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मरीजों को राहत : डायलिसिस, सीटी स्कैन और एमआरआई की मिलेगी सुविधा
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सामान्य अस्पताल भवन।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। नागरिक अस्पताल में मरीजों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है। मरीजों को जांच की सुविधाएं न मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ता था, कुछ जांच तो ऐसी है, जो जिला अस्पताल में होती ही नहीं थी। इन जांचों के लिए निजी लैब या दूसरे शहर जाना पड़ता था। अब इन जांचों की सुविधा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत शुरू की गई है। पीपीपी मोड़ पर शहरवासियों को सीटी स्कैन, डायलिसिस और एमआरआई की सुविधा नागरिक अस्पताल में ही मिलेगी।
इसके लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों से जगह की उपलब्धता बारे पत्र व्यवहार किया गया। इसके जवाब में स्थानीय अधिकारियों ने मातृ-शिशु अस्पताल और ऊधम सिंह जैन सिविल अस्पताल में जगह दिखाई है। इस साल के अंत तक दोनों सेंटर शुरू होने की उम्मीद है। दोनों सेंटर बनने के बाद जिले के मरीजों को रोहतक, हिसार, दिल्ली के चक्कर नहीं लगाने होंगे और उन्हें यहीं पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलेगी। पीपीपी के तहत चरखी दादरी में पहले भी वर्ष 2018 में प्रयास हुए थे मगर योजना शुरू नहीं चढ़ी। अब एक बार फिर योजना पर काम शुरू हुआ है।
एक हजार में डायलिसिस, ढाई हजार में होंगे सीटी स्कैन, एमआरआई
किडनी मरीजों को डायलिसिस की जरूरत होती है। जिले में सुविधा नहीं होने पर उन्हें पीजीआई रोहतक भागना पड़ता है या फिर हिसार, दिल्ली आदि बड़े शहरों में जाना पड़ता है। जहां जाने और इलाज पर छह से आठ हजार रुपये प्रति विजिट खर्च होता है। सामान्य अस्पताल में डायलिसिस सेंटर बनने के बाद यहां एक हजार रुपये तक में ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। यानी किराया और प्राइवेट अस्पताल के इलाज के खर्च से भी मुक्ति मिलेगी। सीटी स्कैन और एमआरआई की बात करें तो एमआरआई का निजी केंद्रों पर जो खर्च आता है पीपीपी में उससे करीब आधे यानि ढाई हजार रुपये में यह सुविधा मिल जाएगी।
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इन्हें मिलेगी निशुल्क सुविधा : पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में बीपीएल, एससी श्रेणी, आर्थिक रूप से पिछड़े, स्लम एरिया के मरीजों, सड़क हादसों में घायलों को डायलिसिस, सिटी स्कैन, एमएलआरआई की निशुल्क सुविधा मिलेगी। इसके लिए बाकायदा एक निजी कंपनी से एमओयू साइन किया जाएगा।
किसे होती है डायलिसिस की जरूरत
किडनी संबंधित मरीजों को डायलिसिस सप्ताह में तीन-चार की जाए तो मरीज के जल्दी ठीक होने की संभावनाएं रहती है। डायलिसिस में चार घंटे का समय लगता है। किडनी रक्त को साफ करने का काम करती है और खराब तत्वों को यूरिन के माध्यम से बाहर निकालती है। मगर कई बार ब्लड यूरिन बढ़ जाता है, जिससे किडनी संबंधित बीमारियां बनती हैं। डायलिसिस से ब्लड यूरिया को नियंत्रित किया जाता है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत अन्य जिलों में खुले डायलिसिस केंद्रों पर औसतन एक हजार रुपये तक प्रति मरीज एक बार का शुल्क लिया जाता है, जबकि निजी केंद्रों में चार से छह हजार रुपये खर्च आता है।
सामान्य अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत डायलिसिस सेंटर और एमआरआई व सीटी स्कैन सेंटर शुरू किए जाएंगे। मुख्यालय से जगह संबंधित पत्र व्यवहार किया है। हमारे यहां मातृ-शिशु अस्पताल और सिविल अस्पताल में जगह है, जिसका जवाब दे दिया है। उम्मीद है कि इसी वर्ष में ये दोनों सेंटर शुरू हों।
- डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सिविल सर्जन स्वास्थ्य विभाग
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इसके लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों से जगह की उपलब्धता बारे पत्र व्यवहार किया गया। इसके जवाब में स्थानीय अधिकारियों ने मातृ-शिशु अस्पताल और ऊधम सिंह जैन सिविल अस्पताल में जगह दिखाई है। इस साल के अंत तक दोनों सेंटर शुरू होने की उम्मीद है। दोनों सेंटर बनने के बाद जिले के मरीजों को रोहतक, हिसार, दिल्ली के चक्कर नहीं लगाने होंगे और उन्हें यहीं पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलेगी। पीपीपी के तहत चरखी दादरी में पहले भी वर्ष 2018 में प्रयास हुए थे मगर योजना शुरू नहीं चढ़ी। अब एक बार फिर योजना पर काम शुरू हुआ है।
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एक हजार में डायलिसिस, ढाई हजार में होंगे सीटी स्कैन, एमआरआई
किडनी मरीजों को डायलिसिस की जरूरत होती है। जिले में सुविधा नहीं होने पर उन्हें पीजीआई रोहतक भागना पड़ता है या फिर हिसार, दिल्ली आदि बड़े शहरों में जाना पड़ता है। जहां जाने और इलाज पर छह से आठ हजार रुपये प्रति विजिट खर्च होता है। सामान्य अस्पताल में डायलिसिस सेंटर बनने के बाद यहां एक हजार रुपये तक में ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। यानी किराया और प्राइवेट अस्पताल के इलाज के खर्च से भी मुक्ति मिलेगी। सीटी स्कैन और एमआरआई की बात करें तो एमआरआई का निजी केंद्रों पर जो खर्च आता है पीपीपी में उससे करीब आधे यानि ढाई हजार रुपये में यह सुविधा मिल जाएगी।
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इन्हें मिलेगी निशुल्क सुविधा : पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में बीपीएल, एससी श्रेणी, आर्थिक रूप से पिछड़े, स्लम एरिया के मरीजों, सड़क हादसों में घायलों को डायलिसिस, सिटी स्कैन, एमएलआरआई की निशुल्क सुविधा मिलेगी। इसके लिए बाकायदा एक निजी कंपनी से एमओयू साइन किया जाएगा।
किसे होती है डायलिसिस की जरूरत
किडनी संबंधित मरीजों को डायलिसिस सप्ताह में तीन-चार की जाए तो मरीज के जल्दी ठीक होने की संभावनाएं रहती है। डायलिसिस में चार घंटे का समय लगता है। किडनी रक्त को साफ करने का काम करती है और खराब तत्वों को यूरिन के माध्यम से बाहर निकालती है। मगर कई बार ब्लड यूरिन बढ़ जाता है, जिससे किडनी संबंधित बीमारियां बनती हैं। डायलिसिस से ब्लड यूरिया को नियंत्रित किया जाता है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत अन्य जिलों में खुले डायलिसिस केंद्रों पर औसतन एक हजार रुपये तक प्रति मरीज एक बार का शुल्क लिया जाता है, जबकि निजी केंद्रों में चार से छह हजार रुपये खर्च आता है।
सामान्य अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत डायलिसिस सेंटर और एमआरआई व सीटी स्कैन सेंटर शुरू किए जाएंगे। मुख्यालय से जगह संबंधित पत्र व्यवहार किया है। हमारे यहां मातृ-शिशु अस्पताल और सिविल अस्पताल में जगह है, जिसका जवाब दे दिया है। उम्मीद है कि इसी वर्ष में ये दोनों सेंटर शुरू हों।
- डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सिविल सर्जन स्वास्थ्य विभाग