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अपने हकों को पाने के लिए भटक रहे भाखड़ा विस्थापित : राजेंद्र ठाकुर
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हक पाने के लिए भटक रहे भाखड़ा विस्थापित : राजेंद्र ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। 62 सालों के बाद भी भाखड़ा विस्थापित लोगों को अपने हकों को पाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यह बात भाखड़ा डैम औस्टीज एसोसिएशन के कार्यकारी प्रधान राजेंद्र ठाकुर ने कही। ठाकुर रविवार को रेस्ट हाउस में आयोजित एसोसिएशन की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाखड़ा बांध के लिए उन लोगों की जमीन 1956 में एक्वायर की गई थी और उसके बदले में बिना किसी रणनीति के ही उनको इधर उधर भेज दिया गया। यहां तक कि विस्थापित करने से पूर्व उनकी अधिगृहित की गई जमीन की पैमाइश नहीं करवाई गई और न ही उसके बदले में उतनी जमीन दी गई। उस समय के अधिकारियों ने अधिकतम 25 एकड़ जमीन अलॉट करने की बात कही और 4 मरले तक अलॉट की गई। राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि उस समय भाखड़ा क्षेत्र के लोग साल में तीन फसलें लेते थे जबकि यहां पर अलॉट की गई जमीन बिरानी क्षेत्र में अलॉट की गई। इसके अलावा फतेहाबाद जिला के गांव अहलीसदर और सिरसा के गांव देसूजौधा में अभी तक अलॉट नहीं की गई। जो जमीन अलॉट की गई अधिकांश गांवों में उस जमीन पर लोगों द्वारा कब्जा किया हुआ है। जिस पर स्थानीय प्रशासन व सरकार ने कब्जा छुड़वाकर नहीं दिया। अब तक कई सरकारें आई और गई लेकिन भाखड़ा विस्थापितों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किसी सरकार ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री से भी एसोसिएशन मिल चुकी है लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन एसोसिएशन को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी। बैठक में एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार, सचिव रामस्वरुप शर्मा, कौषाध्यक्ष हजारी लाल शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य रणवीर सिंह, रमेश कुमार, कुलदीप सिंह, पूर्व प्रधान ठाकुर अजमेर सिंह, निरंजन सिंह, राजेश कुमार सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। 62 सालों के बाद भी भाखड़ा विस्थापित लोगों को अपने हकों को पाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यह बात भाखड़ा डैम औस्टीज एसोसिएशन के कार्यकारी प्रधान राजेंद्र ठाकुर ने कही। ठाकुर रविवार को रेस्ट हाउस में आयोजित एसोसिएशन की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाखड़ा बांध के लिए उन लोगों की जमीन 1956 में एक्वायर की गई थी और उसके बदले में बिना किसी रणनीति के ही उनको इधर उधर भेज दिया गया। यहां तक कि विस्थापित करने से पूर्व उनकी अधिगृहित की गई जमीन की पैमाइश नहीं करवाई गई और न ही उसके बदले में उतनी जमीन दी गई। उस समय के अधिकारियों ने अधिकतम 25 एकड़ जमीन अलॉट करने की बात कही और 4 मरले तक अलॉट की गई। राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि उस समय भाखड़ा क्षेत्र के लोग साल में तीन फसलें लेते थे जबकि यहां पर अलॉट की गई जमीन बिरानी क्षेत्र में अलॉट की गई। इसके अलावा फतेहाबाद जिला के गांव अहलीसदर और सिरसा के गांव देसूजौधा में अभी तक अलॉट नहीं की गई। जो जमीन अलॉट की गई अधिकांश गांवों में उस जमीन पर लोगों द्वारा कब्जा किया हुआ है। जिस पर स्थानीय प्रशासन व सरकार ने कब्जा छुड़वाकर नहीं दिया। अब तक कई सरकारें आई और गई लेकिन भाखड़ा विस्थापितों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किसी सरकार ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री से भी एसोसिएशन मिल चुकी है लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन एसोसिएशन को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी। बैठक में एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार, सचिव रामस्वरुप शर्मा, कौषाध्यक्ष हजारी लाल शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य रणवीर सिंह, रमेश कुमार, कुलदीप सिंह, पूर्व प्रधान ठाकुर अजमेर सिंह, निरंजन सिंह, राजेश कुमार सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।