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Charkhi Dadri News: विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से शिक्षकों को अवगत करवाया
Sat, 29 Aug 2026 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 29 Aug 2026 11:30 PM IST
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डाइट में प्रशिक्षण शिविर में जानकारी देते शिक्षक।
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चरखी दादरी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के दिशा-निर्देशों तथा जिला शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) बिरही कलां के प्राचार्य धर्मेंद्र चौधरी के मार्गदर्शन में डाइट बिरही कलां में चल रहे पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को विधिवत समापन हुआ। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को नवीन शैक्षिक अवधारणाओं, तकनीक, नवाचार और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से अवगत करवाया गया।
समापन अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नूंह के विज्ञान प्रवक्ता सुमनवीर मुख्य अतिथि वक्ता रहे। उन्होंने विज्ञान में स्थायित्व विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।
डाइट बिरही कलां के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं प्रशिक्षण प्रभारी नवरत्न ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से परिचित करवाना था, ताकि प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का प्रभाव विद्यालयों के कक्षा-कक्षों में दिखाई दे सके।
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खेल आधारित शिक्षण और नवाचार पर चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान राकेश गोदारा ने खेल-आधारित शिक्षण पद्धति के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी। वहीं प्रवक्ता नरेश कुमार ने सूचना एवं संचार तकनीक तथा नवाचार विषय पर प्रशिक्षण दिया। दोनों सत्रों में शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान शिक्षण को अधिक रोचक, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की गई।
कविता के माध्यम से समझाया मातृभाषा का महत्व
प्रातःकालीन सत्र की शुरुआत प्रार्थना सभा से हुई। इसके बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हड़ौदी के प्रवक्ता राजेश कुमार ने कविता के माध्यम से भाषा और मातृभाषा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की संस्कृति, संवेदना, संस्कार और पहचान से भी जुड़ी होती है।
किशोरावस्था की समस्याओं पर किया मंथन
फीडबैक सत्र में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कारीधारणी की रसायन विज्ञान प्रवक्ता सुमित्रा ने लैंगिक अंतर तथा किशोर-किशोरियों की विभिन्न समस्याओं पर प्रतिभागियों के साथ विचार-विमर्श किया। उन्होंने किशोरावस्था में विद्यार्थियों की भावनात्मक, सामाजिक और शैक्षिक आवश्यकताओं को समझने तथा उनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
स्कूलों में प्राप्त ज्ञान को लागू करने पर जोर
प्रशिक्षण की व्यवस्थाओं में प्रवक्ता राजेश कुमार ने उपस्थिति एवं अन्य कार्यों की जिम्मेदारी संभाली। जोगेंद्र सिंह ने भोजन व जलपान की व्यवस्था देखी, जबकि अभिमन्यु लिपिक और राजेश कुमार लिपिक ने अभिलेख एवं कार्यालयीन कार्य संभाले। समापन अवसर पर प्रशिक्षण प्रभारी नवरत्न ने विषय विशेषज्ञों, प्रतिभागियों और डाइट के अधिकारियों व कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और नवाचारों को विद्यालयों में विद्यार्थियों के हित में लागू करना ही इसकी वास्तविक सफलता है।
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समापन अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नूंह के विज्ञान प्रवक्ता सुमनवीर मुख्य अतिथि वक्ता रहे। उन्होंने विज्ञान में स्थायित्व विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।
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डाइट बिरही कलां के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं प्रशिक्षण प्रभारी नवरत्न ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से परिचित करवाना था, ताकि प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का प्रभाव विद्यालयों के कक्षा-कक्षों में दिखाई दे सके।
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खेल आधारित शिक्षण और नवाचार पर चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान राकेश गोदारा ने खेल-आधारित शिक्षण पद्धति के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी। वहीं प्रवक्ता नरेश कुमार ने सूचना एवं संचार तकनीक तथा नवाचार विषय पर प्रशिक्षण दिया। दोनों सत्रों में शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान शिक्षण को अधिक रोचक, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की गई।
कविता के माध्यम से समझाया मातृभाषा का महत्व
प्रातःकालीन सत्र की शुरुआत प्रार्थना सभा से हुई। इसके बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हड़ौदी के प्रवक्ता राजेश कुमार ने कविता के माध्यम से भाषा और मातृभाषा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की संस्कृति, संवेदना, संस्कार और पहचान से भी जुड़ी होती है।
किशोरावस्था की समस्याओं पर किया मंथन
फीडबैक सत्र में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कारीधारणी की रसायन विज्ञान प्रवक्ता सुमित्रा ने लैंगिक अंतर तथा किशोर-किशोरियों की विभिन्न समस्याओं पर प्रतिभागियों के साथ विचार-विमर्श किया। उन्होंने किशोरावस्था में विद्यार्थियों की भावनात्मक, सामाजिक और शैक्षिक आवश्यकताओं को समझने तथा उनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
स्कूलों में प्राप्त ज्ञान को लागू करने पर जोर
प्रशिक्षण की व्यवस्थाओं में प्रवक्ता राजेश कुमार ने उपस्थिति एवं अन्य कार्यों की जिम्मेदारी संभाली। जोगेंद्र सिंह ने भोजन व जलपान की व्यवस्था देखी, जबकि अभिमन्यु लिपिक और राजेश कुमार लिपिक ने अभिलेख एवं कार्यालयीन कार्य संभाले। समापन अवसर पर प्रशिक्षण प्रभारी नवरत्न ने विषय विशेषज्ञों, प्रतिभागियों और डाइट के अधिकारियों व कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और नवाचारों को विद्यालयों में विद्यार्थियों के हित में लागू करना ही इसकी वास्तविक सफलता है।