ऐलनाबाद उपचुनाव: किसान आंदोलन का फैक्टर नहीं आया काम, विरोध के बावजूद बढ़ा भाजपा का वोट बैंक
ऐलनाबाद उपचुनाव में कांग्रेस सहित 17 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। नोटा जितने भी वोट हासिल नहीं कर पाए 11 प्रत्याशी। वहीं, विरोध के बाद भी भाजपा का वोट बैंक इस चुनाव में ज्यादा बढ़ा। हालांकि अभय सिंह चौटाला चुनाव जीतकर अपनी और इनेलो की छवि बचाने में कामयाब हो गए। किसान आंदोलन का ज्यादा असर नहीं दिखा।
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विस्तार
कृषि कानून के विरोध में इस्तीफा देने के बाद खाली हुई ऐलनाबाद सीट पर उपचुनाव हो चुका है। मंगलवार को परिणाम भी आ गया। इस्तीफा देकर किसानों का समर्थन हासिल करने वाले इनेलो प्रत्याशी अभय सिंह चौटाला ने 65,992 वोट लेकर भाजपा-जजपा के साझे प्रत्याशी गोबिंद कांडा को 6739 वोटों से हरा दिया। गोबिंद कांडा ने 59,253 वोट हासिल किए। कांग्रेस प्रत्याशी पवन बेनीवाल केवल 20,904 वोट ही हासिल कर पाए। वे अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। उपचुनाव में इस बार मुख्य मुद्दा किसान आंदोलन ही रहा। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान किसानों ने भाजपा-जजपा का जगह-जगह विरोध किया और कई जगह गांवों में घुसने तक नहीं दिया।
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कांग्रेस का वोट बैंक और घटा
ऐसे में लग रहा था कि भाजपा-जजपा प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएगा। लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत। भाजपा प्रत्याशी को 59,253 वोट मिले। भाजपा का पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार वोट फीसदी बढ़ा ही है। पिछली बार भाजपा प्रत्याशी पवन बेनीवाल को 45,133 वोट मिले थे, जबकि इस बार 14,120 वोटों की बढ़त के साथ भाजपा ने अपना दमखम दिखाया है। इनेलो प्रत्याशी अभय सिंह चौटाला को पिछली बार 57,055 वोट मिले थे, जबकि इस बार भी उनका वोट बैंक करीब 8937 अतिरिक्त मतों के साथ पहले से सुधरा ही है। इसके अलावा कांग्रेस प्रत्याशी को पिछले चुनावों में 35,383 वोट ही मिले थे। जबकि इस बार कांग्रेस का वोट बैंक कम हो गया। कांग्रेस के 14,479 वोट घटे और इस बार केवल 20,904 वोट ही मिले।
कांग्रेस सहित 17 प्रत्याशी नहीं बचा पाए अपनी जमानत
इस बार ऐलनाबाद उपचुनाव में 19 प्रत्याशी मैदान में थे। ईवीएम में एक बटन नोटा का भी रहा। इनेलो जीती और भाजपा दूसरे स्थान पर रही। नोटा को छोड़ दें तो कांग्रेस सहित 17 प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। इसी में जमानत खोने वालों में 11 प्रत्याशी तो ऐसे हैं, जो नोटा को मिले वोटों से भी कम रहे। जमानत नहीं बचा पाने वाले प्रत्याशियों में पांच तो ऐसे हैं, जो विभिन्न पार्टियों से संबंधित थे। एक किसान नेता भी मैदान में था। जिसे 500 से कम वोट मिले हैं।
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जानिये वोट बैंक बढ़ने और घटने का कारण
इनेलो: प्रत्याशी अभय सिंह चौटाला को पिछली बार 57,055 वोट मिले थे। इस बार वोट बैंक बढ़ा और 65,992 वोट इनेलो के खाते में गए।
कारण : इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जाकर विधानसभा से इस्तीफा दिया। इसकी सहानुभूति मिली।
भाजपा: 2019 में प्रत्याशी रहे पवन बेनीवाल को 45,133 वोट मिले थे। इस बार भाजपा-जजपा के साझे प्रत्याशी गोबिंद कांडा ने 59,253 वोट हासिल किए हैं। भाजपा का वोट बैंक बढ़ा है।
कारण: उपचुनाव के दौरान सीएम से लेकर डिप्टी सीएम और विधायक मंत्रियों तक ने क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने वायदा किया कि सत्ता में भागेदारी दे दो, तो विकास के रास्ते खोल देंगे। इस कारण वोटर भाजपा की ओर से आकर्षित हुआ। इसके अलावा कांग्रेस का वोटर टूटकर भी भाजपा की ओर आया।
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कांग्रेस: वर्ष 2019 में हुए चुनाव में तत्कालीन प्रत्याशी भरत सिंह बेनीवाल को 35,383 वोट मिले थे। इस बार कांग्रेस के प्रत्याशी रहे पवन बेनीवाल को केवल 20,904 वोट ही मिले हैं।
कारण: पार्टी के मजबूत दावेदार भरत सिंह बेनीवाल की टिकट काटकर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पवन बेनीवाल को दे दी गई। इससे भरत सिंह बेनीवाल नाराज हो गए। इस नाराजगी का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा।