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कण्डम घोषित है गोरखपुर का पशु अस्पताल, फिर भी चल रहा पशुओं का इलाज
Updated Sat, 29 Jul 2017 12:43 AM IST
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कंडम घोषित है गोरखपुर का पशु अस्पताल, फिर भी चल रहा इलाज
फतेहाबाद।
कंडम हो चुके गांव गोरखपुर के पशु अस्पताल में अभी भी पशुओं का इलाज चल रहा है। अस्पताल के हालात यह हैं कि इसकी छत कभी की गिर सकती है। इसी चारदीवारी पहले ही टूट चुकी है और सारा दिन यहां पर लावारिस पशु बैठे रहते हैं। विभाग की ओर से इसकी इमारत को कंडम भी घोषित किया जा चुका है। विभाग इस इंतजार में है कि कब नाबार्ड से इसकी मरम्मत के लिए राशि आए और नई इमारत का निर्माण किया जाए, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा कि अगर यह इमारत गिर गई तो जान माल का कितना नुकसान होगा। आलम यह है कि गांव के लोग अपने पशुओं का इलाज करवाने के लिए भी यहां आने से कतराते हैं। विभाग इस इमारत को कंडम होने की पुष्टि तो कर रहा है, लेकिन नई इमारत का निर्माण कब होगा, इसके लिए नाबार्ड की ग्रांट आने का हवाला देता रहता है। जिले के सबसे अधिक आबादी वाले गांव गोरखपुर में करीब 50 साल पहले इस पशु अस्पताल का निर्माण किया गया था। इस गांव की आबादी करीब 25 हजार है। ज्यादातर लोग किसान हैं और पशुपालन करते हैं। आसपास के गांवों के लोग भी यहां पशुओं को इलाज के लिए लाते हैं, लेकिन इस अस्पताल के हालात अब बिल्कुल जर्जर हो चुके हैं। अस्पताल की छतों में दरारें आ चुकी हैं। चारदीवारी को टूटे हुए काफी समय हो गया है। लावारिस सुअर और कुत्ते सारा दिन यहां पर घूमते रहते हैं। पशुओं के इलाज के लिए बनाया गया स्थान काफी जर्जर हो चुका है। बावजूद इसके पशुपालन विभाग ने आज तक इस बारे में कोई ध्यान नहीं दिया। बारिश के दिनों में तो यहां के हालात और भी बदतर हो जाते हैं। प्रांगण में पानी जमा रहता है। गांव की सरपंच सोनिया शर्मा, पंचायत समिति सदस्य कृष्ण कुमार व पंच दिनेश ने इस अस्पताल के हालात ठीक करने के लिए कई बार विभाग को गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि जब विभाग इस इमारत को कंडम घोषित कर चुका है कि इसे गिराकर नई क्यों नहीं बना देता।
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फतेहाबाद।
कंडम हो चुके गांव गोरखपुर के पशु अस्पताल में अभी भी पशुओं का इलाज चल रहा है। अस्पताल के हालात यह हैं कि इसकी छत कभी की गिर सकती है। इसी चारदीवारी पहले ही टूट चुकी है और सारा दिन यहां पर लावारिस पशु बैठे रहते हैं। विभाग की ओर से इसकी इमारत को कंडम भी घोषित किया जा चुका है। विभाग इस इंतजार में है कि कब नाबार्ड से इसकी मरम्मत के लिए राशि आए और नई इमारत का निर्माण किया जाए, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा कि अगर यह इमारत गिर गई तो जान माल का कितना नुकसान होगा। आलम यह है कि गांव के लोग अपने पशुओं का इलाज करवाने के लिए भी यहां आने से कतराते हैं। विभाग इस इमारत को कंडम होने की पुष्टि तो कर रहा है, लेकिन नई इमारत का निर्माण कब होगा, इसके लिए नाबार्ड की ग्रांट आने का हवाला देता रहता है। जिले के सबसे अधिक आबादी वाले गांव गोरखपुर में करीब 50 साल पहले इस पशु अस्पताल का निर्माण किया गया था। इस गांव की आबादी करीब 25 हजार है। ज्यादातर लोग किसान हैं और पशुपालन करते हैं। आसपास के गांवों के लोग भी यहां पशुओं को इलाज के लिए लाते हैं, लेकिन इस अस्पताल के हालात अब बिल्कुल जर्जर हो चुके हैं। अस्पताल की छतों में दरारें आ चुकी हैं। चारदीवारी को टूटे हुए काफी समय हो गया है। लावारिस सुअर और कुत्ते सारा दिन यहां पर घूमते रहते हैं। पशुओं के इलाज के लिए बनाया गया स्थान काफी जर्जर हो चुका है। बावजूद इसके पशुपालन विभाग ने आज तक इस बारे में कोई ध्यान नहीं दिया। बारिश के दिनों में तो यहां के हालात और भी बदतर हो जाते हैं। प्रांगण में पानी जमा रहता है। गांव की सरपंच सोनिया शर्मा, पंचायत समिति सदस्य कृष्ण कुमार व पंच दिनेश ने इस अस्पताल के हालात ठीक करने के लिए कई बार विभाग को गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि जब विभाग इस इमारत को कंडम घोषित कर चुका है कि इसे गिराकर नई क्यों नहीं बना देता।