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मानसून में हरियाली बढ़ाने पर रहेगा जोर, 4.24 लाख पौधे तैयार
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वन विभाग ने मानसून की पहली ही बारिश में विभिन्न किस्मों के पौधरोपण की तैयारी कर ली है। विभाग की प्लानिंग है कि अगर मानसून की शुरूआत में ही पौधरोपण कर दिया जाए तो मानसून के तीन माह के समय में पौधे में वृद्धि हो सकेगी। विभाग ने इसके लिए 4.24 लाख पौध की नर्सरी में तैयार की है, ताकि जिला को हरा-भरा बनाया जा सके। वन विभाग इस बार 77 हजार टाल ट्री भी लगाएगा। यह पौधे गांव शामलात जमीन, सड़क व नहरों के किनारे, स्कूल, कॉलेज प्रांगण, सरकारी कार्यालयों के परिसरों में लगाए जाने हैं। इसके अलावा आम लोगों को भी जरूरत के अनुसार पौधे वितरित किए जाएंगे।
पर्यावरण प्रदूषण विकट समस्या बनी रहती है। पेड़ों की संख्या लगातार घट रही है। सड़कों की चौड़ाई बढ़ने और नए रेलमार्ग बनने की वजह से हर साल राज्य के विभिन्न जिलों से लाखों की संख्या में हरे पेड़ों की कटाई मजबूरीवश करनी पड़ती है। इनके बदले नए पौधे लगाना और उनका कम से कम तीन साल रख रखाव करना बड़ा मुश्किल कार्य होता है जितने पौधे रोपित होते हैं उनमें से मुश्किल से 40 प्रतिशत ही पेड़ बन पाते हैं। अगले कुछ माह में जिले से ग्रीन कॉरीडोर भी गुजरना है ऐसे में इस छह लेन के मार्ग पर हजारों हरे पेड़ कटने हैं। इसी प्रकार जिले में एक दर्जन सड़कों की चौड़ाई भी बढ़ी है इस वजह से भी हरे पेड़ कटवाने पड़े हैं।
वन विभाग ने इस मानसून सीजन में जिले में तीन स्थानों पर पौध नर्सरी लगा रखी हैं। गांव बरसाना में लोहारू नहर के समीप और गांव रामनगर-कपूरी में बधवाना नहर के समीप पौध नर्सरी तैयार हो चुकी हैं। इसी प्रकार जिले के बाढड़ा उपमंडल में भी पौध नर्सरी तैयार है। बाढड़ा पौध नर्सरी में 50 हजार टाल ट्री और 1.50 लाख अन्य विभिन्न प्रजातियों की पौध तैयार की गई है। इसी प्रकार बरसाना और रामनगर-कपूरी स्थित पौध नर्सरियों में दो लाख आम प्रजातियों की पौध के अलावा 27 हजार टाल ट्री की पौध तैयार की गई है। इस प्रकार जिले में कुल चार लाख 27 हजार की पौध तैयार कर ली गई है।
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हारसिंगार व गुलमोहर की पौध भी तैयार
जिले की तीनों नर्सरियों में गूगल बेल, बकान, शहतूत, पीपल, नीम, गुलमोहर, हारसिंगार, पालम खीरा, चक्रासिया, पापड़ी, जामुन सहित विभिन्न प्रजातियों की पौध तैयार की जा रही है।
फरवरी में किया था बीजरोपण
फरवरी में ही नर्सरियों में बीज रोपण का कार्य कर दिया गया था। अब पौध तैयार हो गई हैं। मानसून की पहली बारिश में ही पौधरोपण शुरू कर दिया जाएगा। जिले में तीन पौध नर्सरियां तैयार की गई हैं। जिले में 77 हजार लंबे पौधे लगाए जाएंगे। आम लोगों को भी चाहिए कि वे बारिश होते ही ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधे लगाए और उनका संरक्षण करें।
नर्सरियों में हमने पौध तैयार करवा रखी है। हमारे प्रयास रहेगा कि मानसून की शुरूआत में ही पौधरोपण शुरू करवा दें। इसमें ग्राम पंचायतों की भी मदद ली जाएगी और लोगों को भी हम पौध वितरित करेंगे।
- कैलाशचंद्र, रेंजर, वन विभाग
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पर्यावरण प्रदूषण विकट समस्या बनी रहती है। पेड़ों की संख्या लगातार घट रही है। सड़कों की चौड़ाई बढ़ने और नए रेलमार्ग बनने की वजह से हर साल राज्य के विभिन्न जिलों से लाखों की संख्या में हरे पेड़ों की कटाई मजबूरीवश करनी पड़ती है। इनके बदले नए पौधे लगाना और उनका कम से कम तीन साल रख रखाव करना बड़ा मुश्किल कार्य होता है जितने पौधे रोपित होते हैं उनमें से मुश्किल से 40 प्रतिशत ही पेड़ बन पाते हैं। अगले कुछ माह में जिले से ग्रीन कॉरीडोर भी गुजरना है ऐसे में इस छह लेन के मार्ग पर हजारों हरे पेड़ कटने हैं। इसी प्रकार जिले में एक दर्जन सड़कों की चौड़ाई भी बढ़ी है इस वजह से भी हरे पेड़ कटवाने पड़े हैं।
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वन विभाग ने इस मानसून सीजन में जिले में तीन स्थानों पर पौध नर्सरी लगा रखी हैं। गांव बरसाना में लोहारू नहर के समीप और गांव रामनगर-कपूरी में बधवाना नहर के समीप पौध नर्सरी तैयार हो चुकी हैं। इसी प्रकार जिले के बाढड़ा उपमंडल में भी पौध नर्सरी तैयार है। बाढड़ा पौध नर्सरी में 50 हजार टाल ट्री और 1.50 लाख अन्य विभिन्न प्रजातियों की पौध तैयार की गई है। इसी प्रकार बरसाना और रामनगर-कपूरी स्थित पौध नर्सरियों में दो लाख आम प्रजातियों की पौध के अलावा 27 हजार टाल ट्री की पौध तैयार की गई है। इस प्रकार जिले में कुल चार लाख 27 हजार की पौध तैयार कर ली गई है।
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हारसिंगार व गुलमोहर की पौध भी तैयार
जिले की तीनों नर्सरियों में गूगल बेल, बकान, शहतूत, पीपल, नीम, गुलमोहर, हारसिंगार, पालम खीरा, चक्रासिया, पापड़ी, जामुन सहित विभिन्न प्रजातियों की पौध तैयार की जा रही है।
फरवरी में किया था बीजरोपण
फरवरी में ही नर्सरियों में बीज रोपण का कार्य कर दिया गया था। अब पौध तैयार हो गई हैं। मानसून की पहली बारिश में ही पौधरोपण शुरू कर दिया जाएगा। जिले में तीन पौध नर्सरियां तैयार की गई हैं। जिले में 77 हजार लंबे पौधे लगाए जाएंगे। आम लोगों को भी चाहिए कि वे बारिश होते ही ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधे लगाए और उनका संरक्षण करें।
नर्सरियों में हमने पौध तैयार करवा रखी है। हमारे प्रयास रहेगा कि मानसून की शुरूआत में ही पौधरोपण शुरू करवा दें। इसमें ग्राम पंचायतों की भी मदद ली जाएगी और लोगों को भी हम पौध वितरित करेंगे।
- कैलाशचंद्र, रेंजर, वन विभाग