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गांव बड़ोपल में भाखड़ा नहर टूटी, सैंकड़ों एकड़ भूमि में घुसा पानी
Updated Sat, 07 Apr 2018 11:53 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
गांव बड़ोपल से गुजर रही भाखड़ा मेन ब्रांच नहर में शनिवार को 30 फुट चौड़ी दरार आ गई। जिससे पानी गेहूं की पकी पकाई फसल में घुस गया और सैकड़ों एकड़ खेतों में चला गया। जब नहर टूटी, तब किसान खेतों में गेहूं काट रहे थे। कटी कटाई फसल को इस पानी से नुकसान हुआ है। विभाग के कर्मचारी नहर पाटने के कार्य में जुटे हुए थे। समाचार लिखे जाने तक नहर को नहीं पाटा जा सका था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टोहाना के बलियाला हेड से भाखड़ा की मुख्य नहर से निकलकर भाखड़ा मेन ब्रांच नहर निकलती है, जो गांव काजलहेड़ी से होते हुए बड़ोपल, भट्टूकलां व राजस्थान को चली जाती है। शनिवार दोपहर करीब 1 बजे बड़ोपल के पास नहर में 30 फुट चौड़ी दरार आ गई। जिससे नहर का पानी निकलकर खेतों की ओर चला गया। इस नहर के साथ ही एक अन्य खाली नहर भी है, पहले नहर का पानी उस नहर में गया और जब छोटी नहर भर गई तो पानी तेजधारा के साथ गेहूं के खेतों की ओर चला गया। देखते ही देखते पानी सैकड़ों एकड़ नहर में चला गया। जिससे करीब 400 एकड़ गेहूं व सरसों की फसल पानी में जलमग्र हो गई। नहर में दरार आने के समय किसान गेहूं की कटाई में जुटे हुए थे, जिससे कटी कटाई फसल पर भी पानी फिर गया। किसानों ने तुरंत मामले की सूचना प्रशासन को दी। सूचना पाकर डीसी डा. हरदीप सिंह, सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता ओमप्रकाश बिश्रोई, कार्यकारी अभियंता एसके जेनेवा, विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, डीएसपी गुरदयाल सिंह व सिंचाई विभाग के कर्मचारी व मजदूर मौके पर पहुंच गए। दो जेसीबी की सहायता से नहर को पाटने का कार्य जारी
प्रशासन की ओर से नहर को पाटने के लिए दो जेसीबी मशीन लगाई गई हैं। वहीं दर्जनों मजदूर व ग्रामीण मिट्टी के कट्टों से नहर को पाटने के काम में लगे थे। नहर को पाटने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन बहाव अधिक होने के कारण उसे पाटने में मजदूरों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा।
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कई स्थानों पर हैं टूटी है नहर की पटरी
गांव बड़ोपल निवासी विनोद कड़वासरा ने बताया कि सिंचाई विभाग इस नहर की पटरी की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। काजलहेड़ी हैड से लेकर बड़ोपल तक इस नहर की पटरी में करीब 50 स्थानों पर दरारें आई हुई हैं और उनपर मिट्टी के कट्टे लगाए गए हैं। जिससे कभी भी यह नहर कहीं से भी टूट सकती है और किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।
2004 में भी टूटी थी नहर
बड़ोपल से गुजरने वाली भाखड़ा मेन ब्रांच नहर में 2004 में भी इसी प्रकार बड़ी दरार आ गई थी। यह नहर गांव खजूरी के पास टूटी थी और उस समय भी किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी। किसानों ने बताया कि नहर की पटरी काफी पुरानी है और इसकी मरम्मत अवश्य होनी चाहिए।
एनपीसीआईएल को भी इसी से मिलेगा पानी
भाखड़ा मेन ब्रांच नहर बलियाला हैड से निकलती है और इसकी क्षमता 2 हजार क्यूसिक है, लेकिन अक्सर इसमें इतना पानी नहीं छोड़ा जाता। गांव बड़ोपल के लोगों की मानें तो इसमें 1500 से 1800 क्यूसिक पानी का ही बहाव रहता है। इसी नहर से 320 क्यूसिक पानी परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना गोरखपुर को दिया जाना है। अगर इसी तरह नहर टूटती रही तो किसानों को पानी कहां से मिलेगा, क्योंकि इसका कुछ हिस्सा तो एनपीसीआईएल को मिल जाएगा।
दरार बड़ी, सुबह तक लगेगा समय: जेनेवा
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता एसके जेनेवा ने बताया कि बिल खोदने वाले जानवरों की वजह से नहर में दरार आई है। उन्होंने बताया कि बड़ोपल एरिया में शेह नामक जानवर अधिक हैं, जो नहर किनारे अपने बिल खोद देते हैं, जिसकी वजह से यहां मिट्टी खोखली हो गई थी और दरार आ गई। उन्होंने बताया कि नहर को पाटने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है और सुबह तक नहर की दरार को भर दिया जाएगा।
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फतेहाबाद।
गांव बड़ोपल से गुजर रही भाखड़ा मेन ब्रांच नहर में शनिवार को 30 फुट चौड़ी दरार आ गई। जिससे पानी गेहूं की पकी पकाई फसल में घुस गया और सैकड़ों एकड़ खेतों में चला गया। जब नहर टूटी, तब किसान खेतों में गेहूं काट रहे थे। कटी कटाई फसल को इस पानी से नुकसान हुआ है। विभाग के कर्मचारी नहर पाटने के कार्य में जुटे हुए थे। समाचार लिखे जाने तक नहर को नहीं पाटा जा सका था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टोहाना के बलियाला हेड से भाखड़ा की मुख्य नहर से निकलकर भाखड़ा मेन ब्रांच नहर निकलती है, जो गांव काजलहेड़ी से होते हुए बड़ोपल, भट्टूकलां व राजस्थान को चली जाती है। शनिवार दोपहर करीब 1 बजे बड़ोपल के पास नहर में 30 फुट चौड़ी दरार आ गई। जिससे नहर का पानी निकलकर खेतों की ओर चला गया। इस नहर के साथ ही एक अन्य खाली नहर भी है, पहले नहर का पानी उस नहर में गया और जब छोटी नहर भर गई तो पानी तेजधारा के साथ गेहूं के खेतों की ओर चला गया। देखते ही देखते पानी सैकड़ों एकड़ नहर में चला गया। जिससे करीब 400 एकड़ गेहूं व सरसों की फसल पानी में जलमग्र हो गई। नहर में दरार आने के समय किसान गेहूं की कटाई में जुटे हुए थे, जिससे कटी कटाई फसल पर भी पानी फिर गया। किसानों ने तुरंत मामले की सूचना प्रशासन को दी। सूचना पाकर डीसी डा. हरदीप सिंह, सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता ओमप्रकाश बिश्रोई, कार्यकारी अभियंता एसके जेनेवा, विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, डीएसपी गुरदयाल सिंह व सिंचाई विभाग के कर्मचारी व मजदूर मौके पर पहुंच गए। दो जेसीबी की सहायता से नहर को पाटने का कार्य जारी
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प्रशासन की ओर से नहर को पाटने के लिए दो जेसीबी मशीन लगाई गई हैं। वहीं दर्जनों मजदूर व ग्रामीण मिट्टी के कट्टों से नहर को पाटने के काम में लगे थे। नहर को पाटने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन बहाव अधिक होने के कारण उसे पाटने में मजदूरों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा।
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कई स्थानों पर हैं टूटी है नहर की पटरी
गांव बड़ोपल निवासी विनोद कड़वासरा ने बताया कि सिंचाई विभाग इस नहर की पटरी की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। काजलहेड़ी हैड से लेकर बड़ोपल तक इस नहर की पटरी में करीब 50 स्थानों पर दरारें आई हुई हैं और उनपर मिट्टी के कट्टे लगाए गए हैं। जिससे कभी भी यह नहर कहीं से भी टूट सकती है और किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।
2004 में भी टूटी थी नहर
बड़ोपल से गुजरने वाली भाखड़ा मेन ब्रांच नहर में 2004 में भी इसी प्रकार बड़ी दरार आ गई थी। यह नहर गांव खजूरी के पास टूटी थी और उस समय भी किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी। किसानों ने बताया कि नहर की पटरी काफी पुरानी है और इसकी मरम्मत अवश्य होनी चाहिए।
एनपीसीआईएल को भी इसी से मिलेगा पानी
भाखड़ा मेन ब्रांच नहर बलियाला हैड से निकलती है और इसकी क्षमता 2 हजार क्यूसिक है, लेकिन अक्सर इसमें इतना पानी नहीं छोड़ा जाता। गांव बड़ोपल के लोगों की मानें तो इसमें 1500 से 1800 क्यूसिक पानी का ही बहाव रहता है। इसी नहर से 320 क्यूसिक पानी परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना गोरखपुर को दिया जाना है। अगर इसी तरह नहर टूटती रही तो किसानों को पानी कहां से मिलेगा, क्योंकि इसका कुछ हिस्सा तो एनपीसीआईएल को मिल जाएगा।
दरार बड़ी, सुबह तक लगेगा समय: जेनेवा
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता एसके जेनेवा ने बताया कि बिल खोदने वाले जानवरों की वजह से नहर में दरार आई है। उन्होंने बताया कि बड़ोपल एरिया में शेह नामक जानवर अधिक हैं, जो नहर किनारे अपने बिल खोद देते हैं, जिसकी वजह से यहां मिट्टी खोखली हो गई थी और दरार आ गई। उन्होंने बताया कि नहर को पाटने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है और सुबह तक नहर की दरार को भर दिया जाएगा।