फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   wait for ddc and atf license

Charkhi Dadri News: डीडीसी और एटीएफ सुविधा के लिए लाइसेंस का इंतजार

Sat, 05 Jul 2025 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 05 Jul 2025 12:39 AM IST
विज्ञापन
wait for ddc and atf license
चरखी दादरी नागरिक अस्पताल जहां डीडीसी और एटीएफ सुविधा शुरू होनी है। संवाद
स्वास्थ्य
विज्ञापन

फोटो 24
चरखी दादरी नागरिक अस्पताल, जहां डीडीसी और एटीएफ सुविधा शुरू होनी है। संवाद
- नागरिक अस्पताल में डीडीसी के लिए स्वास्थ्य विभाग को समाज कल्याण विभाग से और एटीएफ के लिए एम्स से मिलना है लाइसेंस, एक माह के अंदर दोनों सेवाएं शुरू होने की उम्मीद

संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। नशे की लत से ग्रस्त लोगों के उपचार के लिए लिए दादरी नागरिक अस्पताल में बनने वाले डीडीसी (डी-एडिक्शन सेंटर) और एटीएफ (एडिक्शन ट्रीटमेंट फेसिलिटी) के लिए लाइसेंस मिलने का इंतजार है। डी एडिक्शन सेंटर बनने के बाद नशे की लत से ग्रस्त मरीजों को सामान्य वार्ड में भर्ती करने की नौबत नहीं आएगी। स्थानीय अधिकारियों की मानें तो एक माह के अंदर दोनों सुविधाएं शुरू हो जाएंगी।
विज्ञापन

दादरी नागरिक अस्पताल में मनाेरोग ओपीडी नवंबर 2024 से शुरू हुई थी। शुरुआती माह में यहां की दैनिक ओपीडी 30 रही। अब रोज करीब 45 मरीज पहुंच रहे हैं। पिछले सात माह की ओपीडी में करीब 2,000 लोग नशा छोड़ने पहुंचे हैं। विशेषज्ञ के परामर्श पर दवा लेकर इनमें से 90 ने नशा छोड़ दिया है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राममेहर के मुताबिक रोजाना करीब आठ लोग शराब छोड़ने और पांच से छह लोग हेरोइन (चिट्टा), गांजा और सुल्फा छोड़ने का संकल्प लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. राममेहर ने बताया कि नशे की लत से ग्रस्त कुल मरीजों में से आधे शराब की लत के शिकार हैं। करीब 35 फीसदी मरीजों में चिट्टा लेने की लत हैं। इससे स्वयं समेत उनका पूरा परिवार परेशान है। जिन 90 मरीजों ने नशे से तौबा किया है, उनमें से 70 ने अपना पुश्तैनी धंधा या नौकरी शुरू कर ली है। ताकि, खुद को व्यस्त रखकर वे नशे से दूरी बना सकें।
- मरीज का तीन चरणों में होता है उपचार
मनारोग विशेषज्ञ डॉ. राममेहर ने बताया कि नशा छोड़ने के इच्छुक व्यक्ति के उपचार की तीन प्रक्रिया है। पहली प्रक्रिया फार्मेकोथैरेपी है। इसमें तीन प्रकार की दवाएं दी जाती हैं। दूसरी प्रक्रिया साइकोथैरेपी यानी काउंसिलिंग हैं और तीसरी प्रक्रिया पुनर्वास है। फिलहाल, दादरी में पुनर्वास की सुविधा नहीं है। एक माह तक शुरू होने की उम्मीद है।

- दो जगहों से मिलना है लाइसेंस
जिला स्वास्थ्य विभाग को डी एडिक्शन सेंटर के लिए समाज कल्याण विभाग से लाइसेंस मिलना है। इसके लिए आवेदन किया जा चुका है। वहीं, एडिक्शन ट्रीटमेंट फेसिलिटी का लाइसेंस एम्स की ओर से दिया जाना है। यहां के लिए संसाधन भी एम्स मुहैया कराएगा।


- डी-एडिक्शन सेंटर में ये होंगे प्रबंध
डी-एडिक्शन सेंटर में 16 बेड की व्यवस्था होगी। ये अस्पताल के अन्य बेडों से अलग होंगे। इसके अलावा, यहां 22 कर्मचारियों का स्टाफ तैनात किया जाएगा, जिनमें न्यूरो साइकेट्रिस्ट डॉ. राममेहर के अलावा 5 मेडिकल ऑफिसर और 11 स्टाफ नर्सें भी शामिल हैं।

वर्सन
डी-एडिक्शन सेंटर और एटीएफ के लिए अभी लाइसेंस नहीं मिला है। एक माह के अंदर लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। इसके तत्काल बाद दोनों सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।
-डॉ. राममेहर, न्यूरो साइकेट्रिस्ट
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed