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Charkhi Dadri News: तीसरे दिन भी पिचोपा कलां जोन में बंद रही माइनिंग, जिला खनन निरीक्षक से उलझे प्रदर्शनकारी
Wed, 04 Sep 2024 05:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 04 Sep 2024 05:13 AM IST
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जिला खनन अधिकारी को धरनास्थल से दूर ले जाते पुलिसकर्मी। स्रोत: सूत्र
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पुलिस कर्मी सुरक्षा घेरा बनाकर जिला खनन अधिकारी को ले गए धरनास्थल से दूर, धरने को समर्थन देने मंगलवार को पहुंचे कई अधिवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। माइनिंग कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का धरना मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। पूरे जोन में ग्रामीणों ने माइनिंग गतिविधियों को बंद करवाए रखा और नारेबाजी कर रोष जाहिर किया। वहीं, धरनास्थल पर पहुंचे जिला खनन निरीक्षक कोमल कुमार से प्रदर्शनकारी खेमा उलझ गया। पुलिसकर्मी सुरक्षा घेरा बनाकर खनन निरीक्षक को धरनास्थल से दूर ले गए।
मंगलवार को संजीव तक्षक की अगुवाई में कई अधिवक्ता धरने को समर्थन देने पिचोपा कलां माइनिंग जोन पहुंचे। संजीव तक्षक ने बताया कि पिछले तीन दिनों से गांव पिचौंपा कलां में अलग-अलग मांगों को लेकर ग्रामीण माइनिंग कंपनियों के खिलाफ धरना दे रहे हैं। इसके चलते माइनिंग भी बंद है। प्रदर्शनकारी खेमे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अवैध माइनिंग और भूजल का दोहन रोकना आपकी जायज मांगें हैं। मुआवजा भी महत्वपूर्ण मुद्दा है।
संजीव तक्षक ने कहा कि 8-10 वर्षो में अवैध माइनिंग व खनन समेत ओवरलोडिंग रोकने के लिए कई बार आंदोलन किए गए। इनसे जुड़े अधिकारियों व नेताओं का डटकर विरोध भी किया है। माइनिंग कंपनियों ने इससे पहले भी अधिकारियों व अन्य लोगों से सांठगांठ कर गांवों का उचित मुआवजा हड़पा है।
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कहा कि प्रशासन को मुआवजा दिलाने के साथ संबंधित कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर केस भी दर्ज करवाने चाहिए। भूजल दोहन पहाड़ी क्षेत्र के नजदीक गांवों की आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा खतरा है क्योंकि इन गांवों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है।
- डीसी की सिफारिश पर नहीं किया गया गौर
अधिवक्ताओं ने बताया कि कष्ट निवारण समिति की बैठक में उन्होंने मुद्दा उठाया तो डीसी की अगुवाई में गठित कमेटी ने अवैध माइनिंग व भूजल दोहन की जांच कर रिपोर्ट तैयार करवाई। इसके बाद माइनिंग कंपनियों पर कार्रवाई के लिए तत्कालीन डीसी मनदीप कौर ने रिपोर्ट के साथ कार्रवाई की सिफारिश मुख्यालय भेजी, लेकिन, मामला रफा-दफा कर दिया गया।
रामलवास के ग्रामीण भी परेशान
धरने को समर्थन देने पहुंचे अधिवक्ताओं ने बताया कि रामलवास के ग्रामीण भी लगातार उपायुक्त व जिला खनन अधिकारी से मुलाकात कर रहे हैं, लेकिन, अधिकारियों की मिलीभगत होने के कारण अवैध माइनिंग व भूजल दोहन पर रोक नहीं लग पा रही।
- बुधवार को सरकार व एनजीटी को भेजी जाएगी शिकायत
धरनास्थल पर प्रदर्शनकारी खेमा ने बुधवार को एनजीटी व सरकार को शिकायत भेजने का फैसला लिया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर इस संबंध में जल्द ही कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो जिले के सभी प्रभावित गांवों के लोगों के साथ जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
- ये रहे मौजूद
धरनास्थल पर पूर्व सरपंच बलमत, डाॅ. राजेंद्र, विजय सिंह, सूरजभान, रोहताश, रामधन नंबरदार, राजेश, बिजेंद्र, सोनू नंबरदार, सतपाल, कुलदीप, दलबीर, रघबीर, सत्यवीर ठेकेदार व भीम सिंह आदि मौजूद रहे।
फोटो 16
पिचोपा कलां में धरनास्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारी खेमा। स्रोत : स्वयं
फोटो 17
जिला खनन अधिकारी को धरनास्थल से दूर ले जाते पुलिसकर्मी। स्रोत : सूत्र
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चरखी दादरी। माइनिंग कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का धरना मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। पूरे जोन में ग्रामीणों ने माइनिंग गतिविधियों को बंद करवाए रखा और नारेबाजी कर रोष जाहिर किया। वहीं, धरनास्थल पर पहुंचे जिला खनन निरीक्षक कोमल कुमार से प्रदर्शनकारी खेमा उलझ गया। पुलिसकर्मी सुरक्षा घेरा बनाकर खनन निरीक्षक को धरनास्थल से दूर ले गए।
मंगलवार को संजीव तक्षक की अगुवाई में कई अधिवक्ता धरने को समर्थन देने पिचोपा कलां माइनिंग जोन पहुंचे। संजीव तक्षक ने बताया कि पिछले तीन दिनों से गांव पिचौंपा कलां में अलग-अलग मांगों को लेकर ग्रामीण माइनिंग कंपनियों के खिलाफ धरना दे रहे हैं। इसके चलते माइनिंग भी बंद है। प्रदर्शनकारी खेमे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अवैध माइनिंग और भूजल का दोहन रोकना आपकी जायज मांगें हैं। मुआवजा भी महत्वपूर्ण मुद्दा है।
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संजीव तक्षक ने कहा कि 8-10 वर्षो में अवैध माइनिंग व खनन समेत ओवरलोडिंग रोकने के लिए कई बार आंदोलन किए गए। इनसे जुड़े अधिकारियों व नेताओं का डटकर विरोध भी किया है। माइनिंग कंपनियों ने इससे पहले भी अधिकारियों व अन्य लोगों से सांठगांठ कर गांवों का उचित मुआवजा हड़पा है।
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कहा कि प्रशासन को मुआवजा दिलाने के साथ संबंधित कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर केस भी दर्ज करवाने चाहिए। भूजल दोहन पहाड़ी क्षेत्र के नजदीक गांवों की आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा खतरा है क्योंकि इन गांवों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है।
- डीसी की सिफारिश पर नहीं किया गया गौर
अधिवक्ताओं ने बताया कि कष्ट निवारण समिति की बैठक में उन्होंने मुद्दा उठाया तो डीसी की अगुवाई में गठित कमेटी ने अवैध माइनिंग व भूजल दोहन की जांच कर रिपोर्ट तैयार करवाई। इसके बाद माइनिंग कंपनियों पर कार्रवाई के लिए तत्कालीन डीसी मनदीप कौर ने रिपोर्ट के साथ कार्रवाई की सिफारिश मुख्यालय भेजी, लेकिन, मामला रफा-दफा कर दिया गया।
रामलवास के ग्रामीण भी परेशान
धरने को समर्थन देने पहुंचे अधिवक्ताओं ने बताया कि रामलवास के ग्रामीण भी लगातार उपायुक्त व जिला खनन अधिकारी से मुलाकात कर रहे हैं, लेकिन, अधिकारियों की मिलीभगत होने के कारण अवैध माइनिंग व भूजल दोहन पर रोक नहीं लग पा रही।
- बुधवार को सरकार व एनजीटी को भेजी जाएगी शिकायत
धरनास्थल पर प्रदर्शनकारी खेमा ने बुधवार को एनजीटी व सरकार को शिकायत भेजने का फैसला लिया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर इस संबंध में जल्द ही कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो जिले के सभी प्रभावित गांवों के लोगों के साथ जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
- ये रहे मौजूद
धरनास्थल पर पूर्व सरपंच बलमत, डाॅ. राजेंद्र, विजय सिंह, सूरजभान, रोहताश, रामधन नंबरदार, राजेश, बिजेंद्र, सोनू नंबरदार, सतपाल, कुलदीप, दलबीर, रघबीर, सत्यवीर ठेकेदार व भीम सिंह आदि मौजूद रहे।
फोटो 16
पिचोपा कलां में धरनास्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारी खेमा। स्रोत : स्वयं
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जिला खनन अधिकारी को धरनास्थल से दूर ले जाते पुलिसकर्मी। स्रोत : सूत्र