हरियाणा में ED के निशाने पर कांग्रेस: हुड्डा के करीबी MLAs पर कसता शिकंजा, चुनाव से पहले कार्रवाई से उठे सवाल
हरियाणा में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी ईडी के निशाने पर हैं। उनके खिलाफ मानेसर में अवैध जमीन अधिग्रहण, पंचकूला में औद्योगिक प्लाट आवंटन घोटाला, एजेएल को प्लाट देने और एम3एम से जुड़े मामले शामिल हैं। जिसके कारण हुड्डा की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले ईडी के निशाने पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी विधायक हैं। पहले समालखा विधायक धर्म सिंह छोकर, फिर महेंद्रगढ़ के विधायक राव दान सिंह और अब सोनीपत के विधायक सुरेंद्र पंवार पर शिकंजा कसा गया है। तीनों ही विधायक हुड्डा के विश्वासपात्रों में शामिल हैं। उधर, एक दिन पहले ईडी ने पूर्व सीएम से जुड़े एक मामले में करीब 300 करोड़ रुपये से जुड़ी जमीन कुर्क की। लगातार कार्रवाई से न सिर्फ कांग्रेस विधायकों का झटका लगा है, बल्कि हुड्डा की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके खिलाफ भी ईडी कई मामलों में जांच कर रही है।
कांग्रेस के तीनों विधायक काफी समय से ईडी की रडार पर थे। छोकर के खिलाफ ईडी ने पिछले साल जुलाई में मनी लॉन्ड्रिंग की एफआईआर दर्ज की थी। दरअसल उनके बेटे सिकंदर सिंह छोकर गुरुग्राम में रियल एस्टेट का कारोबार चलाते हैं। वह रियल एस्टेट कंपनी माहिरा समूह के प्रबंध निदेशक हैं। इस कंपनी की सात परियोजनाओं पर अनियमिताताओं के आरोप लगे थे।
आरोप है कि कंपनी ने घर का सपना दिखाकर लोगों से पैसे ले लिए, मगर फ्लैट का पजेशन नहीं दिया। कोई भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो चुका। इस मामले में छोकर का बेटा तो न्यायिक हिरासत में हैं। छोकर को हाईकोर्ट से राहत मिली हुई है। छोकर समालखा से दो बार से विधायक हैं। छोकर ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 2009 में हरियाणा जनहित कांग्रेस के टिकट पर जीता था। उसके बाद वह चुनाव हार गए और 2019 हुड्डा की नजदीकियों की वजह से उन्हें फिर से टिकट मिला और दोबारा निर्वाचित हुए।
वहीं, राव दान सिंह हुड्डा के विश्वास पात्र माने जाते हैं। बीते लोकसभा चुनाव में हुड्डा की वजह से हाईकमान ने बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी की जगह उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट दिलवाया। वह भी 1,392 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंस गए हैं। ईडी ने वीरवार को कांग्रेस विधायक राव दान सिंह और उनके परिवार के साथ-साथ एक मेटल फैब्रिकेटिंग कंपनी और उसके प्रमोटरों के परिसरों पर दबिश दी।
इस मामले में उनके बेटे अक्षत का नाम भी आया था। लोकसभा चुनाव में किरण चौधरी व श्रुति चौधरी ने अक्षत के मामले को लोकसभा चुनाव में उछाला था। तीसरे विधायक सुरेंद्र पंवार की गिनती भी हुड्डा के करीबियों में होती है। पंवार ने 2019 में सोनीपत से भाजपा की पूर्व विधायक कविता जैन को हराया था। इसके पहले सुरेंद्र पंवार इनेलो में थे। ईडी ने उनके ठिकानों पर जनवरी में कार्रवाई की थी।
हुड्डा भी ईडी के निशाने पर
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी ईडी के निशाने पर हैं। उनके खिलाफ मानेसर में अवैध जमीन अधिग्रहण, पंचकूला में औद्योगिक प्लाट आवंटन घोटाला, एजेएल को प्लाट देने और एम3एम से जुड़े मामले शामिल हैं। पंचकूला में औद्योगिक प्लाट आवंटन घोटाले में ईडी चार्जशीट दायर कर चुकी है, लेकिन सीबीआई ने नहीं की है। मानसेर मामले में सीबीआई की चार्जशीट में हुड्डा का नाम है, मगर ईडी की चार्जशीट अभी नहीं हुई है। एजेएल मामले में भी ईडी चार्जशीट दायर कर चुकी है। वहीं, एम3एम में ईडी ने चार्जशीट अब तक दायर नहीं की है, मगर सीबीआई की एफआईआर में हुड्डा का नाम शामिल है।
ईडी की कार्रवाई की टाइमिंग पर उठे सवाल
चुनाव विश्लेषक प्रमोद शर्मा ने बताया, ईडी ने जो कार्रवाई की है, वह कहीं न कहीं जांच पर आधारित है। लेकिन चुनाव के समय इस तरह की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित दिखती है। इस समय कार्रवाई से सवाल तो उठना तय है। वहीं, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी कहा है कि भाजपा सरकार ईडी, सीबीआई का इस्तेमाल करने की बजाय जनता के सवालों का जवाब दे। केंद्रीय जांच एजेंसियां भाजपा के प्रकोष्ठ की तरह काम करती हैं।