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Charkhi Dadri News: इकलौते बेटे को मुखाग्नि देने का साहस नहीं जुटा पाए पिता, चचेरे भाई ने किया अंतिम संस्कार

Fri, 30 May 2025 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Fri, 30 May 2025 11:23 PM IST
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The father could not muster the courage to cremate his only son, his cousin performed the last rites
चरखी दादरी। सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी प्रकाश फौगाट इकलौते बेटे को पढ़ा लिखाकर कामयाब बनाना चाहते थे। उम्मीद यह भी थी कि बुढ़ापे में सहारा बनेगा, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि बेटे दीक्षित की अर्थी को कंधा देना पड़ेगा। वह बुरी तरह टूट चूके थे..मन में दर्द का गुबार और आंखें छल-छलाई थीं, लेकिन कलेजे को कठोर कर ये दर्द किसी के सामने जाहिर नहीं होने दे रहे थे। अपने लाल को चिता पर देख उनके हाथ कांप गए, वे मुखाग्नि देने का साहस नहीं जुटा पाए। ऐसे में चचेरे भाई राहुल ने अंतिम संस्कार की रस्म निभाई।
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हिसार के नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार शाम करीब चार बजे दीक्षित का शव पैतृक गांव झींझर पहुंचा। ग्रामीण उनके घर पर सुबह से ही शव पहुंचने का इंतजार कर रहे थे, जबकि आसपड़ोस की महिलाएं दीक्षित के घर दादी संतरा देवी और अन्य महिलाओं को संभालने पहुंचीं थीं। पोते का कफन में लिपटा शव देखकर दादी बिलख पड़ीं। वे रोते हुए बोलीं-पहलै बुलाया तो आया कोणी, ईब आया है तो बोलता कोणी...। दीक्षित की मां, बहन और परिवार के अन्य लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। करीब 30 मिनट तक दीक्षित का शव घर पर रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए रामबाग ले जाया गया। यहां पिता प्रकाश फौगाट लाडले को अंतिम विदाई देने का साहस नहीं जुटा पाए। उनके हाथ कांप रहे थे। ग्रामीणों ने उन्हें सांत्वना देते हुए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरा करने के लिए कहा, लेकिन वे चिता से कुछ दूर चले गए और उनके दिल में भरा गम का गुबार फूट पड़ा। इस पर उनके चचेरे भाई ने दीक्षित के शव को मुखाग्नि दी।
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बिलख उठी दादी, पोतों ने संभाला



दीक्षित के अंतिम दर्शन करते वक्त दादी संतरा देवी भावुक हो गईं। विलाप करते हुए वो दीक्षित के किस्से बताने लगीं। महिलाओं के सांत्वना देने के बाद भी उनके आंसू नहीं थमे और इसके बाद उनके पोते उन्हें वहां से दूसरे कमरे में ले गए।
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ग्रामीण बोले: इकलौता चिराग बुझने से प्रकाश के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़


दीक्षित हत्या प्रकरण की चर्चा झींझर गांव में वीरवार से ही थी। हालांकि प्रकाश का गांव में आना-जाना कम ही था। वे 12 साल पहले दो बच्चों व पत्नी के साथ हिसार चले गए थे। ग्रामीण सूरज, दीपक, अंकित, राजेश, नरेंद्र और मनोज ने बताया कि घर का इकलौता चिराग खोने से प्रकाश के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है। इस घटना का जैसे ही पता लगा गांव में शोक की लहर छा गई।
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