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एनजीटी के आदेशों का बनाया मजाक, एक बारिश तक नहीं झेल सके बड़ोपल में बने जलाशय
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:22 PM IST
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वन्य जीवों के लिए अफसरों की देखरेख में बने जलाशय दो दिन में टूटे
फतेहाबाद।
बड़ोपल में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों का न्यूक्लियर पावर प्लांट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआईएल) के अधिकारियों ने मजाक बना दिया है। एनजीटी की फटकार से बचने के लिए वन्य जीवों के लिए आपाधापी में बनाए गए जलाशय दो दिन में ही दम तोड़ गए हैं जबकि एनपीसीआईएल के अधिकारी एक दिन में बनाए गए जलाशय में पानी डलवाकर इसकी फोटो एनजीटी में दाखिल कर अपनी गर्दन बचाने में कामयाब हो गए हैं। हैरत तो इस बात की भी है कि एनपीसीआईएल और वन्य जीव रक्षा विभाग द्वारा बड़ोपल में वन्य जीवों के लिए संरक्षित जमीन पर जलाशय बनाने का काम जिला प्रशासन की देखरेख में हुआ था, बावजूद इसके इन जलाशयों में इतनी घटिया क्वालिटी का सामान इस्तेमाल किया जो एक बारिश भी नहीं झेल सका और जलाशयों की तली टूटने लगी है। उधर एनपीसीआईएल के अधिकारी इसको रिपेयर करने की बात कह रहे हैं। हालांकि पर्यावरण एवं जीव रक्षा विश्नोई सभा ने इस बारे में उपायुक्त डॉ. जेके आभीर को भी पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी है।
एनजीटी ने मई में दिए थे आदेश, 14 जुलाई से पहले बनाओ जलाशय
अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्नोई सभा की याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 23 मई को एनपीसीआईएल और वन्य जीव विभाग को आदेश दिया था कि बड़ोपल में उस जमीन पर वन्य जीवों के लिए जलाशय बनाए जाएं जिस जमीन को पहले एनपीसीआईएल के अधिकारियों-कर्मचारियों की कॉलोनी बनाने के लिए अधिग्रहित किया गया था, लेकिन बाद में कॉलोनी अग्रोहा शिफ्ट हो गई और इस जमीन को वन्य जीवों के लिए छोड़ा गया था। एनजीटी के आदेशों के मुताबिक एनपीसीआईएल को 14 जुलाई तक जलाशय बनाकर 15 जुलाई को एनजीटी को स्टेटस रिपोर्ट सबमिट करनी थी। सारा जून का माह खाली बिताकर 13 जुलाई को एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने जिला प्रशासन की देखरेख में जलाशय बनवाने का काम शुरू कर दिया। लोगों की ओर से इस काम में रोकटोक ना आए, इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल तक तैनात किया गया था।
पहली बारिश में टूटी जलाशयों की तली, अब वन्य प्राणियों को आएगी दिक्कत
एनजीटी के आदेशों के बाद उसकी फटकार से बचने के लिए एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने एक तरह से एनजीटी के आदेशों को मजाक की तरह लेते हुए आनन-फानन में जलाशयों का निर्माण करवा दिया। प्रशासनिक देखरेख में 13 जुलाई को जलाशयों का काम शुरू हुआ और 14-15 जुलाई को एनजीटी में एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने इन जलाशयों के बनने की रिपोर्ट फोटो समेत एनजीटी में दाखिल कर दी। इसके बाद 16 जुलाई को आई बारिश के बाद से इन जलाशयों की तलहटी टूटने लगी है। कई जगह पर किनारे भी टूटकर नुकीले हो रहे हैं जो वन्य जीवों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
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एनजीटी का डंडा आने के बाद एनपीसीआईएल ने जलाशय तो आनन-फानन में बना दिए, लेकिन हम इनकी क्वालिटी से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। एक बारिश में ये जलाशय टूटने लगे हैं। ऐसे तो वन्य जीवों के लिए खतरा हो सकता है। हम इस बारे में एनजीटी में अपना पक्ष रखेंगे। इस बारे में उपायुक्त को भी एक पत्र लिखा है। ’
- विनोद कड़वासरा, याचिकाकर्ता एवं सदस्य अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्नोई सभा, फतेहाबाद ।
कच्ची जमीन पर कई बार जलाशय बनाते समय जगह बैठ जाती है। इसका अंदेशा पहले से था। इसके लिए तैयारी की गई है और जल्द ही इसे रिपेयरिंग कर दिया जाएगा। रिपेयरिंग के लिए पहले ही कहा जा चुका है। अगर ये दस बार भी टूटेगा तो इसे दस बार भी रिपेयर करेंगे।’
- होशियार सिंह, प्रवक्ता एवं सीनियर मैनेजर, एनपीसीआईएल, फतेहाबाद ।
फतेहाबाद।
बड़ोपल में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों का न्यूक्लियर पावर प्लांट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआईएल) के अधिकारियों ने मजाक बना दिया है। एनजीटी की फटकार से बचने के लिए वन्य जीवों के लिए आपाधापी में बनाए गए जलाशय दो दिन में ही दम तोड़ गए हैं जबकि एनपीसीआईएल के अधिकारी एक दिन में बनाए गए जलाशय में पानी डलवाकर इसकी फोटो एनजीटी में दाखिल कर अपनी गर्दन बचाने में कामयाब हो गए हैं। हैरत तो इस बात की भी है कि एनपीसीआईएल और वन्य जीव रक्षा विभाग द्वारा बड़ोपल में वन्य जीवों के लिए संरक्षित जमीन पर जलाशय बनाने का काम जिला प्रशासन की देखरेख में हुआ था, बावजूद इसके इन जलाशयों में इतनी घटिया क्वालिटी का सामान इस्तेमाल किया जो एक बारिश भी नहीं झेल सका और जलाशयों की तली टूटने लगी है। उधर एनपीसीआईएल के अधिकारी इसको रिपेयर करने की बात कह रहे हैं। हालांकि पर्यावरण एवं जीव रक्षा विश्नोई सभा ने इस बारे में उपायुक्त डॉ. जेके आभीर को भी पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी है।
एनजीटी ने मई में दिए थे आदेश, 14 जुलाई से पहले बनाओ जलाशय
अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्नोई सभा की याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 23 मई को एनपीसीआईएल और वन्य जीव विभाग को आदेश दिया था कि बड़ोपल में उस जमीन पर वन्य जीवों के लिए जलाशय बनाए जाएं जिस जमीन को पहले एनपीसीआईएल के अधिकारियों-कर्मचारियों की कॉलोनी बनाने के लिए अधिग्रहित किया गया था, लेकिन बाद में कॉलोनी अग्रोहा शिफ्ट हो गई और इस जमीन को वन्य जीवों के लिए छोड़ा गया था। एनजीटी के आदेशों के मुताबिक एनपीसीआईएल को 14 जुलाई तक जलाशय बनाकर 15 जुलाई को एनजीटी को स्टेटस रिपोर्ट सबमिट करनी थी। सारा जून का माह खाली बिताकर 13 जुलाई को एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने जिला प्रशासन की देखरेख में जलाशय बनवाने का काम शुरू कर दिया। लोगों की ओर से इस काम में रोकटोक ना आए, इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल तक तैनात किया गया था।
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पहली बारिश में टूटी जलाशयों की तली, अब वन्य प्राणियों को आएगी दिक्कत
एनजीटी के आदेशों के बाद उसकी फटकार से बचने के लिए एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने एक तरह से एनजीटी के आदेशों को मजाक की तरह लेते हुए आनन-फानन में जलाशयों का निर्माण करवा दिया। प्रशासनिक देखरेख में 13 जुलाई को जलाशयों का काम शुरू हुआ और 14-15 जुलाई को एनजीटी में एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने इन जलाशयों के बनने की रिपोर्ट फोटो समेत एनजीटी में दाखिल कर दी। इसके बाद 16 जुलाई को आई बारिश के बाद से इन जलाशयों की तलहटी टूटने लगी है। कई जगह पर किनारे भी टूटकर नुकीले हो रहे हैं जो वन्य जीवों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
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एनजीटी का डंडा आने के बाद एनपीसीआईएल ने जलाशय तो आनन-फानन में बना दिए, लेकिन हम इनकी क्वालिटी से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। एक बारिश में ये जलाशय टूटने लगे हैं। ऐसे तो वन्य जीवों के लिए खतरा हो सकता है। हम इस बारे में एनजीटी में अपना पक्ष रखेंगे। इस बारे में उपायुक्त को भी एक पत्र लिखा है। ’
- विनोद कड़वासरा, याचिकाकर्ता एवं सदस्य अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्नोई सभा, फतेहाबाद ।
कच्ची जमीन पर कई बार जलाशय बनाते समय जगह बैठ जाती है। इसका अंदेशा पहले से था। इसके लिए तैयारी की गई है और जल्द ही इसे रिपेयरिंग कर दिया जाएगा। रिपेयरिंग के लिए पहले ही कहा जा चुका है। अगर ये दस बार भी टूटेगा तो इसे दस बार भी रिपेयर करेंगे।’
- होशियार सिंह, प्रवक्ता एवं सीनियर मैनेजर, एनपीसीआईएल, फतेहाबाद ।