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नगर परिषद की ऑटो मार्केट में 17 समेत शहर में 20 दुकानें खाली, 2 लाख का हर माह घाटा
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फतेहाबाद। नगर परिषद के अफसर हर माह दो से ढाई लाख रुपये का घाटा नगर निकाय का करवा रहे है। घाटा सिर्फ इसलिए हो रहा है कि नगर परिषद के अफसर किराये के लिए खाली पड़ी 20 दुकानों की बोली नहीं करवा रहे हैं। ये दुकानें एक नहीं बल्कि 6 साल से खाली हैं। ऑटो मार्केट में ही 17 दुकानें खाली पड़ी हैं। इसके अलावा देवीलाल मार्केट में दो और भीमां बस्ती में एक दुकान खाली है।
नप अफसरों ने एक साल पहले खाली पड़ी दुकानों की बोली करवाकर किराये पर देने की योजना बनाई थी, लेकिन अफसरों के बदलते ही फाइल दबा दी गई। एक साल बीतने के बाद आज तक नप अधिकारियों ने खाली पड़ी दुकानों की बोली नहीं करवाई है। नप अगर बोली करवाकर दुकानों को किराये पर देता है तो करीब एक करोड़ रुपये तक सिक्योरिटी राशि जमा हो सकती है और लाखों रुपये का किराया हर माह आ सकता है।
मोटे प्रीमियम के चक्कर में प्रॉपर्टी डीलरों ने ली थी दुकानें :
नगर परिषद ने ऑटो मार्केट में दुकानों का निर्माण करवाने के बाद 2010-11 में बोली करवाई थी। कई प्रॉपर्टी डीलरों व पार्षदों के रिश्तेदारों ने मोटे प्रीमियम के चक्कर में दुकानों की बोली चढ़ाकर अपने नाम करवाया था, लेकिन मार्केट में मंदा आने के बाद किराया तक नहीं भरा गया। हालात ये हुए कि सिक्योरिटी राशि नगर परिषद ने जब्त कर ली और दुकानों किरायेदारों ने सरेंडर कर दिया। कई पार्षदों के रिश्तेदारों ने अधिकारियों से मिलकर किराया माफ करवाने का प्रयास किया था, जिसमें वह फंस गए थे।
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एक साल पहले बनी थी इन दुकानों की बोली करवाने की योजना
नगर परिषद अधिकारियों ने पिछले साल ऑटो मार्केट की 17, देवीलाल मार्केट की दो और भीमां बस्ती की एक दुकान किराये पर देने के लिए योजना बनाई थी।
नगर परिषद की 20 दुकानें किराये के लिए खाली है, इस बारे में मामला अभी संज्ञान में आया है। इस संबंध में संबंधित अफसरों से फाइल मंगवाई जाएगी और जल्द ये प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- राजेश कुमार, एसडीएम
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नप अफसरों ने एक साल पहले खाली पड़ी दुकानों की बोली करवाकर किराये पर देने की योजना बनाई थी, लेकिन अफसरों के बदलते ही फाइल दबा दी गई। एक साल बीतने के बाद आज तक नप अधिकारियों ने खाली पड़ी दुकानों की बोली नहीं करवाई है। नप अगर बोली करवाकर दुकानों को किराये पर देता है तो करीब एक करोड़ रुपये तक सिक्योरिटी राशि जमा हो सकती है और लाखों रुपये का किराया हर माह आ सकता है।
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मोटे प्रीमियम के चक्कर में प्रॉपर्टी डीलरों ने ली थी दुकानें :
नगर परिषद ने ऑटो मार्केट में दुकानों का निर्माण करवाने के बाद 2010-11 में बोली करवाई थी। कई प्रॉपर्टी डीलरों व पार्षदों के रिश्तेदारों ने मोटे प्रीमियम के चक्कर में दुकानों की बोली चढ़ाकर अपने नाम करवाया था, लेकिन मार्केट में मंदा आने के बाद किराया तक नहीं भरा गया। हालात ये हुए कि सिक्योरिटी राशि नगर परिषद ने जब्त कर ली और दुकानों किरायेदारों ने सरेंडर कर दिया। कई पार्षदों के रिश्तेदारों ने अधिकारियों से मिलकर किराया माफ करवाने का प्रयास किया था, जिसमें वह फंस गए थे।
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एक साल पहले बनी थी इन दुकानों की बोली करवाने की योजना
नगर परिषद अधिकारियों ने पिछले साल ऑटो मार्केट की 17, देवीलाल मार्केट की दो और भीमां बस्ती की एक दुकान किराये पर देने के लिए योजना बनाई थी।
नगर परिषद की 20 दुकानें किराये के लिए खाली है, इस बारे में मामला अभी संज्ञान में आया है। इस संबंध में संबंधित अफसरों से फाइल मंगवाई जाएगी और जल्द ये प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- राजेश कुमार, एसडीएम