RSS: समलैंगिकों के विवाह के मुद्दे पर आया दत्तात्रेय होसबाले का पक्ष, राहुल गांधी को दी ये सलाह
संघ राष्ट्र को विश्वगुरु बनाने के लिए फाइव एस (5-एस) पर काम करेगा। इसके तहत स्वाभिमानी, समृद्धशाली, सुशील संपन्न, संगठित एवं समरस भारत के साथ समग्र विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि मंडल स्तर पर आरएसएस की शाखाओं का विस्तार प्रमुख है। 2025 शताब्दी समारोह 2024 में विजयादशमी से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि भारत की वह पहचान जो राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले सभी लोगों के लिए गर्व की बात रही है, आज के समय में दुनिया के सामने प्रस्तुत की जानी है। अगले 25 वर्षों में भारत को न केवल आर्थिक और ढांचागत रूप से बल्कि खेल और संस्कृति जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी विकास करना है।
यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार को पानीपत कही। वे यहां गांव पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
होसबाले ने कहा कि सेम जेंडर मैरिज पर संघ सरकार के नजरिए से सहमत है। शादी केवल अपोजिट जेंडर वालों में संभव है। वहीं होसबाले ने रिलेशनशिप के सवाल पर कहा कि हिंदू दर्शन में विवाह संस्कार है। इसको कांट्रेक्ट नहीं कर सकते। यह शारीरिक इच्छापूर्ति के लिए नहीं होती। शादी से गृहस्थ जीवन के आदर्श मिलते हैं।
संघ ने कहा कि राहुल को परिपक्व होने की जरूरत है। होसबाले ने कहा कि कांग्रेस हमेशा पॉलिटिकल एजेंडे पर काम करती है। वे संघ के बारे में इतना नहीं जानते। राहुल के विदेश में जाकर देश के लोकतंत्र को खतरे में बताने के सवाल पर कहा कि एमरजेंसी में हिंदुस्तान को जेल में बदल दिया था। उन्होंने इस पर आज तक देश से माफी नहीं मांगी। वे लोग आज लोकतंत्र खतरे में बता रहे हैं। यह भी गंभीर बात है। लोकतंत्र खतरे में है तो चुनाव होते हैं। सरकार ने 6 हजार पंचायतों से फीडबैक लेकर नई शिक्षा नीति बनाई है।
कांग्रेस पहले देश से माफी मांगे, राहुल को परिपक्व होने की जरूरत : संघ
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने कांग्रेस और राहुल पर सीधा निशाना साधा। संघ ने कहा कि कांग्रेस ने इमरजेंसी के वक्त पूरे हिंदुस्तान को जेल में बदल दिया था। इसकी आज तक देश से माफी तक नहीं मांगी। उनको पहले देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के देश का लोकतंत्र खतरे में होने की बात पर कहा कि कांग्रेस के एजेंडे पॉलिटिकल होते हैं। संघ समाज और राष्ट्र हित की बात करता है।
उन्होंने राहुल गांधी के देश को लोकतंत्र खतरे में होने के सवाल पर पहले तो जवाब देने से टाल दिया। फिर कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के सांसद भी हैं। उनको इस तरह का कुछ बोलने से पहले सोच लेना चाहिए। देश की सच्चाई को वे भी जानते हैं। उनको अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और परिपक्व होकर काम करना चाहिए। राहुल से पहले भी कांग्रेस व उनके परिवार के लोग आरएसएस पर विवादित टिप्पणी दे चुके हैं, लेकिन आज देश की तस्वीर सबके सामने है।
20 प्रांतों में किया गया कार्य विस्तार
संघ ने नूतन वर्ष में 20 प्रांतों में कार्य विस्तार किया। इनमें कर्नाटक दक्षिण, कर्नाटक उत्तर, तेलंगाना, पश्चिम महाराष्ट्र, गुजरात, गुजरात-1, मालवा, छत्तीसगढ़, चित्तौड़, जोधपुर, दिल्ली, पंजाब, जम्मू कश्मीर, मेरठ, कानपुर, काशी, झारखंड, ओडिशा पश्चिम, दक्षिण असम में अल्पकालीन विस्तारक पहुंचे। सबसे बड़ी बात जम्मू कश्मीर में 11 सितंबर 2022 को रियासी नगर में शाखा संगम कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम में 42 स्थानों से 64 शाखा लगाई गईं। जिले के 39 में से 33 मंडलों व 14 में से 13 बस्तियों का सहभाग रहा।
यह भी पढ़ें : RSS: 'गांवों तक संघ मजबूत, कश्मीर में युवाओं की शाखाओं में भागीदारी आतंक के खात्मे का दे रही संदेश'
प्रतिनिधि सभा में ‘स्व’ आधारित राष्ट्र के नवोत्थान का संकल्प प्रस्ताव पारित
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में स्व आधारित राष्ट्र के नवोत्थान का संकल्प लेने का प्रस्ताव सोमवार को पारित किया गया। इस प्रस्ताव को रविवार को बैठक के पहले दिन चर्चा में रखा गया था। इसके अलावा भगवान महावीर के परिनिर्वाण, स्वामी दयानंद सरस्वती के जन्मशताब्दी वर्ष और शिवाजी महाराज के राजभिषेक के 300 वर्ष पर होने वाले कार्यक्रमों के प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है।
संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि विश्व कल्याण के लिए भारत के ‘स्व’ की सुदीर्घ यात्रा हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रही है। विदेशी आक्रमणों और संघर्ष के काल में भारतीय जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ। सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व धार्मिक व्यवस्थाओं को गहरी चोट पहुंची। इस कालखंड में संतों व महापुरुषों के नेतृत्व में संपूर्ण समाज ने सतत् संघर्षरत रहते हुए अपने ‘स्व’ को बचाए रखा। इस संग्राम की प्रेरणा स्वधर्म, स्वदेशी और स्वराज की ‘स्व’ त्रयी में निहित थी, जिसमें समस्त समाज की सहभागिता रही।
राष्ट्र को विश्वगुरु बनाने के लिए फाइव एस पर चलेगा संघ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश के कई हिस्सों में मतांतरण के संकेत पहले ही दिए थे। उच्चतम न्यायालय ने भी इस पर चिंता व्यक्त की थी। अब संघ इन सबको पार पाते हुए राष्ट्र को विश्वगुरु बनाने के लिए फाइव एस (5-एस) पर काम करेगा। इसके तहत स्वाभिमानी, समृद्धशाली, सुशील संपन्न, संगठित एवं समरस भारत के साथ समग्र विकास की राह पर आगे बढ़ेगा। संघ का मानना है कि कुछ स्वार्थी, राष्ट्रघातक तत्वों की कुटिलता के कारण कई सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।ये लोग देश की एकता व उन्नति के विरुद्ध नई साजिश बनाते हैं। समाज में भ्रम फैलाना उनका पेशा बन गया है। इन सबके बीच खुशी इस बात की है कि समाज में एकजुटता बढ़ रही है। साथ ही विभिन्न आयामों में उत्साही सहभागिता परिवर्तन की लहर का संकेत है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की समालखा के पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र में चल रही तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन सोमवार को प्रस्तावों पर चर्चा करने के साथ राष्ट्र को मजबूत बनाने पर चिंतन किया गया। सुबह नौ बजे शुरू हुई बैठक रात सवा दस बजे तक चार सत्र में चली।
यह भी पढ़ें : Haryana: राष्ट्र को विश्वगुरु बनाने के लिए फाइव एस पर चलेगा संघ, जानिए क्या है इसकी परिकल्पना
इसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपना संदेश दिया। वहीं सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले का वार्षिक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) 2022-23 समाज ही नहीं देश को चौंका देने वाला रहा। उन्होंने इसमें देश के वर्तमान परिदृश्य में खुशी के साथ चिंता होने की बात रखी। साथ ही संगठनात्मक उपलब्धियों को सुदृढ़ करते हुए समस्या व चुनौतियों का क्षमता से सामना करते हुए समाज में सर्वत्र आत्मविश्वास का दीप जलाकर सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समर्पण भाव से राष्ट्र साधना बढ़ाएंगे तो परिणाम सार्थक आएंगे।
मजहबी उन्माद का हो रहा विरोध
वार्षिक प्रतिवेदन में कहा गया कि मजहबी उन्माद और हिंदू युवतियों को बहला फुसलाकर शादी करने और फिर उनकी हत्या तक कर दी जाती हैं। कई प्रांतों में जमीन पर कब्जा तक किया जा रहा है। उदयपुर, अमरावती व शिवमोगा में इस तरह के कृत्य हुए हैं। जयपुर, मुंबई व महाराष्ट्र सहित अन्य स्थानों पर हिंदू समाज ने बड़ी संख्या में प्रदर्शन किया है। इससे समाज में जागृति आई है। इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया व कनाडा में कुछ शक्तियों ने हिंदू परिवार व मंदिर पर हिंसक हमले किए तो हिंदू संगठनों ने भी प्रतिरोध किया।
यह भी पढ़ें: Haryana: ज्वाइन RSS के जरिए हो रहा संघ का विस्तार, प्रदेश के 41,504 नए लोगों ने संघ से किया संपर्क
संघ का कहना है कि भारत की आजादी का अमृत महोत्सव देश और विदेश में भी भारतीयों ने खुशी के साथ मनाया। नए आत्मविश्वासयुक्त, आत्मसम्मान से भरा और आत्मनिर्भर भारत की यात्रा का दौर शुरू हो गया है। राजपथ को बदलकर कर्तव्य पथ किया गया है। साथ ही विक्टोरिया रानी की मूर्ति के स्थान पर नोजी सुभाष बाबू की मूर्ति की स्थापना इस बदलाव का प्रतीक भी है।