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बीके को कैसे मिलेगी एनएबीएच मान्यता
Faridabad
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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फरीदाबाद। नेशनल एक्रि डेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल(एनएबीएच) से सर्टिफिकेट (मान्यता) लेने के लिए बीके अस्पताल की तैयारियां अधूरी हैं। न तो पूरा स्टाफ है और न ही बिल्डिंग ठीक बनी है, जिससे मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
इसी मुद्दे पर पंचकूला से आए स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ बीके प्रबंधन की बृहस्पतिवार को एक बैठक हुई। इस मौके पर डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. एमएम शर्मा, पीएमओ डॉ. ओपी मेहता सहित कई चिकित्सक मौजूद थे। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. एमएम शर्मा का कहना है कि स्टाफ की कमी के चलते कई सुविधाएं मरीजों को नही मिल पातीं। इसे मुख्यालय से आए अधिकारियों के सामने स्पष्ट रूप से रखा गया है।
बादशाह खान अस्पताल में करोड़ाें रुपये खर्च तो किए गए हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं व स्टाफ की काफी कमी है। गौरतलब है कि बीके अस्पताल में जिले के मरीजों के साथ-साथ पलवल के मरीजों का भी बोझ रहता है। ऐसे में स्टाफ की कमी के कारण कई बार मरीजों को अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है। जिसके चलते मरीज को सही उपचार सही समय पर नहीं मिल पाता।
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बीके की बिल्डिंग की बात की जाए तो इसमें कई कमियां हैं। ओपीडी में क्रॉस वेंटिलेशन न होने के कारण मरीजों सहित अस्पताल कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। फ्लोर पर वार्ड अधिक होने चाहिए। परिसर में कुछ जगह का उपयोग नहीं किया जा रहा है आदि।
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कितना चाहिए स्टाफ
वर्तमान में जहां 32 स्टाफ नर्सों को होना चाहिए वहां केवल 16 नर्सें हैं। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी केवल 26 हैं जबकि इनकी संख्या 55 होनी चाहिए। यही नहीं विशेषज्ञों की भी कमी है। रेडियोलाजिस्ट, माइक्रोबॉयोलाजिस्ट व पैथालॉजिस्ट नहीं हैं। जिसके कारण जांच करवाने के लिए मरीजों को बाहरी लैब में मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।
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इसी मुद्दे पर पंचकूला से आए स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ बीके प्रबंधन की बृहस्पतिवार को एक बैठक हुई। इस मौके पर डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. एमएम शर्मा, पीएमओ डॉ. ओपी मेहता सहित कई चिकित्सक मौजूद थे। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. एमएम शर्मा का कहना है कि स्टाफ की कमी के चलते कई सुविधाएं मरीजों को नही मिल पातीं। इसे मुख्यालय से आए अधिकारियों के सामने स्पष्ट रूप से रखा गया है।
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बादशाह खान अस्पताल में करोड़ाें रुपये खर्च तो किए गए हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं व स्टाफ की काफी कमी है। गौरतलब है कि बीके अस्पताल में जिले के मरीजों के साथ-साथ पलवल के मरीजों का भी बोझ रहता है। ऐसे में स्टाफ की कमी के कारण कई बार मरीजों को अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है। जिसके चलते मरीज को सही उपचार सही समय पर नहीं मिल पाता।
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बीके की बिल्डिंग की बात की जाए तो इसमें कई कमियां हैं। ओपीडी में क्रॉस वेंटिलेशन न होने के कारण मरीजों सहित अस्पताल कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। फ्लोर पर वार्ड अधिक होने चाहिए। परिसर में कुछ जगह का उपयोग नहीं किया जा रहा है आदि।
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कितना चाहिए स्टाफ
वर्तमान में जहां 32 स्टाफ नर्सों को होना चाहिए वहां केवल 16 नर्सें हैं। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी केवल 26 हैं जबकि इनकी संख्या 55 होनी चाहिए। यही नहीं विशेषज्ञों की भी कमी है। रेडियोलाजिस्ट, माइक्रोबॉयोलाजिस्ट व पैथालॉजिस्ट नहीं हैं। जिसके कारण जांच करवाने के लिए मरीजों को बाहरी लैब में मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।