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नौकरी की तलाश में भटक रहा एवरेस्ट विजेता
रेवाड़ी/गोपाल वशिष्ठ
Updated Wed, 11 Sep 2013 11:42 PM IST
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एनसीसी इतिहास में पहले एवरेस्ट फतेह अभियान में नाम दर्ज करवाने वाला पश्चिम बंगाल का 19 वर्षीय पूर्व कैडेट संदीप राय काम की तलाश में भटक रहा है।
पिता के देहांत के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं होने के कारण वह पढ़ाई छोड़कर रेवाड़ी में अपनी बुआ के यहां रहकर नौकरी की तलाश कर रहा है। एवरेस्ट फतेह के बाद युवाओं को सिर-आंखों पर बैठाने वाले राज्य और केंद्र सरकार ने एक प्रतिभा को यूं ही ठोकरें खाने को छोड़ दिया है। इस समय युवा को एक अदद नौकरी या आर्थिक मदद की सख्त जरूरत है।
चार माह पहले पाई थी उपलब्धि
एनसीसी के आठ कैडेट का चयन एवरेस्ट एक्सपेडिशन-2013 के लिए हुआ था। इनमें चार हिमाचल प्रदेश, दो मणिपुर, एक उत्तराखंड और एक पश्चिम बंगाल से संदीप राय शामिल था। इन्होंने 19 व 20 मई को यह उपलब्धि हासिल की। इसके बाद उसे नेपाल सरकार के संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मिस्टर एवरेस्ट का प्रमाण पत्र जारी किया, लेकिन नौकरी नहीं मिली।
कहीं धूल में खो न जाए ये सितारा
2011 में दार्जिलिंग में पिता की मौत के बाद टूट चुके संदीप को एनसीसी विभाग की ओर से कुछ सहारा मिला। बतौर एनसीसी कैडेट पूर्वोत्तर के एनसीसी निदेशालय ने उसके एवरेस्ट एक्सपेडिशन-2013 का खर्च वहन किया। माता-पिता की एकमात्र संतान संदीप ने इस अभियान के दौरान पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। उपलब्धि के बावजूद सरकार की तरफ से कोई मदद न मिल पाने के कारण वह अपने फूफा शशी और बुआ सविता के पास रेवाड़ी आ गया। यहां भी उसने प्राइवेट बीए करने का प्रयास किया, किंतु किसी पर बोझ बनने की बजाय अपना सहारा खुद ढूंढने की ललक में वह इन दिनों काम की तलाश में है।
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यंग मैंस एसोसिएशन ने की नौकरी की मांग
मात्र 19 वर्ष की आयु में ऊंची एवरेस्ट की चोटी को फतेह करने वाले एनसीसी कैडेट संदीप राय को यंग मैंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया रेवाड़ी की ओर से सम्मानित किया गया। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित स्वामी ने प्रदेश सरकार और अन्य संगठनों से इस युवा को आर्थिक मदद करने की भी अपील की है। धारूहेड़ा चुंगी पर आयोजित कार्यक्रम में स्वामी ने संदीप राय को शाल ओढ़ाकर और 11 हजार रुपये देकर सम्मानित किया। उन्होंने सरकार से रेवाड़ी की एवरेस्ट विजेता सुनीता चौकन को भी सरकारी नौकरी देने की अपील की है। कार्यक्रम में फौजी गंगाहेड़ी, महंत चुन्नीलाल, महेंद्र कुमार चावरिया, रामकृष्ण, भारत तमोली, देशराज, विजय कुमार, धर्मपाल, रामकुमार आदि उपस्थित थे।
एवरेस्ट फतेह करने पर बनी थीं रेवाड़ी की डीएसपी
सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा एवरेस्ट फतेह करने वालों के लिए नौकरी देने की घोषणा कर चुके हैं। इससे पहले उन्होंने कैथल की एवरेस्ट विजेता ममता सौदा को डीएसपी बनाया था, जो संयोग से इन दिनों रेवाड़ी में ही कार्यरत हैं।
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पिता के देहांत के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं होने के कारण वह पढ़ाई छोड़कर रेवाड़ी में अपनी बुआ के यहां रहकर नौकरी की तलाश कर रहा है। एवरेस्ट फतेह के बाद युवाओं को सिर-आंखों पर बैठाने वाले राज्य और केंद्र सरकार ने एक प्रतिभा को यूं ही ठोकरें खाने को छोड़ दिया है। इस समय युवा को एक अदद नौकरी या आर्थिक मदद की सख्त जरूरत है।
चार माह पहले पाई थी उपलब्धि
एनसीसी के आठ कैडेट का चयन एवरेस्ट एक्सपेडिशन-2013 के लिए हुआ था। इनमें चार हिमाचल प्रदेश, दो मणिपुर, एक उत्तराखंड और एक पश्चिम बंगाल से संदीप राय शामिल था। इन्होंने 19 व 20 मई को यह उपलब्धि हासिल की। इसके बाद उसे नेपाल सरकार के संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मिस्टर एवरेस्ट का प्रमाण पत्र जारी किया, लेकिन नौकरी नहीं मिली।
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कहीं धूल में खो न जाए ये सितारा
2011 में दार्जिलिंग में पिता की मौत के बाद टूट चुके संदीप को एनसीसी विभाग की ओर से कुछ सहारा मिला। बतौर एनसीसी कैडेट पूर्वोत्तर के एनसीसी निदेशालय ने उसके एवरेस्ट एक्सपेडिशन-2013 का खर्च वहन किया। माता-पिता की एकमात्र संतान संदीप ने इस अभियान के दौरान पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। उपलब्धि के बावजूद सरकार की तरफ से कोई मदद न मिल पाने के कारण वह अपने फूफा शशी और बुआ सविता के पास रेवाड़ी आ गया। यहां भी उसने प्राइवेट बीए करने का प्रयास किया, किंतु किसी पर बोझ बनने की बजाय अपना सहारा खुद ढूंढने की ललक में वह इन दिनों काम की तलाश में है।
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यंग मैंस एसोसिएशन ने की नौकरी की मांग
मात्र 19 वर्ष की आयु में ऊंची एवरेस्ट की चोटी को फतेह करने वाले एनसीसी कैडेट संदीप राय को यंग मैंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया रेवाड़ी की ओर से सम्मानित किया गया। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित स्वामी ने प्रदेश सरकार और अन्य संगठनों से इस युवा को आर्थिक मदद करने की भी अपील की है। धारूहेड़ा चुंगी पर आयोजित कार्यक्रम में स्वामी ने संदीप राय को शाल ओढ़ाकर और 11 हजार रुपये देकर सम्मानित किया। उन्होंने सरकार से रेवाड़ी की एवरेस्ट विजेता सुनीता चौकन को भी सरकारी नौकरी देने की अपील की है। कार्यक्रम में फौजी गंगाहेड़ी, महंत चुन्नीलाल, महेंद्र कुमार चावरिया, रामकृष्ण, भारत तमोली, देशराज, विजय कुमार, धर्मपाल, रामकुमार आदि उपस्थित थे।
एवरेस्ट फतेह करने पर बनी थीं रेवाड़ी की डीएसपी
सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा एवरेस्ट फतेह करने वालों के लिए नौकरी देने की घोषणा कर चुके हैं। इससे पहले उन्होंने कैथल की एवरेस्ट विजेता ममता सौदा को डीएसपी बनाया था, जो संयोग से इन दिनों रेवाड़ी में ही कार्यरत हैं।