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Charkhi Dadri News: लोगों के स्वास्थ्य के साथ खेल, पानी का हर तीसरा नमूना फेल
Fri, 15 Mar 2024 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 15 Mar 2024 12:54 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जिस पानी की आपूर्ति हो रही है, वह सेहत के लिहाज से सही नहीं है। पिछले एक साल की बात करें तो जिले से 4663 पानी के नमूने लिए गए हैं, जिनमें से 1456 की रिपोर्ट फेल मिली है। विशेषज्ञों की मानें तो जो सैंपल फेल हैं, उनमें कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की अधिकता और क्लोरिन की कमी पाई गई है। कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का आंतों पर सबसे अधिक प्रभाव है।
जनवरी 2024 से पहले जिले से पेयजल नमूने लेने का काम जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी करते थे। अब ये काम जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय स्थित प्रयोगशाला स्टाफ को सौंपा गया है। जनवरी के बाद से नमूने लेने का कार्य तेज हुआ है और निर्धारित अवधि से 24 दिन पहले ही 150 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया। लक्ष्य की बात करें तो एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक 3600 नमूने लेने थे, लेकिन 7 मार्च 2024 को ही 4663 नमूने ले लिए।
टीमों ने पानी के नमूने बाढड़ा, चरखी दादरी-1, चरखी दादरी-2 और झोझूकलां सब डिविजन से लिए हैं। बाढड़ा सब डिविजन के 27.69, दादरी सब डिविजन-1 के 53.96 प्रतिशत, दादरी सब डिविजिन-2 के 45.87 और झोझूकलां सब डिविजन के सर्वाधिक 55.64 प्रतिशत नमूने फेल आए हैं। ओवरऑल फेल प्रतिशत करीब 31 प्रतिशत है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दादरी सब डिविजन-1 और झोझूकलां में हर दूसरा नमूना फेल मिला है।
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जानिये...किस डिविजन से लिए कितने सैंपल और कितने आए फेल
डिविजन - कुल सैंपल - सही मिले - फेल मिले
बाढड़ा - 634 - 393 - 241
दादरी-1 - 1237 - 784 - 453
दादरी-2 - 748 - 460 - 288
झोझूकलां - 985 - 612 - 373
रिपोर्ट फेल आने पर दोबारा लिया जाता है नमूना
प्रयोगशाला में तैनात रासायनिक वैज्ञानिक सुधीर चौधरी ने बताया कि अगर किसी पानी के नमूने की रिपोर्ट फेल आती है तो वहां पहुंचकर टीम दोबारा पानी का सैंपल लेती है। जब तक गुणवत्ता में सुधार नहीं हो जाए, तब तक सैंपल प्रक्रिया जारी रहती है।
घातक है दूषित पानी का सेवन
रासायनिक वैज्ञानिक डॉ. सुधीर चौधरी ने बताया कि कई रिजर्व टैंकों के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरियां मिला है। इस बैक्टीरिया युक्त पानी के सेवन से लोग आंतों के रोग, किडनी रोग, आंखों से संबंधित रोग, लीवर व लकवा आदि बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।
पहले 300 तो अब लिए जाएंगे हर माह 400 नमूने
पहले एक माह में पानी के 300 नमूने लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब हर माह 400 नमूने लिए जाएंगे। इस लिहाज से कर्मचारियों को एक साल में अब 3600 के बजाय 4800 सैंपल लेने होंगे।
एक अप्रैल 2023 से 7 मार्च 2024 तक 4663 पानी के नमूनों की जांच की गई है। इनमें से 3207 सही पाए गए, जबकि 1456 फेल पाए गए। फेल पाए गए नमूनों में क्लोरिन की कमी और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की अधिकता पाई गई है। जिन जगहों के पानी के नमूने फेल आए हैं, वहां से दोबारा नमूने लिए जाएंगे। श्र डॉ. सुधीर चौधरी, रासायनिक वैज्ञानिक, जनस्वास्थ्य विभाग इंजीनियरिंग शाखा (प्रयोगशाला)
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चरखी दादरी। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जिस पानी की आपूर्ति हो रही है, वह सेहत के लिहाज से सही नहीं है। पिछले एक साल की बात करें तो जिले से 4663 पानी के नमूने लिए गए हैं, जिनमें से 1456 की रिपोर्ट फेल मिली है। विशेषज्ञों की मानें तो जो सैंपल फेल हैं, उनमें कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की अधिकता और क्लोरिन की कमी पाई गई है। कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का आंतों पर सबसे अधिक प्रभाव है।
जनवरी 2024 से पहले जिले से पेयजल नमूने लेने का काम जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी करते थे। अब ये काम जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय स्थित प्रयोगशाला स्टाफ को सौंपा गया है। जनवरी के बाद से नमूने लेने का कार्य तेज हुआ है और निर्धारित अवधि से 24 दिन पहले ही 150 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया। लक्ष्य की बात करें तो एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक 3600 नमूने लेने थे, लेकिन 7 मार्च 2024 को ही 4663 नमूने ले लिए।
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टीमों ने पानी के नमूने बाढड़ा, चरखी दादरी-1, चरखी दादरी-2 और झोझूकलां सब डिविजन से लिए हैं। बाढड़ा सब डिविजन के 27.69, दादरी सब डिविजन-1 के 53.96 प्रतिशत, दादरी सब डिविजिन-2 के 45.87 और झोझूकलां सब डिविजन के सर्वाधिक 55.64 प्रतिशत नमूने फेल आए हैं। ओवरऑल फेल प्रतिशत करीब 31 प्रतिशत है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दादरी सब डिविजन-1 और झोझूकलां में हर दूसरा नमूना फेल मिला है।
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जानिये...किस डिविजन से लिए कितने सैंपल और कितने आए फेल
डिविजन - कुल सैंपल - सही मिले - फेल मिले
बाढड़ा - 634 - 393 - 241
दादरी-1 - 1237 - 784 - 453
दादरी-2 - 748 - 460 - 288
झोझूकलां - 985 - 612 - 373
रिपोर्ट फेल आने पर दोबारा लिया जाता है नमूना
प्रयोगशाला में तैनात रासायनिक वैज्ञानिक सुधीर चौधरी ने बताया कि अगर किसी पानी के नमूने की रिपोर्ट फेल आती है तो वहां पहुंचकर टीम दोबारा पानी का सैंपल लेती है। जब तक गुणवत्ता में सुधार नहीं हो जाए, तब तक सैंपल प्रक्रिया जारी रहती है।
घातक है दूषित पानी का सेवन
रासायनिक वैज्ञानिक डॉ. सुधीर चौधरी ने बताया कि कई रिजर्व टैंकों के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरियां मिला है। इस बैक्टीरिया युक्त पानी के सेवन से लोग आंतों के रोग, किडनी रोग, आंखों से संबंधित रोग, लीवर व लकवा आदि बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।
पहले 300 तो अब लिए जाएंगे हर माह 400 नमूने
पहले एक माह में पानी के 300 नमूने लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब हर माह 400 नमूने लिए जाएंगे। इस लिहाज से कर्मचारियों को एक साल में अब 3600 के बजाय 4800 सैंपल लेने होंगे।
एक अप्रैल 2023 से 7 मार्च 2024 तक 4663 पानी के नमूनों की जांच की गई है। इनमें से 3207 सही पाए गए, जबकि 1456 फेल पाए गए। फेल पाए गए नमूनों में क्लोरिन की कमी और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की अधिकता पाई गई है। जिन जगहों के पानी के नमूने फेल आए हैं, वहां से दोबारा नमूने लिए जाएंगे। श्र डॉ. सुधीर चौधरी, रासायनिक वैज्ञानिक, जनस्वास्थ्य विभाग इंजीनियरिंग शाखा (प्रयोगशाला)