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Charkhi Dadri News: उपभोक्ता सेवा में दोषी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस को 5.01 लाख रुपये के भुगतान के आदेश

Fri, 08 May 2026 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Fri, 08 May 2026 12:52 AM IST
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Reliance General Insurance ordered to pay Rs 5.01 lakh for failing to provide consumer services
मंजीत सिंह नरयाल। - फोटो : 1
चरखी दादरी। दादरी के पूर्व विधायक और नेशनल एग्रीकल्चर एवं मार्केटिंग फेडरेशन (नैफेड) के तत्कालीन निदेशक जगजीत सिंह सांगवान का बार्सिलोना (स्पेन) एयरपोर्ट पर बैग चोरी मामले बीमा कंपनी को क्लेम खारिज करना महंगा पड़ गया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सेवा में कमी का दोषी मानते हुए रिलायंस जनरल इंश्योरेंस को 5,01,850 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि तकनीकी आधार पर जायज दावों को रोकना उपभोक्ता अधिकारों का हनन है।
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जगजीत सिंह सांगवान जून 2022 में नैफेड की आधिकारिक बैठक के लिए स्पेन गए थे। वहां से उन्हें अपने बच्चों से मिलने कनाडा और अमेरिका जाना था। इस यात्रा के लिए उन्होंने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस से कॉरपोरेट शॉर्ट-टर्म ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। उन्होंने उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग को दी शिकायत में बताया कि 21 जून 2022 को बार्सिलोना एयरपोर्ट पर उनका बैग चोरी हो गया। बैग में पासपोर्ट, दो मोबाइल फोन, कनाडा का वीजा, हवाई टिकट और करीब तीन हजार यूरो की नकदी सहित अन्य कीमती सामान था। इस संबंध में बार्सिलोना पुलिस को शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज करवाई और भारतीय दूतावास से संपर्क कर इमरजेंसी पासपोर्ट बनवाया। बैग चोरी की वजह से वे कनाडा की फ्लाइट नहीं ले सके और उन्हें अतिरिक्त खर्च कर भारत वापस आना पड़ा। भारत लौटने पर उन्होंने क्लेम के लिए सभी दस्तावेज बीमा कंपनी को सौंपे लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि शिकायतकर्ता ने चोरी हुए सामान की रसीदें पेश नहीं की हैं। यह नुकसान उपभोक्ता की लापरवाही के कारण हुआ है।
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आयोग ने कंपनी के तर्क को बताया अनुचित
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि जब व्यक्ति का पूरा बैग ही चोरी हो गया हो तो उसमें रखीं मूल रसीदें मांगना अनुचित तर्क है। पुलिस रिपोर्ट और दूतावास द्वारा जारी आपातकालीन पासपोर्ट इस बात का पुख्ता सबूत है कि चोरी की घटना वास्तविक थी। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने उपभोक्ता की मदद करने के बजाय यांत्रिक दृष्टिकोण अपनाया जो सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने बीमा कंपनी को पासपोर्ट खोने की एवज में 23,400 रुपये, सामान के नुकसान के लिए 78 हजार रुपये, सामान की देरी के लिए 7800 रुपये, यात्रा में देरी के लिए 12,450 रुपये और यात्रा रद्द होने के मद में 46,800 रुपये, वित्तीय आपातकाल सहायता के लिए 23,400 रुपये और चोरी हुए सामान के मूल्य के रूप में दो लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए। मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के मुआवजे के तौर पर एक लाख रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अलग से देने होंगे। कंपनी यह राशि 45 दिनों के भीतर अदा नहीं करती है तो उसे शिकायत दर्ज करने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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