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गोपी काटन फैक्ट्री में भीषण आग, एक करोड़ से अधिक कीमत का 23 सौ क्विंटल नरमा जलकर राख
Updated Sun, 13 May 2018 12:40 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
सिरसा रोड पर सागर पैलेस के सामने स्थित गोपी कॉटन फैक्ट्री में शनिवार शाम भीषण आग लग गई। इससे फैक्ट्री परिसर में रखा गया तकरीबन 23 क्विंटल नरमा जलकर राख हो गया। जल चुके नरमे की कीमत लगभग एक करोड़ से अधिक रुपये आंकी जा रही है। फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिलने के बाद दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंची और तकरीबन दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फैक्ट्री मालिक रविंद्र गर्ग बिल्लु के मुताबिक घटना के समय लगभग तीन सौ क्विंटल नरमा घटनास्थल से महज 80 फुट की दूरी पर पड़ा था, अगर हवा दूसरी तरह चलती तो नरमे का वह ढेर भी चपेट में आ जाता। आग लगने के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। लेकिन फायर आफिसर छेलूराम की ओर से आशंका जताई जा रही है कि कहीं पर शार्ट सर्किट के चलते हवा तेज होने के चलते चिंगारी नरमे के ढेर पर गिरी और आग लग गई।
गोपी काटन फैक्ट्री के मालिक रविंद्र गर्ग बिल्लु ने बताया कि उनका नरमे से रूई बनाने और बिनौलों का तेल आदि निकालने का काम है और उन्होंने सिरसा रोड पर अपनी खुद की फैक्ट्री बना रखी है। स्टाक रजिस्टर दिखाते हुए फैक्ट्री मालिक रविंद्र गर्ग ने बताया कि शनिवार को फैक्ट्री परिसर में नरमे का कुल स्टाक लगभग 26 सौ क्विंटल से अधिक था। इसमें से तीन सौ क्विंटल के करीब नरमे का स्टाक अलग रखा हुआ क्योंकि उसमें थोड़ी नमी रह गई थी बारिश के चलते। बाकी सारा माल फैक्ट्री में ही रखा हुआ था। शनिवार दोपहर बाद वो अपने दफ्तर में बैठे थे कि अचानक उन्हें बाहर से आवाजें आती सुनाई दी कि नरमे को आग लग गई। उन्होंने बाहर देखा तो फैक्ट्री परिसर में रखा हुआ नरमा पूरी तरह आग की चपेट में आ चुका था और धूं-धूं कर जल रहा था। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में भी उन्होंने एक टंकी आपातकालीन स्थिति के लिए बनवाई हुई है, उनके कर्मचारियों ने पहले उस टंकी से पानी की बौछारें जलते नरमे पर डालने का प्रयास किया और इसके बाद फायर बिग्रेड को सूचित किया गया। दमकल की चार गाडिय़ां फायर अधिकारी छेलुराम के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।
इधर-उधर भागकर नरमा बचाने का प्रयास करते दिखे फैक्ट्री संचालक व परिजन
शनिवार दोपहर को आगजनी की घटना के दौरान गोपी काटन फैक्ट्री के संचालक रविंद्र गर्ग व उनके बेटे सहित अन्य परिजन काफी परेशान दिखे। बदहवासी की हालत में वे नरमे के जलते हुए ढेर के कभी एक कोने में तो कभी दूसरे कोने से नरमे को बचाने का प्रयास करते दिखे। कई बार उन्होंने खुद अपने कर्मचारियों के हाथ से पाइप लेकर खुद आग पर कंट्रोल करने के लिए पानी की बौछारें की। उनकी कोशिश थी कि हवा का बहाव कहीं दूसरी ओर ना हो जाए और आग की लपटें कहीं मशीनों की ओर चली जाएं। अगर ऐसा होता तो नुकसान इससे दो-तीन गुणा ज्यादा हो सकता था। हालांकि रविवार को मशीनों के एक्सपर्ट को बुलाकर मशीनों की जांच करवाने की बात फैक्ट्री मालिक की ओर से की कही गई है।
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फतेहाबाद।
सिरसा रोड पर सागर पैलेस के सामने स्थित गोपी कॉटन फैक्ट्री में शनिवार शाम भीषण आग लग गई। इससे फैक्ट्री परिसर में रखा गया तकरीबन 23 क्विंटल नरमा जलकर राख हो गया। जल चुके नरमे की कीमत लगभग एक करोड़ से अधिक रुपये आंकी जा रही है। फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिलने के बाद दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंची और तकरीबन दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फैक्ट्री मालिक रविंद्र गर्ग बिल्लु के मुताबिक घटना के समय लगभग तीन सौ क्विंटल नरमा घटनास्थल से महज 80 फुट की दूरी पर पड़ा था, अगर हवा दूसरी तरह चलती तो नरमे का वह ढेर भी चपेट में आ जाता। आग लगने के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। लेकिन फायर आफिसर छेलूराम की ओर से आशंका जताई जा रही है कि कहीं पर शार्ट सर्किट के चलते हवा तेज होने के चलते चिंगारी नरमे के ढेर पर गिरी और आग लग गई।
गोपी काटन फैक्ट्री के मालिक रविंद्र गर्ग बिल्लु ने बताया कि उनका नरमे से रूई बनाने और बिनौलों का तेल आदि निकालने का काम है और उन्होंने सिरसा रोड पर अपनी खुद की फैक्ट्री बना रखी है। स्टाक रजिस्टर दिखाते हुए फैक्ट्री मालिक रविंद्र गर्ग ने बताया कि शनिवार को फैक्ट्री परिसर में नरमे का कुल स्टाक लगभग 26 सौ क्विंटल से अधिक था। इसमें से तीन सौ क्विंटल के करीब नरमे का स्टाक अलग रखा हुआ क्योंकि उसमें थोड़ी नमी रह गई थी बारिश के चलते। बाकी सारा माल फैक्ट्री में ही रखा हुआ था। शनिवार दोपहर बाद वो अपने दफ्तर में बैठे थे कि अचानक उन्हें बाहर से आवाजें आती सुनाई दी कि नरमे को आग लग गई। उन्होंने बाहर देखा तो फैक्ट्री परिसर में रखा हुआ नरमा पूरी तरह आग की चपेट में आ चुका था और धूं-धूं कर जल रहा था। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में भी उन्होंने एक टंकी आपातकालीन स्थिति के लिए बनवाई हुई है, उनके कर्मचारियों ने पहले उस टंकी से पानी की बौछारें जलते नरमे पर डालने का प्रयास किया और इसके बाद फायर बिग्रेड को सूचित किया गया। दमकल की चार गाडिय़ां फायर अधिकारी छेलुराम के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।
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इधर-उधर भागकर नरमा बचाने का प्रयास करते दिखे फैक्ट्री संचालक व परिजन
शनिवार दोपहर को आगजनी की घटना के दौरान गोपी काटन फैक्ट्री के संचालक रविंद्र गर्ग व उनके बेटे सहित अन्य परिजन काफी परेशान दिखे। बदहवासी की हालत में वे नरमे के जलते हुए ढेर के कभी एक कोने में तो कभी दूसरे कोने से नरमे को बचाने का प्रयास करते दिखे। कई बार उन्होंने खुद अपने कर्मचारियों के हाथ से पाइप लेकर खुद आग पर कंट्रोल करने के लिए पानी की बौछारें की। उनकी कोशिश थी कि हवा का बहाव कहीं दूसरी ओर ना हो जाए और आग की लपटें कहीं मशीनों की ओर चली जाएं। अगर ऐसा होता तो नुकसान इससे दो-तीन गुणा ज्यादा हो सकता था। हालांकि रविवार को मशीनों के एक्सपर्ट को बुलाकर मशीनों की जांच करवाने की बात फैक्ट्री मालिक की ओर से की कही गई है।
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