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Charkhi Dadri News: बारिश आएगी, बह जाएगा पानी...कागजों में धरी रह जाएगी जल संरक्षण की योजना
Sun, 05 Jul 2026 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 05 Jul 2026 12:41 AM IST
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गांव भागवी में जलभराव क्षेत्र।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। जल प्रबंधन एवं संरक्षण की दिशा में योजना के तहत काम होना है लेकिन योजना के लिए एजेंसी से अनुबंध न होने पर काम नहीं हो पा रहा है। मानसून सीजन में वर्षा जल संरक्षण की विशेष भूमिका होती है। राज्य सरकार पहली बार जल सुरक्षा योजना पर काम शुरू करने जा रही है। हर साल मानसून सीजन में बारिश का पानी जलचक्र बनकर दो माह में ही खत्म हो जाता है।
इसका संचयन नहीं होने पर पानी का संकट बना रहता है। अगर बारिश के पानी का सही प्रबंधन एवं संचयन किया जाए तो इसका पूरे साल पेयजल व सिंचाई में उपयोग किया जा सकता है। भूमिगत जलस्तर हर साल नीचे जाने की वजह से आने वाले कुछ सालों में हालात विकट बन सकते हैं। वैसे सरकार हर साल मानसून सीजन में बाढ़ नियंत्रण पर करोड़ों रुपये का बजट खर्च करती है।
35 स्थानों पर किए बोरवेल : जिले में 35 स्थानों पर बोरवेल कर रखे हैं। इन बोरवेल पर पी-ट्यूब सेंसर लगाए रखे हैं जिससे प्रति माह जलस्तर की रिपोर्ट हेड ऑफिस पहुंचती है। जिले के विभिन्न गांवों में भूमिगत जलस्तर 300 फीट नीचे तक है। ऐसे में किसानों को 15 हार्स पावर की मोटर के जरिए पानी का उठान करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं हर साल जलस्तर नीचे जा रहा है। किसानों का मानना है कि 1995 के बाद से पर्याप्त मात्रा में बारिश न होने की वजह से जलस्तर बढ़ने के बजाय लगातार घटता जा रहा है।
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इसका संचयन नहीं होने पर पानी का संकट बना रहता है। अगर बारिश के पानी का सही प्रबंधन एवं संचयन किया जाए तो इसका पूरे साल पेयजल व सिंचाई में उपयोग किया जा सकता है। भूमिगत जलस्तर हर साल नीचे जाने की वजह से आने वाले कुछ सालों में हालात विकट बन सकते हैं। वैसे सरकार हर साल मानसून सीजन में बाढ़ नियंत्रण पर करोड़ों रुपये का बजट खर्च करती है।
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35 स्थानों पर किए बोरवेल : जिले में 35 स्थानों पर बोरवेल कर रखे हैं। इन बोरवेल पर पी-ट्यूब सेंसर लगाए रखे हैं जिससे प्रति माह जलस्तर की रिपोर्ट हेड ऑफिस पहुंचती है। जिले के विभिन्न गांवों में भूमिगत जलस्तर 300 फीट नीचे तक है। ऐसे में किसानों को 15 हार्स पावर की मोटर के जरिए पानी का उठान करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं हर साल जलस्तर नीचे जा रहा है। किसानों का मानना है कि 1995 के बाद से पर्याप्त मात्रा में बारिश न होने की वजह से जलस्तर बढ़ने के बजाय लगातार घटता जा रहा है।
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