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सैन्य कारणों के चलते नहीं पहुंचा शहीद भूपेंद्र का पार्थिव शरीर
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फोटो 28 शहीद भूपेंद्र सिंह।
- फोटो : CharkhiDadri
कश्मीर के नौगाम और पुंछ में पाकिस्तान की तरफ से की गई फायरिंग में शहीद हुए दादरी जिले के बांस गांव के शहीद भूपेंद्र सिंह (23) का पार्थिव शरीर सोमवार को भी गांव में नहीं पहुंचा। भूपेंद्र के परिजनों ने बताया कि पार्थिव शरीर को श्रीनगर से दिल्ली तक वाया एयर और दिल्ली से बांस गांव तक सेना के ट्रक में लाया जाएगा। सैन्य कारणों के चलते शव को श्रीनगर से नहीं भेजा जा सका। मंगलवार शाम तक भूपेंद्र के पार्थिव शरीर के गांव में पहुंचने की उम्मीद है। गांव बांस में ही शहीद की अंत्येष्टि की जाएगी।
दूसरी ओर शहादत के तीन दिन बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी या राजनेता शहीद के घर नहीं पहुंचा है। परिजनों और शहीद भूपेंद्र के दोस्तों के अनुसार फोन पर पार्थिव शरीर के आने की अपडेट ली जा रही है। शहीद की मां राजेश देवी और पत्नी रेखा का रो-रोकर बुरा हाल है।
भूपेंद्र के परिवार के नजदीकी और दोस्त ने बताया कि पहले सोमवार तक शहीद के पार्थिव शरीर के पहुंचने की उन्हें सूचना मिली थी, लेकिन सैन्य कारणों के चलते नहीं पहुंच सका। उन्होंने बताया कि अब जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक मंगलवार शाम तक भूपेंद्र का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचने की उम्मीद है। भूपेंद्र पांच साल पहले सेना में भर्ती हुए थे और पिछले तीन साल से उनकी पोस्टिंग बारमूला में थी। शुक्रवार रात पाकिस्तान की तरफ से की गई फायरिंग में वो शहीद हो गए। शनिवार दोपहर डेढ़ बजे मल्खान सिंह को बड़े बेटे की शहादत की खबर मिली।
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शहीद के नाम पर हो खेल स्टेडियम व राजकीय स्कूल
शहीद भूपेंद्र के दोस्त और गांव के युवा क्लब सदस्यों ने कहा कि भूपेंद्र ने शहादत देकर युवाओं के लिए मिसाल पेश की है। युवा क्लब के सदस्यों ने गांव के राजकीय स्कूल और खेल स्टेडियम का नामकरण शहीद भूपेंद्र के नाम पर करने की मांग की।
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दूसरी ओर शहादत के तीन दिन बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी या राजनेता शहीद के घर नहीं पहुंचा है। परिजनों और शहीद भूपेंद्र के दोस्तों के अनुसार फोन पर पार्थिव शरीर के आने की अपडेट ली जा रही है। शहीद की मां राजेश देवी और पत्नी रेखा का रो-रोकर बुरा हाल है।
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भूपेंद्र के परिवार के नजदीकी और दोस्त ने बताया कि पहले सोमवार तक शहीद के पार्थिव शरीर के पहुंचने की उन्हें सूचना मिली थी, लेकिन सैन्य कारणों के चलते नहीं पहुंच सका। उन्होंने बताया कि अब जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक मंगलवार शाम तक भूपेंद्र का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचने की उम्मीद है। भूपेंद्र पांच साल पहले सेना में भर्ती हुए थे और पिछले तीन साल से उनकी पोस्टिंग बारमूला में थी। शुक्रवार रात पाकिस्तान की तरफ से की गई फायरिंग में वो शहीद हो गए। शनिवार दोपहर डेढ़ बजे मल्खान सिंह को बड़े बेटे की शहादत की खबर मिली।
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शहीद के नाम पर हो खेल स्टेडियम व राजकीय स्कूल
शहीद भूपेंद्र के दोस्त और गांव के युवा क्लब सदस्यों ने कहा कि भूपेंद्र ने शहादत देकर युवाओं के लिए मिसाल पेश की है। युवा क्लब के सदस्यों ने गांव के राजकीय स्कूल और खेल स्टेडियम का नामकरण शहीद भूपेंद्र के नाम पर करने की मांग की।