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चिटफंड कंपनी के सीएमडी से 25 हजार बरामद, समाना में बनाई कोठी होगी अटैच
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फतेहाबाद। एसआईटी ने चिटफंड कंपनी वेल्थ वे मार्केटिंग कंपनी के सीएमडी जिला मानसा के सरदूलगढ़ निवासी सुखचैन कुमार से तीन दिन के रिमांड के दौरान 25 हजार रुपये की नकदी बरामद की है। इसके अलावा निवेशकों के रुपये से बनाई गई कोठी के बारे में जानकारी जुटाई है।
आरोपी ने निवेशकों के रुपये से पंजाब के समाना में कोठी बनाई है। एसआईटी कोठी की रजिस्ट्री को कब्जे में लेगी और इसके बाद इसे अटैच करेगी। इसके अलावा रिमांड के दौरान आईडी लगाने के लिए प्रयोग होने वाले साफ्टवेयर के बारे में जानकारी जुटाई है। साफ्टवेयर के जरिये ही निवेशकों की आईडी लगाई जाती थी। ये साफ्टवेयर पंजाब के अबोहर से तैयार करवाया गया था। टीम ने इसे जांच के लिए चंडीगढ़ भेजा है, साफ्टवेयर से ही खुलासा होगा कि कितना लेन-देन किया गया और कितनी राशि निवेशकों को वापस लौटाई गई है। आरोपी सीएमडी का कहना है कि कंपनी ने 9 करोड़ रुपये का बिजनेस किया, इसमें से 6 करोड़ रुपये वापस लौटा दिए गए। करीब तीन करोड़ रुपये नहीं लौटाए गए। एसआईटी जांच करेगी कि कितनी राशि निवेशकों से ठगी गई है। जांच में पता चला है कि पुलिस कर्मी का बेटा भी इसमें शामिल था। तीन दिन के रिमांड के बाद एसआईटी ने आरोपी सुखचैन को बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश किया, यहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
ये है मामला
मामले के मुताबिक शहर पुलिस ने 4 मार्च को ढाणी माजरा निवासी पवन कुमार की शिकायत पर चिटफंड कंपनी के सीएमडी सुखचैन अरोड़ा, एमडी सुखविंद्र सिंह, शिवाजीत, सुखविंद्र सिंह की बेटी, प्रमोटर अजय के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पवन कुमार ने शिकायत में आरोप लगाया था कि आरोपी उसके ऑटो मार्केट में मकान पर आए। आरोपी सुखविंद्र सिंह ने खुद को वेल्थ वे मार्केटिंग कंपनी का एमडी और पुलिस इंस्पेक्टर बताया। इसके अलावा सुखचैन ने खुद को सीएमडी, शिवाजीत ने मैनेजर तथा अजय ने प्रमोटर व एक युवती भी आई। आरोपियों ने उसे 6 गुणा रुपये देने के प्लान के बारे में बताया और कहा कि 52 हजार रुपये की आईडी लगाने पर 3 लाख 25 हजार रुपये मिलेंगे। उसने झांसे में आकर करीब साढ़े 9 लाख रुपये का निवेश कंपनी में कर दिया। लेकिन बाद में उसके खाते में रुपये आने बंद हो गए। जब उसने आरोपियों से संपर्क किया तो उन्होंने देने से इंकार कर दिया।
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वर्जन
तीन दिन के रिमांड के दौरान आरोपी सीएमडी से नकदी और कोठी के बारे में जानकारी जुटाई गई है। आरोपी ने बताया कि उसने निवेशकों के रुपये से समाना में कोठी बना ली। कोठी को अटैच किया जाएगा।
- रामभगत, जांच अधिकारी, एसआईटी
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आरोपी ने निवेशकों के रुपये से पंजाब के समाना में कोठी बनाई है। एसआईटी कोठी की रजिस्ट्री को कब्जे में लेगी और इसके बाद इसे अटैच करेगी। इसके अलावा रिमांड के दौरान आईडी लगाने के लिए प्रयोग होने वाले साफ्टवेयर के बारे में जानकारी जुटाई है। साफ्टवेयर के जरिये ही निवेशकों की आईडी लगाई जाती थी। ये साफ्टवेयर पंजाब के अबोहर से तैयार करवाया गया था। टीम ने इसे जांच के लिए चंडीगढ़ भेजा है, साफ्टवेयर से ही खुलासा होगा कि कितना लेन-देन किया गया और कितनी राशि निवेशकों को वापस लौटाई गई है। आरोपी सीएमडी का कहना है कि कंपनी ने 9 करोड़ रुपये का बिजनेस किया, इसमें से 6 करोड़ रुपये वापस लौटा दिए गए। करीब तीन करोड़ रुपये नहीं लौटाए गए। एसआईटी जांच करेगी कि कितनी राशि निवेशकों से ठगी गई है। जांच में पता चला है कि पुलिस कर्मी का बेटा भी इसमें शामिल था। तीन दिन के रिमांड के बाद एसआईटी ने आरोपी सुखचैन को बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश किया, यहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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ये है मामला
मामले के मुताबिक शहर पुलिस ने 4 मार्च को ढाणी माजरा निवासी पवन कुमार की शिकायत पर चिटफंड कंपनी के सीएमडी सुखचैन अरोड़ा, एमडी सुखविंद्र सिंह, शिवाजीत, सुखविंद्र सिंह की बेटी, प्रमोटर अजय के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पवन कुमार ने शिकायत में आरोप लगाया था कि आरोपी उसके ऑटो मार्केट में मकान पर आए। आरोपी सुखविंद्र सिंह ने खुद को वेल्थ वे मार्केटिंग कंपनी का एमडी और पुलिस इंस्पेक्टर बताया। इसके अलावा सुखचैन ने खुद को सीएमडी, शिवाजीत ने मैनेजर तथा अजय ने प्रमोटर व एक युवती भी आई। आरोपियों ने उसे 6 गुणा रुपये देने के प्लान के बारे में बताया और कहा कि 52 हजार रुपये की आईडी लगाने पर 3 लाख 25 हजार रुपये मिलेंगे। उसने झांसे में आकर करीब साढ़े 9 लाख रुपये का निवेश कंपनी में कर दिया। लेकिन बाद में उसके खाते में रुपये आने बंद हो गए। जब उसने आरोपियों से संपर्क किया तो उन्होंने देने से इंकार कर दिया।
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तीन दिन के रिमांड के दौरान आरोपी सीएमडी से नकदी और कोठी के बारे में जानकारी जुटाई गई है। आरोपी ने बताया कि उसने निवेशकों के रुपये से समाना में कोठी बना ली। कोठी को अटैच किया जाएगा।
- रामभगत, जांच अधिकारी, एसआईटी