फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   The depot requires 177 buses, but currently only 123 buses are used.

Charkhi Dadri News: डिपो मेें 177 बसों की जरूरत, फिलहाल 123 बसों से ही चलाना पड़ रहा है काम

Wed, 18 Feb 2026 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 18 Feb 2026 01:46 AM IST
विज्ञापन
The depot requires 177 buses, but currently only 123 buses are used.
स्थानीय रोडवेज बस डिपो। 
चरखी दादरी। रोडवेज परिवहन के बेड़े में बसों की किल्लत होने से यात्रियों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं, वहीं लंबे रूटों पर बसों का संचालन नहीं होने से यात्रियों को अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा हैं। रोडवेज बेड़े में परिवहन विभाग की जहां 108 बसें चलाई जा रही हैं, वहीं 15 बसें किलोमीटर योजना के तहत चल रही हैं। फिलहाल बेड़े में कुल 123 बसों का संचालन हो रहा हैं, जो डिपो नियमों से काफी कम है। वहीं नियमानुसार जरूरत 177 बसों की है।
विज्ञापन

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बेड़े में डिपो नियमों अनुसार बसों की संख्या बढ़वाने की मांग की है, ताकि यात्रियोंं को होने वाली परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। शहर के बस स्टैंड को सब डिपो से डिपो का दर्जा मिलने के बाद भी यात्रियों को बसों की कमी से दो चार होना पड़ रहा हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बसों की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए कई बार लोग महाप्रबंधक को ज्ञापन के माध्यम से अवगत भी करवा चुके है। वहीं रोडवेज डिपो परिसर में बूथों पर यात्रियों को बसों का लंबा इंतजार करना पड़ रहा हैं।
विज्ञापन

हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन व संबंधित सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा डिपो प्रधान सुनील दातौली ने बताया कि डिपो के नियमानुसार बेड़े में 177 बसों का संचालन होता हैं, लेकिन बेड़े में मात्र 123 बसें चलाई जा रही है। जिससे लोकल व लंबे रूट पर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन लंबे रूटों की बसें हैं बंद

रोडवेज बेड़े में बसों की कमी के चलते परिवहन विभाग ने दादरी से चित्तौड़गढ़, अलीगढ़, हनुमानगढ़ जाने वाली बसें पिछले लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इसके अलावा चंडीगढ़, दिल्ली के भी कई फेरे बंद किए गए हैं। इस कारण यात्रियों को अनेक डिपो में बसों को बदलना पड़ता हैं। जिससे यात्रियों को मानसिक परेशानी के अलावा समय भी अधिक लगता है।



प्रतिदिन 40 हजार यात्री करते हैं सफर

रोडवेज विभाग के आंकड़ों के अनुसार स्थानीय डिपो से प्रतिदिन 40 हजार यात्री विभिन्न शहरों के लिए सफर करते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि बसों में यात्रियों की किस कदर भीड़ बनी रहती होगी। कर्मचारी नेताओं का कहना हैं कि यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण एक बस में दो बसों की सवारियां भरी जाती हैं।



14 साल बाद भी नहीं बदले हालात

एक जुलाई 2011 को स्थानीय सब डिपो को डिपो का दर्जा दिया गया था। लेकिन डिपो बनने के 14 साल बाद भी यात्रियों को पर्याप्त बसें नहीं मिल पाई हैं। विभाग के कर्मचारी ने बताया कि केवल वर्ष 2014 में ही बसों की संख्या 177 हो पाई थी। वहीं इसके साथ ही इस अवधि के दौरान कुछ बसें कंडम हो गई और बीएस-4 मानक वाली की बसों को अन्य डिपो में भेजा गया था।



वर्ष 2025 में रोडवेज को मिली थी 30 नई बसें

प्राप्त जानकारी अनुसार दिसंबर 2024 में 60 नई बसों के साथ ही 8 मिनी बसों को शामिल किया गया था। रोडवेज बेड़े में बसों की कमी को देखते हुए वर्ष 2025 में 30 बीएस-6 मानक वाली बसें भेजी गई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed