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Charkhi Dadri News: 73 लाख की ट्रैफिक लाइटें बनी शोपीस, जेब्रा क्रॉसिंग न होने से नहीं हो पा रहा संचालन

Sat, 20 Dec 2025 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 20 Dec 2025 01:22 AM IST
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Traffic lights worth 73 lakhs have become showpieces, operations are not possible due to lack of zebra crossing
दादरी के लोहारू चौक पर लगी ट्रैफिक लाइटें। - फोटो : 1
चरखी दादरी। शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से नगर परिषद की ओर से करीब 73 लाख रुपये की लागत से पांच प्रमुख चौक-चौराहों पर ट्रैफिक लाइटें ल गवाई गई थीं, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इनका पूर्ण रूप से संचालन शुरू नहीं हो सका है। मौजूदा हालात यह हैं कि अधिकांश स्थानों पर केवल पीली बत्ती ही लगातार जलती-बुझती रहती है, जबकि लाल और हरी बत्ती का उपयोग नहीं हो पा रहा है। नतीजतन, ट्रैफिक नियंत्रण आज भी पूरी तरह पुलिस जवानों के भरोसे ही चल रहा है।
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पांच जगह लगाई हैं ट्रैफिक लाइटें
शहर में समसपुर टी-प्वाइंट, रावलधी-भिवानी लिंक मार्ग, रावलधी चौक, लोहारू चौक और चिड़िया मोड़ जैसे व्यस्त स्थानों पर ये ट्रैफिक लाइटें लगाई गई हैं। इन चौक-चौराहों से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। बावजूद इसके, ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम का लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा है। यदि कभी लाइटों को चालू करने का प्रयास भी किया गया, तो वाहन चालकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हो गई कि वाहन कहां रोके जाएं, क्योंकि किसी भी चौक पर जेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन नहीं बनाई गई है।
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जलती है एक ही बत्ती
पिछले कई महीनों से शहरवासियों का कहना है कि दिन हो या रात, ट्रैफिक हो या न हो, हर समय केवल पीली बत्ती ही जलती रहती है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि यातायात को केवल पीली चेतावनी लाइट के सहारे ही नियंत्रित करना था, तो फिर ऑटोमेटिक ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम पर लाखों रुपये खर्च करने की क्या आवश्यकता थी। लाल और हरी बत्ती न चलने से ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था का मूल उद्देश्य ही अधूरा रह गया है।
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संचालन की जिम्मेदारी सौंपी थी पुलिस विभाग
नगर परिषद द्वारा ट्रैफिक लाइटें स्थापित कर इनके संचालन की जिम्मेदारी पुलिस विभाग को सौंपी गई थी। इन लाइटों का उद्देश्य था कि वाहन चालकों को स्पष्ट संकेत मिलें और यातायात अनुशासन कायम हो सके। लेकिन सड़कों की खराब हालत इस व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है। शहर की कई प्रमुख सड़कों पर गड्ढे, उखड़ी सतह और असमान लेयर होने के कारण जेब्रा क्रॉसिंग बनाना भी संभव नहीं हो पा रहा है।



जेब्रा क्रॉसिंग ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम का अहम हिस्सा होती है, जिसके बिना यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि वाहन चालक कहां रुकें और कब आगे बढ़ें। मौजूदा स्थिति में चौक पर पहुंचने के बाद वाहन चालक असमंजस में पड़ जाते हैं, जिससे अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है और हादसों की आशंका भी बढ़ जाती है।
शहर की यातायात व्यवस्था आज भी मैनुअल तरीके से चल रही है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में पुलिसकर्मी चौक-चौराहों पर खड़े होकर हाथ के इशारों से ट्रैफिक नियंत्रित करते नजर आते हैं। यदि किसी कारणवश पुलिस जवान मौके पर मौजूद न हों, तो कई जगहों पर जाम और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो जाती है। इससे यह सवाल भी उठता है कि जब यातायात को मैनुअल रूप से ही संचालित करना है, तो फिर महंगे ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम पर सरकारी धन क्यों खर्च किया गया।

वर्जन :
शहर में विभिन्न जगहों पर लगी ट्रैफिक लाइटों का पूर्ण रूप से संचालन नहीं हो रहा है, यह मेरे संज्ञान में नहीं है। जल्द ही यातायात थाना प्रभारी को निर्देश देकर ट्रैफिक लाइटों का संचालन शुरू करवाया जाएगा। - रमेश कुमार, डीएसपी, दादरी।
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