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Charkhi Dadri News: फलक छूने की ललक...शिक्षा ने पास की हर परीक्षा
Mon, 31 Mar 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 31 Mar 2025 01:05 AM IST
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पदक जीतने के बाद एथलीट शिक्षा साहू। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। फलक छूने की ललक में शिक्षा हर कठिन परीक्षा पास कर माता-पिता के सपने पूरे कर रही है। गांव रानीला की रहने वाली 19 वर्षीय शिक्षा शॉटपुट में राष्ट्रीय स्तर पर 13 पदक जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर चुकी है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने के लिए मैदान में पसीना बहा रही है।
राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके नफे सिंह साहू का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना था। पारिवारिक कारणों से वह इस सपने को पूरा नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने बेटी शिक्षा और बेटे अतुल को खेल के क्षेत्र में उतारा। दोनों अंतरराष्ट्रीय पर अपनी धमक कायम कर चुके हैं। पिता की प्रेरणा से शिक्षा ने सात साल पहले गांव के राजकीय स्कूल में शॉटपुट खेलने की शुरुआत की। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। छोटा भाई अतुल डिस्कस थ्रो में दम दिखा रहा है।
मां संगीता गृहिणी हैं। वह बेटी को आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं। वह शिक्षा को खेल के लिए प्रोत्साहित करती हैं। शिक्षा ने अपने पिता के पास खेल अभ्यास कर शॉटपुट में जिलास्तर और राज्यस्तर पर उपलब्धियां हासिल कीं। राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ने के कारण एथलेटिक्स कोच की जरूरत महसूस हुई तो शिक्षा ने शहर स्थित बलिदान स्टेडियम में संचालित खेल नर्सरी में जाना शुरू किया। यहां कोच बिजेंद्र सिंह के पास अभ्यास किया। इसके बाद शिक्षा के खेल में और निखार आया। वह राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई।
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अब तक शिक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर 13 पदक जीत कर उसने प्रदेश का नाम रोशन किया है। फिलहाल, वह साई में खेल का अभ्यास कर रही है।
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चरखी दादरी। फलक छूने की ललक में शिक्षा हर कठिन परीक्षा पास कर माता-पिता के सपने पूरे कर रही है। गांव रानीला की रहने वाली 19 वर्षीय शिक्षा शॉटपुट में राष्ट्रीय स्तर पर 13 पदक जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर चुकी है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने के लिए मैदान में पसीना बहा रही है।
राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके नफे सिंह साहू का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना था। पारिवारिक कारणों से वह इस सपने को पूरा नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने बेटी शिक्षा और बेटे अतुल को खेल के क्षेत्र में उतारा। दोनों अंतरराष्ट्रीय पर अपनी धमक कायम कर चुके हैं। पिता की प्रेरणा से शिक्षा ने सात साल पहले गांव के राजकीय स्कूल में शॉटपुट खेलने की शुरुआत की। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। छोटा भाई अतुल डिस्कस थ्रो में दम दिखा रहा है।
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मां संगीता गृहिणी हैं। वह बेटी को आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं। वह शिक्षा को खेल के लिए प्रोत्साहित करती हैं। शिक्षा ने अपने पिता के पास खेल अभ्यास कर शॉटपुट में जिलास्तर और राज्यस्तर पर उपलब्धियां हासिल कीं। राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ने के कारण एथलेटिक्स कोच की जरूरत महसूस हुई तो शिक्षा ने शहर स्थित बलिदान स्टेडियम में संचालित खेल नर्सरी में जाना शुरू किया। यहां कोच बिजेंद्र सिंह के पास अभ्यास किया। इसके बाद शिक्षा के खेल में और निखार आया। वह राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई।
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अब तक शिक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर 13 पदक जीत कर उसने प्रदेश का नाम रोशन किया है। फिलहाल, वह साई में खेल का अभ्यास कर रही है।