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Charkhi Dadri News: फील्ड टेस्ट किट से ग्रामीण जांच सकेंगे पानी की गुणवत्ता
Thu, 15 Aug 2024 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 15 Aug 2024 12:27 AM IST
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चंपापुरी जलघर स्थित पानी भंडारण टैंक जिसका पानी घरों में सप्लाई किया जाता है।
चरखी दादरी। पेयजल की गुणवत्ता की जांच के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने फील्ड टेस्ट किट तैयार की हैं। एक गांव के लिए पांच किट जारी की गई हैं ताकि नियमित अंतराल पर पानी की गुणवत्ता जांची जा सके। इस किट में पानी डालने पर अगर पीले रंग का हो जाता है तो समझिए गुणवत्ता सही है और अगर पानी का रंग काला हो जाता है तो पानी पीने लायक नहीं है। विभाग ने इसके लिए सभी ब्लॉक में बीआरसी तैनात कर रखे हैं।
दरअसल, पेयजल की गुणवत्ता की संबंधी सबसे ज्यादा शिकायतें मिल रही हैं। शहर व गांवों में पेयजल की गुणवत्ता खराब होने की वजह से लोगों को मजबूरन आरओ या फिल्टर लगवाने पड़ रहे हैं। शहर में पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल उठते आ रहे हैं। हालांकि विभाग पानी में क्लोरिन आदि डालकर सप्लाई करता है। सप्लाई से पहले पानी को मीडिया फिल्टर से साफ भी किया जाता है। रास्ते में मेन लाइनों में लीकेज की वजह से दूषित पानी सप्लाई होने लगता है।
बता दें कि अब बारिश सीजन चल रहा है। नहरों में भी बारिश का पानी छोड़ कर रखा है जिसमें मिट्टी एवं रेत का मिश्रण बना हुआ है। इससे भी पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है। जलघर भी खुले आकार में है। बारिश से आसपास भरा पानी सीधे जलघरों के टैंकों में भी जा रहा है जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। अब फील्ड टेस्ट किट पानी की जांच में कारगर साबित हो रही है।
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इस किट में 24 घंटे के लिए पानी डालना पड़ता है। इस अवधि में यदि पानी का रंग काला पड़ जाता है तो इसकी गुणवत्ता खराब मानी जाती है। पीला रंग होने पर सही रिपोर्ट मानी जाती है। गुणवत्ता खराब होने पर विभाग के उच्च अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट सौंपी जाती है और पानी की गुणवत्ता में सुधार किया जाता है।
गांव के पानी की यहां होगी जांच
एक गांव के लिए पांच किट उपलब्ध करवाई जाती हैं। दो किट स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र के लिए और तीन गांव में घरेलू पानी की जांच के लिए दी जाती हैं। जनस्वास्थ्य विभाग ने इसे सिरे चढ़ाने के लिए बाढड़ा, दादरी, बौंदकलां व झोझूकलां ब्लॉक में चार बीआरसी तैनात कर रखे हैं। जो यह किट उपलब्ध करवाने व लोगों को पेयजल के प्रति जागरूक करने का काम करते हैं।
फील्ड टेस्ट किट कारगर साबित हो रही है। इससे पानी की गुणवत्ता का पता चल जाता है। जहां पानी की नकारात्मक रिपोर्ट मिलती है। उच्चाधिकारियों से इस समस्या का समाधान करवाया जाता है।
राजू, जिला सलाहकार, जनस्वास्थ्य विभाग
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दरअसल, पेयजल की गुणवत्ता की संबंधी सबसे ज्यादा शिकायतें मिल रही हैं। शहर व गांवों में पेयजल की गुणवत्ता खराब होने की वजह से लोगों को मजबूरन आरओ या फिल्टर लगवाने पड़ रहे हैं। शहर में पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल उठते आ रहे हैं। हालांकि विभाग पानी में क्लोरिन आदि डालकर सप्लाई करता है। सप्लाई से पहले पानी को मीडिया फिल्टर से साफ भी किया जाता है। रास्ते में मेन लाइनों में लीकेज की वजह से दूषित पानी सप्लाई होने लगता है।
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बता दें कि अब बारिश सीजन चल रहा है। नहरों में भी बारिश का पानी छोड़ कर रखा है जिसमें मिट्टी एवं रेत का मिश्रण बना हुआ है। इससे भी पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है। जलघर भी खुले आकार में है। बारिश से आसपास भरा पानी सीधे जलघरों के टैंकों में भी जा रहा है जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। अब फील्ड टेस्ट किट पानी की जांच में कारगर साबित हो रही है।
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इस किट में 24 घंटे के लिए पानी डालना पड़ता है। इस अवधि में यदि पानी का रंग काला पड़ जाता है तो इसकी गुणवत्ता खराब मानी जाती है। पीला रंग होने पर सही रिपोर्ट मानी जाती है। गुणवत्ता खराब होने पर विभाग के उच्च अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट सौंपी जाती है और पानी की गुणवत्ता में सुधार किया जाता है।
गांव के पानी की यहां होगी जांच
एक गांव के लिए पांच किट उपलब्ध करवाई जाती हैं। दो किट स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र के लिए और तीन गांव में घरेलू पानी की जांच के लिए दी जाती हैं। जनस्वास्थ्य विभाग ने इसे सिरे चढ़ाने के लिए बाढड़ा, दादरी, बौंदकलां व झोझूकलां ब्लॉक में चार बीआरसी तैनात कर रखे हैं। जो यह किट उपलब्ध करवाने व लोगों को पेयजल के प्रति जागरूक करने का काम करते हैं।
फील्ड टेस्ट किट कारगर साबित हो रही है। इससे पानी की गुणवत्ता का पता चल जाता है। जहां पानी की नकारात्मक रिपोर्ट मिलती है। उच्चाधिकारियों से इस समस्या का समाधान करवाया जाता है।
राजू, जिला सलाहकार, जनस्वास्थ्य विभाग