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भगवान शंकर ने माता पार्वती को सुनाई अमर कथा : दिव्या मिश्रा
Thu, 08 Aug 2024 06:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 08 Aug 2024 06:46 AM IST
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कथा कार्यक्रम में शामिल भक्त व कथावाचक।
चरखी दादरी। चरखी दरवाजा स्थित गौरीशंकर महादेव मंदिर के महंत सूरजनाथ के सानिध्य में चल रही श्रीमद्भागवत में बुधवार को वृंदावन से पधारे पंडित दिव्या मिश्रा ने शिव अमर कथा का वाचन किया। उन्होंने ने कहा कि अमर कथा सुनने मात्र से अमरत्व की प्राप्ति होती है।
इस कथा को भगवान शंकर ने पार्वती को सुनाया था। उन्होंने कहा कि कण-कण में शिव शंकर का वास है जो भक्त सच्चे मन से पूजन करता है वहीं, शिव धाम होता है। इस कथा को किसी साधारण स्थान पर सुनाया नहीं जाता क्योंकि सुनने वाला जीव- जंतु भी अमर हो जाता है।
कथा को सुनाने के लिए भगवान शंकर ने हिमालय में एकांत स्थान पर गुफा का चयन किया था जहां कोई जीव-जंतु नहीं था। इसके लिए गले में लटक रहे सर्प को भी बाहर छोड़ दिया था। संयोगवश उस गुफा में दो कबूतर मौजूद थे जो पार्वती के सोने के बाद भागवत कथा सुनाने के दौरान हुंकार भरते रहे।
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कथा सुनाने के बाद जब भोलेनाथ ने आंखें खोली तो पाया कि पार्वती तो सो रही है, उनकी कथा कौन सुन रहा था। जब कबूतर के बच्चों को देखा तो भगवान शंकर त्रिशूल उठाकर संहार करने लगे तो पार्वती ने शंकर भगवान को रोक दिया। कथा के दौरान मंदिर प्रधान कृष्ण अत्री, शिव शंभु सेवा दल के अध्यक्ष पीतांबर गर्ग भंडारी, अजय कुमार जैन, विजय भारद्वाज, सुभाष शर्मा, रमेश शर्मा, उदय राम, पुजारी बालमुकुंद पांडे, इंद्रा देवी अत्री, लाडो देवी, सुनीता, माया, अंगूरी, सरला देवी, बाला देवी का सहयोग रहा।
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इस कथा को भगवान शंकर ने पार्वती को सुनाया था। उन्होंने कहा कि कण-कण में शिव शंकर का वास है जो भक्त सच्चे मन से पूजन करता है वहीं, शिव धाम होता है। इस कथा को किसी साधारण स्थान पर सुनाया नहीं जाता क्योंकि सुनने वाला जीव- जंतु भी अमर हो जाता है।
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कथा को सुनाने के लिए भगवान शंकर ने हिमालय में एकांत स्थान पर गुफा का चयन किया था जहां कोई जीव-जंतु नहीं था। इसके लिए गले में लटक रहे सर्प को भी बाहर छोड़ दिया था। संयोगवश उस गुफा में दो कबूतर मौजूद थे जो पार्वती के सोने के बाद भागवत कथा सुनाने के दौरान हुंकार भरते रहे।
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कथा सुनाने के बाद जब भोलेनाथ ने आंखें खोली तो पाया कि पार्वती तो सो रही है, उनकी कथा कौन सुन रहा था। जब कबूतर के बच्चों को देखा तो भगवान शंकर त्रिशूल उठाकर संहार करने लगे तो पार्वती ने शंकर भगवान को रोक दिया। कथा के दौरान मंदिर प्रधान कृष्ण अत्री, शिव शंभु सेवा दल के अध्यक्ष पीतांबर गर्ग भंडारी, अजय कुमार जैन, विजय भारद्वाज, सुभाष शर्मा, रमेश शर्मा, उदय राम, पुजारी बालमुकुंद पांडे, इंद्रा देवी अत्री, लाडो देवी, सुनीता, माया, अंगूरी, सरला देवी, बाला देवी का सहयोग रहा।