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रामलीला : रावण-वेदवती के संवाद को दर्शकों ने सराहा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 12:12 AM IST
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Ramlila: Ravana-Vedvati's dialogue was appreciated by the audience
फोटो 08 रामलीला के दौरान रावण दरबार का मंचन करते कलाकार। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। पुराना शहर स्थित रामलीला ग्राउंड में चल रहे रामलीला मंचन के दूसरे दिन कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों का सजीन चित्रण किया। दूसरे दिन की लीला के दौरान मंगलवार रात रावण जन्म, ब्रह्मा से वरदान मांगना, नर व वानर को छोड़कर किसी अन्य के हाथों वध होने का वरदान मांगने समेत अन्य प्रसंग प्रस्तुत किए गए। लीला का मंचन प्रधान उमेद सिंह प्रजापत की अध्यक्षता में किया गया।
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सर्वप्रथम प्रथम पूज्य देव गणेश का पूजन करते हुए लीला में किसी भी तरह की विघ्न बाधा न आने देने की प्रार्थना की गई। उमेद सिंह प्रजापति ने बताया कि दूसरे दिन की लीला में विभीषण के भक्ति का वरदान मांगने, कुंभकर्ण का जीभ पर सरस्वती विराजमान होने और इंद्रासन के स्थान पर निंद्रासन मांगने, रावण का वेदवती पर मोहित होना, दोनों का संवाद, श्राप देना व मृत्यु का कारण बनना का भी कलाकारों ने मंचन किया। इसके अलावा रावण के यहां मेघनाथ का जन्म, इंद्र को जीतने के उपरांत इंद्रजीत नाम से विख्यात होना, उसके द्वारा ऋषि मुनियों को सताना और उनका खून निकालना व मुनियों के श्राप के भय से खून भरे कुंभ को राजा जनक के राज्य में कृष्ण की जमीन में दबा देना, अकाल के चलते राजा जनक द्वारा मुनियों के आदेश अनुसार खेतों में हल को चलाना, हल के फाल का दबे कुंभ से टकाराव व उसके उपरांत इससे माता सीता का जन्म होने तक की लीलाओं का दर्शकों के सामने मंचन किया गया।
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विशेष तौर रावण वेदवती संवाद को सराहा गया। इस दौरान राधेश्याम बीकानेरिया, भोजराज शास्त्री, चेयरमैन मनोज वर्मा, राहुल मराठा, वरिष्ठ उपप्रधान रिंपी फौगाट, उपप्रधान जयभगवान मस्ताना, रोहताश शर्मा, महासचिव राजकुमार बंसल, सचिव रवि फौगाट, कोषाध्यक्ष शिव कुमार शर्मा, सह कोषाध्यक्ष अखिलेश बंसल, स्टेज कवि राधेश्याम बीकानेरिया, भोजराज शास्त्री, डायरेक्टर हरीश गर्ग, स्टेज डायरेक्टर सुरेश ढाकलिया, हरिओम बंसल, कथा वाचक रोहताश गुप्ता, राजेश खंचाजी, प्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र शर्मा, स्टोर कीपर हनुमान प्रसाद, लीलाराम, पवन शर्मा, संदीप, राहुल शास्त्री, बबलू, अजय शर्मा, कृष्ण आदि मौजृद रहे।
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