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गोष्ठी : यातायात नियम महज नियम नहीं बल्कि जीवन बचाने के लिए हैं बेहद जरूरी
Mon, 12 Jan 2026 10:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 12 Jan 2026 10:26 PM IST
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चरखी दादरी। यातायात नियम महज नियम नहीं बल्कि जीवन बचाने के लिए बेहद जरूरी हैं। इसी उद्देश्य के साथ दादरी आरटीए सचिव मनोज कुमार के मार्गदर्शन में आरटीए विभाग की ओर से सोमवार को स्थानीय अग्रसेन धर्मशाला में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में स्कूल संचालकों, प्राचार्यों और शहर के सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर मंथन किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने प्रश्न भी पूछे और सुझाव साझा कर विचार-विमर्श किया। मंच संचालन डॉ. ललित महाजन ने किया।
-गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन संबंधित एजेंसियां सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि निर्माण स्थलों पर कहीं भी गति सीमा निर्धारित करने वाले बोर्ड या अन्य संकेतक नहीं लगाए हैं जिससे कोहरे के दौरान हादसे की संभावना बनी रहती है। वक्ताओं ने कहा कि विभागों में तालमेल होना बेहद जरूरी है।
वक्ताओं ने कहा कि कोई भी बच्चा अपने घर या स्कूल से ही सबसे अधिक चीजें सीखता है। ऐसे में सभी अभिभावक ध्यान रखें कि यदि वे यातायात नियमों की पालना करेंगे तो उन्हें देख बच्चे भी इसके लिए प्रेरित और जागरूक होंगे। वक्ताओं ने कहा कि जब हम खुद में बदलाव लाएंगे तो समाज में भी बदलाव आएगा।
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वाहनों पर कभी भी अतिरिक्त बंपर नहीं लगवाने चाहिए। ये बंपर सेंसर को काम करने से रोक देते हैं और हादसे होने की स्थिति में एयर बैग समय पर नहीं खुल पाते। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों की पालना केवल चालान से बचने के लिए नहीं बल्कि खुद व दूसराें की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।- सुनीता, टीएसआई।
व्यक्तिगत सतर्कता पर जोर देते हुए कहा कि चाहे हम वाहन चला रहे हों या पैदल चल रहे हों, सड़क पर हमारा पूरा ध्यान यातायात पर होना चाहिए। सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों की पालना को लेकर जागरूकता फैलाने में स्कूलों की जिम्मेदारी अधिक होती है।- रविंद्र गुप्ता, नगर व्यापार मंडल संरक्षक
सड़क सुरक्षा एक गंभीर विषय है। कि यातायात नियमों को केवल चालान के डर से नहीं, बल्कि अपनी व दूसरों की सुरक्षा के लिए अपनाना चाहिए। -डॉ. प्रवीण गर्ग, प्रदेश अध्यक्ष, ट्रैफिक रूल्स एंड रोड सेफ्टी फेडरेशन
प्रत्येक स्कूल, कॉलेज और सोसायटी में रोड सेफ्टी क्लब बनाए जाने चाहिए ताकि युवा वर्ग को शुरूआत से ही यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा सके।- जागृति कुमारी, जिला को-ऑर्डिनेटर
अभिभावक भी यह सुनिश्चित करें कि वे अपने 18 साल से कम उम्र के बच्चों को वाहन चलाने के लिए न दें। ऐसा करना बच्चों व दूसरों की जान जोखिम में डालने जैसा है। अभिभावकों को इस पर सख्ती से नियंत्रण करना चाहिए।- सुमन धनखड़, प्राचार्या, एमडी कॉन्वेंट स्कूल
इन्होंने भी रखे विचार
गोष्ठी में आरटीए विभाग से टीएसआई हिमांशी, टीएसआई रितेश राठी, टीएसआई सुधीर, आरएसए अरुण के अलावा डॉ. ऋषिप्रकाश, डॉ. सुधीर जांगड़ा, संजीव बुरा आदि ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर पूर्व डिप्टी डीईओ बलबीर सिंह, डॉ. सुभाष जैन, सुरेश सोलंकी, मोहन मकड़ानियां, शुभम गोयल, विनोद गर्ग, विष्णु गोयल, सतीश बजाज, सुनील गर्ग, डॉ. सीडी तिवारी आदि भी मौजूद रहे।
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-गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन संबंधित एजेंसियां सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि निर्माण स्थलों पर कहीं भी गति सीमा निर्धारित करने वाले बोर्ड या अन्य संकेतक नहीं लगाए हैं जिससे कोहरे के दौरान हादसे की संभावना बनी रहती है। वक्ताओं ने कहा कि विभागों में तालमेल होना बेहद जरूरी है।
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वक्ताओं ने कहा कि कोई भी बच्चा अपने घर या स्कूल से ही सबसे अधिक चीजें सीखता है। ऐसे में सभी अभिभावक ध्यान रखें कि यदि वे यातायात नियमों की पालना करेंगे तो उन्हें देख बच्चे भी इसके लिए प्रेरित और जागरूक होंगे। वक्ताओं ने कहा कि जब हम खुद में बदलाव लाएंगे तो समाज में भी बदलाव आएगा।
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वाहनों पर कभी भी अतिरिक्त बंपर नहीं लगवाने चाहिए। ये बंपर सेंसर को काम करने से रोक देते हैं और हादसे होने की स्थिति में एयर बैग समय पर नहीं खुल पाते। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों की पालना केवल चालान से बचने के लिए नहीं बल्कि खुद व दूसराें की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।- सुनीता, टीएसआई।
व्यक्तिगत सतर्कता पर जोर देते हुए कहा कि चाहे हम वाहन चला रहे हों या पैदल चल रहे हों, सड़क पर हमारा पूरा ध्यान यातायात पर होना चाहिए। सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों की पालना को लेकर जागरूकता फैलाने में स्कूलों की जिम्मेदारी अधिक होती है।- रविंद्र गुप्ता, नगर व्यापार मंडल संरक्षक
सड़क सुरक्षा एक गंभीर विषय है। कि यातायात नियमों को केवल चालान के डर से नहीं, बल्कि अपनी व दूसरों की सुरक्षा के लिए अपनाना चाहिए। -डॉ. प्रवीण गर्ग, प्रदेश अध्यक्ष, ट्रैफिक रूल्स एंड रोड सेफ्टी फेडरेशन
प्रत्येक स्कूल, कॉलेज और सोसायटी में रोड सेफ्टी क्लब बनाए जाने चाहिए ताकि युवा वर्ग को शुरूआत से ही यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा सके।- जागृति कुमारी, जिला को-ऑर्डिनेटर
अभिभावक भी यह सुनिश्चित करें कि वे अपने 18 साल से कम उम्र के बच्चों को वाहन चलाने के लिए न दें। ऐसा करना बच्चों व दूसरों की जान जोखिम में डालने जैसा है। अभिभावकों को इस पर सख्ती से नियंत्रण करना चाहिए।- सुमन धनखड़, प्राचार्या, एमडी कॉन्वेंट स्कूल
इन्होंने भी रखे विचार
गोष्ठी में आरटीए विभाग से टीएसआई हिमांशी, टीएसआई रितेश राठी, टीएसआई सुधीर, आरएसए अरुण के अलावा डॉ. ऋषिप्रकाश, डॉ. सुधीर जांगड़ा, संजीव बुरा आदि ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर पूर्व डिप्टी डीईओ बलबीर सिंह, डॉ. सुभाष जैन, सुरेश सोलंकी, मोहन मकड़ानियां, शुभम गोयल, विनोद गर्ग, विष्णु गोयल, सतीश बजाज, सुनील गर्ग, डॉ. सीडी तिवारी आदि भी मौजूद रहे।