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Charkhi Dadri News: बारिश से फसल की गुणवत्ता घटी, खरीद एजेंसी के बढ़े नखरे

Sat, 29 Nov 2025 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 29 Nov 2025 11:05 PM IST
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They raised their voice against the government and demanded compensation
सीसीआई की ओर से बनाए गए केंद्र में पहुंची कपास की नमी जांचते अधिकारी। संवाद
चरखी दादरी।
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अनाज मंडी में कपास बेचने पहुंच रहे किसानों के लिए कोड़ी युक्त व कच्ची कपास घाटे का सौदा बनी हुई है। यहीं कारण है कि अनाज मंडी में सरकारी खरीद कर रही एजेंसी सीसीआई (कॉटन कॉरर्पोरेशन ऑफ इंडिया) आठ दिनों बाद भी केवल 800 क्विंटल कपास की खरीद कर पाई है।
एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अधिक बारिश होने के कारण कपास की फसल पर खराब असर पड़ा है। इससे वो एजेंसी की ओर से निर्धारित पैमानों पर खरी नहीं उतर पा रही है। किसान घर से कपास भरकर मंडी तक पहुंचता है लेकिन अधिकारियों की ओर से कपास काे रिजेक्ट कर दिया जाता है। मेहनत पर पानी फिरने से किसानों में रोष बना है।
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30 हजार एकड़ में उगाई थी कपास
जिले में कपास की बंपर पैदावर करने के लिए लगभग 30 हजार एकड़ जमीन पर कपास की फसल लगाई गई थी ताकि किसान अधिक मुनाफा कमा सकें। क्षेत्र में अनुमान से अधिक बारिश होने के कारण अधिकतर कपास की खेती खराब हो गई थी। सरकार की ओर से क्षेत्र व आस-पास के जिलों में अधिक कपास होने की संभावना को देखते हुए सरकारी एजेंसी सीसीआई को मंडी में लगाया गया है, ताकि किसानों को फसल का वाजिब भाव मिल सके। लेकिन फसलों में खराबा आने के कारण किसानों को मंडी में आढ़तियों को ही कपास बेचनी पड़ रही है।
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मंडी में किसानों की फसल गुणवत्ता के आधार पर या फिर नमी की वजह से रिजेक्ट की जा रही है। ऐसे में किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। गांव रानीला से कपास लेकर पहुंचे किसान राजबीर कुमार, बलजीत सिंह, मुख्तार सिंह, गांव फोगाट निवासी विरेंद्र सिंह, प्रदीप कुमार आदि न बताया कि एजेंसी के अधिकारियों ने कपास में नमी की मात्रा अधिक और कपास में कोड़िया बनी होने के नाम पर खरीद करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अब उनकों वाहन का किराया भी जेब से देना पड़ेगा।

12 प्रतिशत से कम नमी की होगी खरीद
एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल कपास की सरकारी खरीद साफ व बगैर नमी की कपास को खरीदने के आदेश मिले हुए है। कपास में कोड़ी बनी हुई हैं, वहीं कपास कच्ची भी है। यह नियमोें पर खरा नहीं उतर रही है। एजेंसी की ओर से हमारे पास 12 प्रतिशत नमी तक ही खरीद करने के आदेश मिले हुए है। हम नियमों को ताक पर रख कपास नहीं खरीद सकते है।


8 दिनों में महज 42 किसान ही बेच पाए है कपास
बता दें सीसीआई (कॉटन कॉरर्पोरेशन ऑफ इंडिया ) की ओर से 21 नवंबर से कपास की सरकारी खरीद शुरू की गई थी। अनाज मंडी में संबंधित एजेंसी ने जिला झज्जर के 5 और स्थानीय क्षेत्र के 37 किसान ही कपास की फसल बेच पाए है। इस अवधि के दौरान 42 किसानों ने 800 क्विंटल कपास सरकारी भाव बेची है।


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अनाज मंडी में किसानों की कपास खरीदने के लिए एजेंसी को नियुक्त किया गया है। एजेंसी की ओर से कपास की गुणवत्ता जांचने के लिए पैमाने बनाए गए है। जिन किसानों की फसल गुणवत्ता पर खरी उतर रही है हमें वो कपास खरीदने में कोई परेशानी नहीं है।
- चंद्रशेखर, खरीद केंद्र अधिकारी, सीसीआई
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