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सामूहिक दुष्कर्म कांड: तीनों दोषियों को 20 साल की सजा, कोचिंग क्लास से आ रही छात्रा से आठ घंटे की थी दरिंदगी

Fri, 29 Oct 2021 05:05 PM IST
प्रमोद कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल Published by: प्रमोद कुमार Updated Fri, 29 Oct 2021 05:05 PM IST
सार

सामूहिक दुष्कर्म कांड में तीनों दोषियों को न्यायालय ने सजा सुना दी है। 20 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है। हर दोषी पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर हर दोषी को एक साल ज्यादा सजा भुगतनी पड़ेगी। कोचिंग क्लास से आ रही छात्रा से 8 घंटे दरिंदगी की गई थी।

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The three convicts in the Rewari misdeed case were sentenced to 20 years of rigorous imprisonment
दोषियों को कोर्ट में पेश करने लेकर आई पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कनीना सामूहिक दुष्कर्म कांड में तीनों मुख्य दोषियों को अदालत ने 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। तीनों पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा पीड़िता को क्षतिपूर्ति के लिए पांच लाख रुपये दिए जाने का फैसला सुनाया। मामले में पांच आरोपियों को बरी कर दिया गया है। 

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यह फैसला शुक्रवार को एडिशनल सेशन जज, स्पेशल महिला कोर्ट की न्यायाधीश मोना सिंह ने सुनाया है। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों दोषियों को जेल भेज दिया गया। वहीं मुलजिम पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता योगेश्वर वशिष्ठ ने कहा कि हाईकोर्ट में अपील करेंगे। पीड़िता की मां ने कहा कि तीन वर्ष बाद उसके कलेजे को सुकून मिला है। कोर्ट ने दरिंदों को उनकी सही जगह पर भेजा है।
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बता दें कि एडशिनल सेशन जज मोना सिंह ने गुरुवार को गैंगरेप के मुख्य आरोपी पंकज, मनीष और निशु को दोषी करार दिया था। शुक्रवार को सजा की बहस के लिए उनको 11 बजे कोर्ट में पेश किया गया। इस मौके पर दोनों अधिवक्ताओं की बहस हुई। पीड़िता पक्ष की ओर से अधिवक्ता कर्ण सिंह ने दोषियों का उम्रकैद की सजा सुनाए जाने की दलील दी लेकिन मुलजिम के अधिवक्ता योगेश्वर वशिष्ठ ने इस पर ऐतराज जताया। कुछ समय के लिए न्यायाधीश ने सजा का फैसला रोक लिया। लगभग दो बजे फिर से आरोपियों को कोर्ट में पेश किया और दोनों की अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने तीनों दोषियों को सजा सुनाई।
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अदालत में दरिंदों ने जज के सामने मांगी दया की भीख
सजा सुनाने से पहले तीनों ही दरिंदे कम से कम सजा सुनाने के लिए गिड़गिड़ाए। दोषी पंकज ने कहा कि मैंने ढाई वर्ष सेना में काम कर देश सेवा की है। मुझे ढाई वर्ष की छोटी बच्ची भी है। घर में कमाने वाला मैं ही हूं। इसलिए मुझ पर रहम बरता जाए। वहीं निशु ने कहा कि मैं श्रमिक का कार्य करता था। अब घर में कमाने वाला कोई नहीं है। पिता दिव्यांग हैं, उनका सड़क दुर्घटना में पैर कट गया था। घर पर एक अविवाहित बहन हैं और स्वयं भी अविवाहित है। मनीष ने बताया कि मैं श्रमिक का कार्य करता था। उसी से घर की आजीविका चलती है। घर में मेरे बूढ़े मां-बाप हैं तथा एक अविवाहित बहन भी है। उनकी तरफ देखकर मुझ पर दया की जाए।

यह था मामला
बता दें कि 12 सितंबर 2018 को पीड़िता अपने पिता के साथ स्कूल बस में सवार होकर कोचिंग के लिए आई थी। जो बस स्टैंड से बस से उतरकर कोचिंग सेंटर जा रही थी। उस दौरान उन्हीं के गांव के पंकज तथा मनीष रास्ते में मिले। उन्होंने पीड़िता को पानी में नशीला पदार्थ पिलाकर बेहोश कर दिया और बाद में उसे एक गाड़ी में बैठाकर एक कुंआ पर लेकर गए। जहां पर पंकज, मनीष और निशू ने पीड़िता के साथ गैंगरेप किया। गैंगरेप के बाद पीड़िता की हालत खराब हो जाने का पर इन लोगों ने गांव के ही एक चिकित्सक को घटनास्थल पर बुलाया। चिकित्सक पीड़िता को प्राथमिक उपचार देकर मौके से चला गया था।

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मैंने आज दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने की दलील दी थी। कोर्ट ने तीनों दोषियों को 20-20 वर्ष की सजा तथा 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आज पीड़िता को इंसाफ मिला है।
- कर्ण सिंह, अधिवक्ता।

 

मैं कानून की आदेशों का सम्मान करती हूं। आज मेरी बेटी को तीन वर्ष बाद इंसाफ मिला है। कोर्ट ने दरिंदों को उनकी सही जगह पहुंचाया है। ऐसे दरिंदों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। अधिवक्ता करण सिंह की सबसे अधिक शुक्रगुजार हूं। उन्होंने मेरे केस लड़ने का एक रुपया भी नहीं लिया। उन्होंने अपने खर्च पर पूरा केस लड़ा है। समाज में ऐसे अधिवक्ता की जरूरत है जो सच्चाई के लिए लड़ें। - पीड़िता की मां।

 

यह रेप नहीं था बल्कि पीड़िता की सहमति के साथ संबंध बनाए गए थे। कोर्ट ने यह भी माना है कि न तो नशीली दवाई पिलाई गई और न की किडनैप हुआ। आगे हम इसके लिए हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
- योगेश्वर वशिष्ठ, अधिवक्ता, (कनटेस्टिड), मुलजिम पक्ष

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