते ही नहीं है। इस कारण पिछले काफी समय से रेस्टोरेंट बंद पड़ा है। यही नहीं बार में भी सरकार को घाटा ही लग रहा था, इसलिए इसे चलाया नहीं गया। उन्होंने बताया कि कोई रेस्टोरेंट में नहीं आता, इसलिए हम राशन भी नहीं लाते, क्योंकि यह खराब हो जाता है। केवल स्टाफ के भोजन लायक ही राशन लाया जाता है। यहां पर ठहरने के लिए दो कमरे बनाए गए हैं, इसमें भी कभी कभार ही लोग आते हैं। जिस कारण यह पैलेस पूरी तरह से घाटे में जा रहा है।
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फतेहाबाद।
शहर का सबसे पहला हाईफाई मोटेल एवं रेस्टोरेंट पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स पहले शहर की शान हुआ करता था लेकिन ग्राहकों के नहीं आने से यह अब वीरान पड़ा है। यहां पर कर्मचारी ग्राहकों के लिए नहीं केवल अपने लिए ही भोजन तैयार कर रहे हैं। शहरवासियों के मोटल की ओर रुख न करने का यह असर हुआ है कि अब यह रेस्टोरेंट ग्राहकों के बिना वीरान नजर आ रहा है। शहर में जब इसका निर्माण हुआ था तो शहरवासियों की यह पहली पसंद बन गया था, कई समारोह यहां हुए, लेकिन आज स्थिति यह है कि यह मोटेल ग्राहकों के इंतजार में पलक पावड़े बिछाकर खड़ा है, लेकिन ग्राहकों की बेरुखी करोड़ों की लागत से बने इस मोटेल एवं रेस्टोरेंट की छवि को धूमिल करती जा रही है। हालात यह है कि कभी पर्यटन विभाग की आमदनी का जरिया बना यह टूरिस्ट कांप्लेक्स अब हर माह लगभग ढाई लाख रुपये के घाटे में जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फतेहाबाद में पर्यटन विभाग द्वारा करोड़ों की लागत से शहर के माडल टाउन के पास पपीहा पार्क एवं पपीहा मोटेल एवं रेस्टोरेंट का निर्माण किया गया था। वर्ष 1992 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल ने इसकी आधारशिला रखी थी और 1994 में तत्कालीन पर्यटन मंत्री एवं फतेहाबाद के विधायक स्व. लीलाकृष्ण चौधरी ने इसका शुभारंभ किया था। उस समय इस टूरिस्ट कांप्लेक्स में बार व रेस्टोरेंट के साथ-साथ शादी समारोहों व आगंतुकों के लिए कमरों का भी निर्माण किया गया था।
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पहले था फतेहाबाद की शान
शुरूआती दौर में पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स फतेहाबाद शहर की शान था। जब इसका निर्माण किया गया था तो यह शहर का पहला ऐसा पैलेस था, जो डिजाइन में तो अनोखा था ही, साथ ही काफी खुला व हवादार था। शुरुआती दिनों में शहरवासी प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में यहां पर व्यंजनों का लुत्फ उठाते थे तो बार में भी अच्छा काम चलता था। लेकिन इसके बाद शहर में अन्य स्थानों पर भी होटल व रेस्टोरेंट खुलने लगे और प्रतिस्पर्धा की इस दौड़ में पपीहा टुरिस्ट कांप्लेक्स पिछड़ता चला गया। अब हालात यह हो गए हैं कि पपीहा रेस्टोरेंट में पक्षी भी पर नहीं मार रहा। ग्राहकों का झुकाव पूरी तरह से इस रेस्टोरेंट से गायब हो चुका है।
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बार व रेस्टोरेंट दोनों हैं बंद, राशन भी नहीं आता
पिछले काफी समय से ग्राहक न आने के कारण इस पैलेस में बने रेस्टोरेंट की कुर्सियां खाली ही रहती हैं। पहले यहां पर बार चलता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के नेशनल हाइवे पर बार बंद करने के आदेशों के बाद अप्रैल में बार को बंद कर दिया गया। इसके बाद हालांकि सरकार के आर्डर आए थे कि बार को खोल दिया जाए, लेकिन जब इसके 5 साल के पिछले रिकार्ड को देखा गया तो यह साल दर साल घाटे में चलता दिखाई दिया। इसके बाद इसे न ही खोलने का फैसला लिया गया है।
ग्राहकों के लिए नहीं, अपने लिए बनाते हैं भोजन
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स की दुर्दशा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर राशन आता है तो वह केवल कर्मचारियों के भोजन के लिए ही मंगाया जाता है। यह एक ऐसा सरकारी टूरिज्म पैलेस है, जहां ग्राहकों के लिए नहीं बल्कि स्टाफ के लिए ही भोजन बनता है।
कमरे पर 12 तो खाने पर 5 फीसदी जीएसटी
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स में हालांकि भोजन आदि के लिए कोई ग्राहक आता ही नहीं, इसलिए आज तक कोई रसीद भोजन की नहीं कटी है। हां इक्का दुक्का लोग यहां पर रात्रि ठहराव के लिए जरूर पहुंचते हैं, जिन पर कमरे के रेट के साथ-साथ 12 फीसदी जीएसटी लगाई जाती है। इसके अलावा खाने पर 5 फीसदी जीएसटी है, लेकिन यहां के कर्मचारियों को यह चार्ज करने की आज तक नौबत ही नहीं पड़ी। ढाई लाख मासिक घाटा हो रहा है सरकार को
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स में इस समय 6 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें एक काउंटर इंचार्ज, दो कुक, एक वेटर, एक स्वीपर व एक माली शामिल है। इन सभी का मासिक वेतन करीब पौने 2 लाख रुपये तक है। इसके अलावा बिजली बिल व अन्य खर्चों को मिलाकर ढाई लाख रुपये मासिक खर्च आता है। आमदनी जीरो होने के कारण सरकार को हर महीने ढाई लाख रुपये का नुक्सान इस टुरिस्ट कांप्लेक्स की वजह से उठाना पड़ रहा है।
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कर्मचारी भी हैं परेशान
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स में पिछले काफी सालों से काम कर रहे कुक किशन प्रसाद ने बताया कि जब यह रेस्टोरेंट खुला था तो उनके पास काफी काम था और उनको काम करने में मजा भी आता था। लेकिन अब सारा दिन खाली बैठकर ही काम चलाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि अगर यहां काम नहीं है तो उनका कहीं और तबादला कर देें, ताकि हम काम तो कर सकें। ऐसे खाली बैठे रहने भी उनको परेशानी होती है।
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शहरवासी नहीं आते रेस्टोरेंट में: काउंटर इंचार्ज
पपीहा टूरिस्ट कांप्लेक्स के काउंटर इंचार्ज जगजीत सिंह ने बताया कि शहरवासी रेस्टोरेंट में आते ही नहीं है। इस कारण पिछले काफी समय से रेस्टोरेंट बंद पड़ा है। यही नहीं बार में भी सरकार को घाटा ही लग रहा था, इसलिए इसे चलाया नहीं गया। उन्होंने बताया कि कोई रेस्टोरेंट में नहीं आता, इसलिए हम राशन भी नहीं लाते, क्योंकि यह खराब हो जाता है। केवल स्टाफ के भोजन लायक ही राशन लाया जाता है। यहां पर ठहरने के लिए दो कमरे बनाए गए हैं, इसमें भी कभी कभार ही लोग आते हैं। जिस कारण यह पैलेस पूरी तरह से घाटे में जा रहा है।