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पांच साल से अल्ट्रासाउंड मशीन बंद, 30 हजार मरीज किए रेफर
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बंद पड़ा सिविल अस्पताल का अल्ट्रासाउंड कक्ष।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। सिविल अस्पताल में पिछले पांच साल से अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद है। स्वास्थ्य विभाग के पास न तो नई अल्ट्रासाउंड मशीन है और न ही अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट। पुरानी मशीन विशेषज्ञ की कमी के चलते बंद कमरे में धूल फांक रही है। पिछले पांच सालों में करीब 30 हजार मरीजों को दूसरे जिलों के अस्पतालों या निजी केंद्रों पर जाना पड़ा है।
संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने के चलते विभाग ने केवल गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड की ही वैकल्पिक व्यवस्था की हुई है। सिविल अस्पताल से पुरुष मरीजों को रोहतक पीजीआई या भिवानी सिविल अस्पताल रेफर किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए विभाग ने शहर के निजी केंद्रों से समझौता किया हुआ है। निजी केंद्रों पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पहले गर्भवती महिला को जिला अस्पताल से पर्ची बनवाकर लानी पड़ती है और अगले दिन अस्पताल में जाकर रिपोर्ट लेनी पड़ रही है। एक दिन में छह किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करना गर्भवती महिलाओं के लिए आसान नहीं है। अल्ट्रासाउंड सुविधा पीएचसी और सीएचसी की बजाय केवल सिविल अस्पताल में ही होती है। पिछले पांच साल से सिविल अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष को ताला जड़ हुआ है। लंबे समय से जिले में अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट का पद भी खाली है। इस समय अल्ट्रासाउंड मशीन भी वर्किंग में नहीं है। ऐसे में सिविल अस्पताल में आने वाले सभी मरीज विभाग को रेफर ही करने पड़ रहे हैं।
ऐसे रेफर किए गए 30 हजार मरीज
सिविल अस्पताल में प्रतिदिन करीब 30 मरीज अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचते हैं। इनमें 80 फीसदी गर्भवती महिलाएं और 10 फीसदी पुरुष मरीज हैं। इस लिहाज से अगर एक साल में 200 कार्यदिवस मानें तो छह हजार मरीज रेफर किए गए हैं। अब पांच साल की अगर बात करें तो यह आंकड़ा बढ़कर 30 हजार पहुंच जाता है।
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भागदौड़ से बचने के लिए निजी केंद्रों पर चुकाते हैं 400 रुपये
पुरुष मरीज रोहतक पीजीआई या भिवानी अस्पताल की भागदौड़ करने की बजाय 400 रुपये देकर निजी केंद्रों पर ही अल्ट्रासाउंड करवा लेते हैं। एक निजी अल्ट्रासाउंड की दैनिक ओपीडी 80 से 100 तक पहुंच जाती है।
गर्भवती महिलाओं हो रही शारीरिक परेशानी
सरकारी सुविधा पर किसी गर्भवती महिला को निजी केंद्र पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड सेवा का लाभ लेना है तो उसे पर्ची बनवाने के लिए पहले सिविल अस्पताल आना पड़ेगा। फिर यहां से तीन किलोमीटर दूर स्थित निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जाना पड़ेगा और अगले दिन रिपोर्ट लेने के लिए फिर से सिविल अस्पताल आना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को एक अल्ट्रासाउंड के लिए दो से तीन चक्कर लगाने पड़ जाते हैं।
डिप्टी सीएम के आदेश भी नहीं चढ़ेे सिरे
फरवरी में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने चरखी दादरी पहुंचकर अधिकारियों की बैठक ली थी। उस दौरान उन्होंने पुरानी अल्ट्रासाउंड के मौजूदा हालात की रिपोर्ट तैयार कर भेजने के आदेश दिए थे। अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट के बिना स्वास्थ्य विभाग अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला नहीं खोल सकता है और विशेषज्ञ की कमी डिप्टी सीएम के आदेश सिरे चढ़ाने में आड़े आ रही है।
मरीज बोले: सिविल अस्पताल में ही मिले सुविधा
मैं पेट में दर्द होने पर अल्ट्रासाउंड कराने सिविल अस्पताल आया था। यहां से मुझे भिवानी रेफर किया गया है। वहां जाने में काफी समय बर्बाद होगा और इससे बचने के लिए मुझे निजी केंद्र पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ेगा। - दिनेश, वार्ड-12
अल्ट्रासाउंड जैसी मूलभूत सुविधा भी सिविल अस्पताल में नहीं है और इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सुबह अपनी पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाने आया था, लेकिन यहां से रेफर कर दिया गया। - मोहन, वार्ड-7
अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू करवाने के लिए विशेषज्ञ की डिमांड हमने भेजी हुई है। विशेषज्ञ की तैनाती होते ही यह सुविधा सिविल अस्पताल में शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है। - डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ।
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संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने के चलते विभाग ने केवल गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड की ही वैकल्पिक व्यवस्था की हुई है। सिविल अस्पताल से पुरुष मरीजों को रोहतक पीजीआई या भिवानी सिविल अस्पताल रेफर किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए विभाग ने शहर के निजी केंद्रों से समझौता किया हुआ है। निजी केंद्रों पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पहले गर्भवती महिला को जिला अस्पताल से पर्ची बनवाकर लानी पड़ती है और अगले दिन अस्पताल में जाकर रिपोर्ट लेनी पड़ रही है। एक दिन में छह किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करना गर्भवती महिलाओं के लिए आसान नहीं है। अल्ट्रासाउंड सुविधा पीएचसी और सीएचसी की बजाय केवल सिविल अस्पताल में ही होती है। पिछले पांच साल से सिविल अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष को ताला जड़ हुआ है। लंबे समय से जिले में अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट का पद भी खाली है। इस समय अल्ट्रासाउंड मशीन भी वर्किंग में नहीं है। ऐसे में सिविल अस्पताल में आने वाले सभी मरीज विभाग को रेफर ही करने पड़ रहे हैं।
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ऐसे रेफर किए गए 30 हजार मरीज
सिविल अस्पताल में प्रतिदिन करीब 30 मरीज अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचते हैं। इनमें 80 फीसदी गर्भवती महिलाएं और 10 फीसदी पुरुष मरीज हैं। इस लिहाज से अगर एक साल में 200 कार्यदिवस मानें तो छह हजार मरीज रेफर किए गए हैं। अब पांच साल की अगर बात करें तो यह आंकड़ा बढ़कर 30 हजार पहुंच जाता है।
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भागदौड़ से बचने के लिए निजी केंद्रों पर चुकाते हैं 400 रुपये
पुरुष मरीज रोहतक पीजीआई या भिवानी अस्पताल की भागदौड़ करने की बजाय 400 रुपये देकर निजी केंद्रों पर ही अल्ट्रासाउंड करवा लेते हैं। एक निजी अल्ट्रासाउंड की दैनिक ओपीडी 80 से 100 तक पहुंच जाती है।
गर्भवती महिलाओं हो रही शारीरिक परेशानी
सरकारी सुविधा पर किसी गर्भवती महिला को निजी केंद्र पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड सेवा का लाभ लेना है तो उसे पर्ची बनवाने के लिए पहले सिविल अस्पताल आना पड़ेगा। फिर यहां से तीन किलोमीटर दूर स्थित निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जाना पड़ेगा और अगले दिन रिपोर्ट लेने के लिए फिर से सिविल अस्पताल आना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को एक अल्ट्रासाउंड के लिए दो से तीन चक्कर लगाने पड़ जाते हैं।
डिप्टी सीएम के आदेश भी नहीं चढ़ेे सिरे
फरवरी में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने चरखी दादरी पहुंचकर अधिकारियों की बैठक ली थी। उस दौरान उन्होंने पुरानी अल्ट्रासाउंड के मौजूदा हालात की रिपोर्ट तैयार कर भेजने के आदेश दिए थे। अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट के बिना स्वास्थ्य विभाग अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला नहीं खोल सकता है और विशेषज्ञ की कमी डिप्टी सीएम के आदेश सिरे चढ़ाने में आड़े आ रही है।
मरीज बोले: सिविल अस्पताल में ही मिले सुविधा
मैं पेट में दर्द होने पर अल्ट्रासाउंड कराने सिविल अस्पताल आया था। यहां से मुझे भिवानी रेफर किया गया है। वहां जाने में काफी समय बर्बाद होगा और इससे बचने के लिए मुझे निजी केंद्र पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ेगा। - दिनेश, वार्ड-12
अल्ट्रासाउंड जैसी मूलभूत सुविधा भी सिविल अस्पताल में नहीं है और इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सुबह अपनी पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाने आया था, लेकिन यहां से रेफर कर दिया गया। - मोहन, वार्ड-7
अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू करवाने के लिए विशेषज्ञ की डिमांड हमने भेजी हुई है। विशेषज्ञ की तैनाती होते ही यह सुविधा सिविल अस्पताल में शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है। - डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ।