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डयूटी पर बिजलीकर्मी की हुई मौत के मामले में हाईकोर्ट ने विधवा को मुआवजा देने का दिया निर्देश
Updated Sun, 11 Jun 2017 11:52 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
टोहाना।
हाईकोर्ट ने ड्यूटी के दौरान मौत का शिकार हुए बिजली विभाग के एलडीसी महिपाल की विधवा को पांच लाख रुपये का मुआवजा ब्याज सहित देने का निर्णय सुनाया है। बिजली विभाग नियमों का हवाला देकर विधवा कृष्णा देवी को मुआवजा देने में आनाकानी कर रहा था। इस पर पीड़िता ने जून 2016 में हाईकोर्ट में याचिका डालकर मुआवजे की मांग की थी। हाईकोर्ट ने मुआवजा देने का ऐलान किया है। बता दें कि साल 2002 में कृष्णा देवी के पति महिला की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी।
जानकारी के अनुसार आजाद नगर निवासी विधवा महिला कृष्णा देवी के पति माहिपाल बिजली बोर्ड में एलडीसी के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2002 में ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी मृत्यु हो गई थी। उस समय सरकार द्वारा पालिसी थी कि परिवार के एक सदस्य को या तो नौकरी मिलेगी या ढाई लाख रुपये की राशि मिलेगी। जिसके बाद सरकार ने 2005 में पॉलिसी को बदलते हुए राशि को बढ़ाकर पांच लाख कर दिया लेकिन परिवार के सदस्य को नौकरी को बंद कर दिया। वर्ष 2006 में विभाग की ओर से पत्र आया कि राशि लेने के लिए आप तीन माह के समय के भीतर आवेदन करना होता है आप आवेदन नहीं कर पाए। जिसके बाद पीड़ित परिवार की ओर से मामले को लेकर अधिवक्ता अफताब सिंह खारा के माध्यम से जून 2016 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिसमें हरियाणा सरकार के चीफ सैकटरी, उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम के निदेशक, उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम के चीफ इंजीनियर, सुपरिंडेंटिंग इंजीनियर ऑपरेशन उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम कुरूक्षेत्र, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ऑपरेशन कैथल को पार्टी बनाया गया।
ड्यूटी पर बिजलीकर्मी की हुई मौत, हाईकोर्ट ने विधवा को मुआवजा देने का दिया निर्देश
साल 2002 में हुई थी बिजलीकर्मी महिपाल की मौत, काफी समय तक नौकरी का इंतजार करते रहे परिजन
पिछले साल हाईकोर्ट में डाली था मुआवजे की याचिका, अब जाकर कोर्ट ने सुनाया फैसला
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टोहाना।
हाईकोर्ट ने ड्यूटी के दौरान मौत का शिकार हुए बिजली विभाग के एलडीसी महिपाल की विधवा को पांच लाख रुपये का मुआवजा ब्याज सहित देने का निर्णय सुनाया है। बिजली विभाग नियमों का हवाला देकर विधवा कृष्णा देवी को मुआवजा देने में आनाकानी कर रहा था। इस पर पीड़िता ने जून 2016 में हाईकोर्ट में याचिका डालकर मुआवजे की मांग की थी। हाईकोर्ट ने मुआवजा देने का ऐलान किया है। बता दें कि साल 2002 में कृष्णा देवी के पति महिला की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी।
जानकारी के अनुसार आजाद नगर निवासी विधवा महिला कृष्णा देवी के पति माहिपाल बिजली बोर्ड में एलडीसी के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2002 में ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी मृत्यु हो गई थी। उस समय सरकार द्वारा पालिसी थी कि परिवार के एक सदस्य को या तो नौकरी मिलेगी या ढाई लाख रुपये की राशि मिलेगी। जिसके बाद सरकार ने 2005 में पॉलिसी को बदलते हुए राशि को बढ़ाकर पांच लाख कर दिया लेकिन परिवार के सदस्य को नौकरी को बंद कर दिया। वर्ष 2006 में विभाग की ओर से पत्र आया कि राशि लेने के लिए आप तीन माह के समय के भीतर आवेदन करना होता है आप आवेदन नहीं कर पाए। जिसके बाद पीड़ित परिवार की ओर से मामले को लेकर अधिवक्ता अफताब सिंह खारा के माध्यम से जून 2016 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिसमें हरियाणा सरकार के चीफ सैकटरी, उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम के निदेशक, उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम के चीफ इंजीनियर, सुपरिंडेंटिंग इंजीनियर ऑपरेशन उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम कुरूक्षेत्र, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ऑपरेशन कैथल को पार्टी बनाया गया।
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ड्यूटी पर बिजलीकर्मी की हुई मौत, हाईकोर्ट ने विधवा को मुआवजा देने का दिया निर्देश
साल 2002 में हुई थी बिजलीकर्मी महिपाल की मौत, काफी समय तक नौकरी का इंतजार करते रहे परिजन
पिछले साल हाईकोर्ट में डाली था मुआवजे की याचिका, अब जाकर कोर्ट ने सुनाया फैसला