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Charkhi Dadri News: बीमार पिता के इलाज के लिए संभाली घर की जिम्मेदारी
Mon, 29 Sep 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 29 Sep 2025 01:15 AM IST
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प्रियंका प्रजापति
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहर की एमसी कॉलोनी निवासी प्रियंका प्रजापति आज की युवा महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। जहां एक ओर वह रक्तदान शिविरों के माध्यम से जरूरतमंदों की जान बचा रही हैं, वहीं, दूसरी ओर बीमार पिता के इलाज और परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए शादियों में घोड़ी-बग्घी तक चला रही हैं।
प्रियंका ने बताया कि उन्होंने अब तक 16 बार रक्तदान किया है। पहली बार वर्ष 2020 में रक्तदान किया, जबकि 2023 में आधी रात को एक घायल महिला को रक्त देकर उसकी जान बचाई। इसके अलावा, वह फुटपाथ पर मिट्टी के बर्तनों की स्टॉल लगाकर भी परिवार का सहयोग करती हैं।
उनकी सामाजिक सेवाओं और हिम्मत को देखते हुए उन्हें फिल्मी कलाकार रजा मुराद और राकेश बेदी द्वारा तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली प्रियंका पांच भाई-बहनों में चौथे स्थान पर हैं। प्रियकां ने बताया कि छोटे भाई और बीमार पिता की जिम्मेदारी के कारण उन्होंने घोड़ी-बग्घी चलाने का कार्य खुद संभाला, ताकि, परिवार को आर्थिक सहारा मिल सके। प्रियंका का मानना है कि हर महिला को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और जीवन में आने वाली सभी चुनौतियों का डटकर सामना करना चाहिए।
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चरखी दादरी। शहर की एमसी कॉलोनी निवासी प्रियंका प्रजापति आज की युवा महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। जहां एक ओर वह रक्तदान शिविरों के माध्यम से जरूरतमंदों की जान बचा रही हैं, वहीं, दूसरी ओर बीमार पिता के इलाज और परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए शादियों में घोड़ी-बग्घी तक चला रही हैं।
प्रियंका ने बताया कि उन्होंने अब तक 16 बार रक्तदान किया है। पहली बार वर्ष 2020 में रक्तदान किया, जबकि 2023 में आधी रात को एक घायल महिला को रक्त देकर उसकी जान बचाई। इसके अलावा, वह फुटपाथ पर मिट्टी के बर्तनों की स्टॉल लगाकर भी परिवार का सहयोग करती हैं।
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उनकी सामाजिक सेवाओं और हिम्मत को देखते हुए उन्हें फिल्मी कलाकार रजा मुराद और राकेश बेदी द्वारा तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली प्रियंका पांच भाई-बहनों में चौथे स्थान पर हैं। प्रियकां ने बताया कि छोटे भाई और बीमार पिता की जिम्मेदारी के कारण उन्होंने घोड़ी-बग्घी चलाने का कार्य खुद संभाला, ताकि, परिवार को आर्थिक सहारा मिल सके। प्रियंका का मानना है कि हर महिला को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और जीवन में आने वाली सभी चुनौतियों का डटकर सामना करना चाहिए।
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