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एक ओर डेंगू के बढ़ते मरीज, दूसरी ओर संसाधनों की कमी से %बीमार’ है टोहाना का नागरिक अस्पताल
Updated Wed, 25 Oct 2017 11:54 PM IST
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सुशील सिंगला
टोहाना।
मैं टोहना नागरिक अस्पताल हूं। मेरा काम लोगों दुख-दर्द कम करना है। पूरे टोहाना की जनता मेरे भरोसे पर है कि यहां आकर वह ठीक हो जाएंगे। लेकिन मैं अपना हाल-ए-दिल किससे कहूं। कौन सुनेगा मेरी फरियाद। मैं आधे संसाधनों में जनसेवा कैसे करू। न मेरे पास पूरे डॉक्टर हैं, न टेकभनीशियन और न प्रशासनिक स्टाफ। अब ऐसे हाल में भला मैं कैसे लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरूं। वायरल ने पहले ही जान ले रखी थी, अब कमबख्त डेंगू पीछे पड़ गया है। मायूस होकर जाने वाले बीमार-दुखी लोगों का दर्द मुझसे देखा नहीं जाता। पर मैं कर भी क्या सकता हूं। मेरी डोर तो बड़े साहब केे साथ में हैं।
ये पीड़ा है नागरिक अस्पताल टोहना की। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को टोहाना नागरिक अस्पताल का दौरा किया तो वहां हर तरफ अव्यवस्था का आलम मिला। अस्पताल अपनी दुर्दशा पर रो रहा है पर देखने वाला कोई नहीं है। लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा उठाए टोहाना का नागरिक अस्पताल संसाधनों के अभाव खुद की वेंटिलेटर पर है। अस्पताल में गंदगी का आलम है और चिकित्सकों की कमी कोढ़ में खाज का काम कर रही है।
अस्पताल में रोजाना आ रहे बुखार के मरीजों को चिक्तिसक खून जांच के लिए भेजते हैं। लेकिन अस्पताल का दुर्भाग्य ऐसा है कि यहां कोई लैब कर्मी नहीं है। डीसी रेट पर लगे कर्मियों से अस्पताल प्रबंधन को काम चलाना पड़ रहा है। अस्पताल के लैब कार्यालय के बाहर लगी लंबी लाइन चीख-चीखकर अव्यवस्थाओं की दास्तां सुनाती है।
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लोगों को साफ सफाई की नसीहत देने वाले इस नागरिक अस्पताल में गंदगी का माहौल बना हुआ है। अस्पताल के पिछवाड़े में गंदा पानी अस्पताल में सफाई के दावों की पोल खोल रहा है। वहीं अस्पताल परिसर में सफाई के भी कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं। अस्पताल में चिकित्सकों की भी भारी कमी है। अस्पताल में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों के 10 पद खाली पड़े हैं। वहीं यहां पर एसएमओ के 3 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 2 ही पद भरे पड़े हैं।
इस बारे में एसएमओ डॉ. सतीश गर्ग ने बताया कि बुखार के मरीज आ रहे हैं। चिक्तिसको ंकी कमी के बारे में वे उच्च अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। गर्ग ने बताया कि लैब टेक्निशयन का तबादला होने के चलते डीसी रेट पर लगाए एक कर्मचारी से काम चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डेंगू की समस्या से निपटने के लिए उनकी टीमें सर्वे कर रही हैं तथा अस्पताल में डेंगू वार्ड भी बनाया गया है। निजी अस्पतालों द्वारा दिए जा रहे सैंपलों को वो जांच के लिए फतेहाबाद भेज देते हैं।
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टोहाना।
मैं टोहना नागरिक अस्पताल हूं। मेरा काम लोगों दुख-दर्द कम करना है। पूरे टोहाना की जनता मेरे भरोसे पर है कि यहां आकर वह ठीक हो जाएंगे। लेकिन मैं अपना हाल-ए-दिल किससे कहूं। कौन सुनेगा मेरी फरियाद। मैं आधे संसाधनों में जनसेवा कैसे करू। न मेरे पास पूरे डॉक्टर हैं, न टेकभनीशियन और न प्रशासनिक स्टाफ। अब ऐसे हाल में भला मैं कैसे लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरूं। वायरल ने पहले ही जान ले रखी थी, अब कमबख्त डेंगू पीछे पड़ गया है। मायूस होकर जाने वाले बीमार-दुखी लोगों का दर्द मुझसे देखा नहीं जाता। पर मैं कर भी क्या सकता हूं। मेरी डोर तो बड़े साहब केे साथ में हैं।
ये पीड़ा है नागरिक अस्पताल टोहना की। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को टोहाना नागरिक अस्पताल का दौरा किया तो वहां हर तरफ अव्यवस्था का आलम मिला। अस्पताल अपनी दुर्दशा पर रो रहा है पर देखने वाला कोई नहीं है। लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा उठाए टोहाना का नागरिक अस्पताल संसाधनों के अभाव खुद की वेंटिलेटर पर है। अस्पताल में गंदगी का आलम है और चिकित्सकों की कमी कोढ़ में खाज का काम कर रही है।
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अस्पताल में रोजाना आ रहे बुखार के मरीजों को चिक्तिसक खून जांच के लिए भेजते हैं। लेकिन अस्पताल का दुर्भाग्य ऐसा है कि यहां कोई लैब कर्मी नहीं है। डीसी रेट पर लगे कर्मियों से अस्पताल प्रबंधन को काम चलाना पड़ रहा है। अस्पताल के लैब कार्यालय के बाहर लगी लंबी लाइन चीख-चीखकर अव्यवस्थाओं की दास्तां सुनाती है।
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लोगों को साफ सफाई की नसीहत देने वाले इस नागरिक अस्पताल में गंदगी का माहौल बना हुआ है। अस्पताल के पिछवाड़े में गंदा पानी अस्पताल में सफाई के दावों की पोल खोल रहा है। वहीं अस्पताल परिसर में सफाई के भी कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं। अस्पताल में चिकित्सकों की भी भारी कमी है। अस्पताल में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों के 10 पद खाली पड़े हैं। वहीं यहां पर एसएमओ के 3 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 2 ही पद भरे पड़े हैं।
इस बारे में एसएमओ डॉ. सतीश गर्ग ने बताया कि बुखार के मरीज आ रहे हैं। चिक्तिसको ंकी कमी के बारे में वे उच्च अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। गर्ग ने बताया कि लैब टेक्निशयन का तबादला होने के चलते डीसी रेट पर लगाए एक कर्मचारी से काम चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डेंगू की समस्या से निपटने के लिए उनकी टीमें सर्वे कर रही हैं तथा अस्पताल में डेंगू वार्ड भी बनाया गया है। निजी अस्पतालों द्वारा दिए जा रहे सैंपलों को वो जांच के लिए फतेहाबाद भेज देते हैं।