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विमान हादसे में जान गंवाने वाले 349 लोगों की स्मृति में स्मारक और पर्यटन स्थल बनाने की योजना ठंडे बस्ते में
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चरखी दादरी। 26 साल पहले चरखी दादरी में हुए विमान हादसे में जान गंवाने वाले 349 लोगों की याद में स्मारक और पर्यटन स्थल बनाने की योजना ठंडे बस्ते में हैं। मार्च 2021 में तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल ने अधिकारियों को इसका प्रपोजल तैयार करने के आदेश दिए थे, लेकिन डीसी बदलते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया। तत्कालीन डीसी की अगर यह योजना सिरे चढ़ती तो जिले में एक अच्छा पर्यटन स्थल तैयार होता और यहां विदेशी पर्यटक भी आते। वहीं, मौजूदा डीसी प्रीति का कहना है कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई फाइल नहीं आई है।
बता दें कि 12 नवंबर 1996 को हुए विमान हादसे में सऊदी अरब, भारत, पाकिस्तान, नेपाल और अमेरिका के 349 लोगों की मौत हुई थी। उस दौरान एक मालवाहक जहाज यात्री जहाज से टकराया गया था और एक विमान टिकान कलां के समीप तो दूसरा बिरोहड़ के पास गिरा था। यह विश्व के बड़े विमान हादसों में से एक है।
इस हादसे के करीब साढ़े 24 साल बाद तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल ने विमान हादसे में मारे गए देश और विदेशों के नागरिकों की स्मृति में स्मारक और पर्यटन स्थल बनाने का प्रपोजल तैयार करने के आदेश दिए थे। यहां जिला मिनरल फंड से इस स्मारक का निर्माण कराया जाना था। यहां तक कि उस दौरान डीसी के आदेश पर एसडीएम मौका देखने भी गए थे, लेकिन इसके कुछ समय बाद ही तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल का तबादला हो गया था और इसके बाद से ही यह प्रपोजल ठंडे बस्ते में है। तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल के बाद जिले के तीन डीसी बदल चुके हैं, लेकिन न किसी डीसी ने और न ही अन्य अधिकारियों ने इस ओर ध्यान दिया। अगर योजना धरातल पर सिरे चढ़ती है तो फिर जिले में एक बेहतर पर्यटन स्थल तैयार हो जाएगा। बता दें कि जिला में इस समय पर्यटन स्थल की कमी खल रही है।
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15 से 20 एकड़ जमीन की थी जरूरत
तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल की योजना के अनुसार स्मारक और पर्यटन स्थल निर्माण के लिए 15 से 20 एकड़ जमीन की दरकार थी। तत्कालीन एसडीएम विरेंद्र सिंह को स्मारक स्थल के लिए जगह तलाशने के आदेश दिए गए थे और उस दौरान एसडीएम जमीन चिह्नित करने के लिए मौका देखने भी गए थे। इसके बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
जो जहाज दुर्घटनाग्रस्त हुए थे उनमें एक सऊदी अरब तो दूसरा कजाकिस्तान एयरलाइंस का था।
ये था स्मारक निर्माण का मकसद
यह हवाई दुर्घटना दुनिया की प्रमुख हवाई दुर्घटनाओं में से एक है। इसके बावजूद हादसे में मारे गए लोगों की स्मृति में यहां कोई स्मारक नहीं है जिससे कि उस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजन यहां आकर अपने प्रियजनों को श्रद्धांजलि दे सकें। ऐसे में तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल ने हवाई दुर्घटना में मारे गए लोगों की याद में एक स्मारक स्थल बनाने की योजना बनाई थी।
ग्रामीण बोले: मृतकों के परिजन कई बार आ चुके घटनास्थल पर
विमान हादसे में जाने गंवाने विदेश नागरिकों में से कुछ के परिजन तो दो या तीन साल में घटना स्थल पर श्रद्धांजलि देने आते हैं। कभी-कभार तो वो एक या दो दिन रुक कर जाते हैं और मेहमानवाजी से काफी खुश होते हैं।
अजीत, टिकान कलां
यह हादसा काफी दुखद था। जहाज गिरने से खेत में काफी गहरा गड्ढा हो गया था और हर तरफ लाश ही लाश थी। विमान हादसे में मारे गए लोगों की स्मृति में प्रशासन को कुछ ऐसी चीज बनानी चाहिए जो काम आ सके।
सुरेश, टिकान कलां
मृतकों के परिजनों को निशुल्क हवाई यात्रा करवाना भी था योजना का हिस्सा
स्मारक निर्माण के बाद विमान हादसे में मारे गए लोगों के परिवार वालों को स्मारक पर आने के लिए निशुल्क हवाई यात्रा करवाने का अनुरोध भी तत्कालीन डीसी की योजना का हिस्सा था। योजना के डेढ़ साल बाद भी मामला ठंडे बस्ते में है और दादरी जिले में पर्यटन स्थल की कमी खल रही है।
मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और न ही ऐसी कोई फाइल अब तक मेरे सामने आई है। अगर ऐसा है तो मैं स्टाफ से अपडेट लूंगी।
प्रीति, डीसी, चरखी दादरी
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बता दें कि 12 नवंबर 1996 को हुए विमान हादसे में सऊदी अरब, भारत, पाकिस्तान, नेपाल और अमेरिका के 349 लोगों की मौत हुई थी। उस दौरान एक मालवाहक जहाज यात्री जहाज से टकराया गया था और एक विमान टिकान कलां के समीप तो दूसरा बिरोहड़ के पास गिरा था। यह विश्व के बड़े विमान हादसों में से एक है।
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इस हादसे के करीब साढ़े 24 साल बाद तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल ने विमान हादसे में मारे गए देश और विदेशों के नागरिकों की स्मृति में स्मारक और पर्यटन स्थल बनाने का प्रपोजल तैयार करने के आदेश दिए थे। यहां जिला मिनरल फंड से इस स्मारक का निर्माण कराया जाना था। यहां तक कि उस दौरान डीसी के आदेश पर एसडीएम मौका देखने भी गए थे, लेकिन इसके कुछ समय बाद ही तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल का तबादला हो गया था और इसके बाद से ही यह प्रपोजल ठंडे बस्ते में है। तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल के बाद जिले के तीन डीसी बदल चुके हैं, लेकिन न किसी डीसी ने और न ही अन्य अधिकारियों ने इस ओर ध्यान दिया। अगर योजना धरातल पर सिरे चढ़ती है तो फिर जिले में एक बेहतर पर्यटन स्थल तैयार हो जाएगा। बता दें कि जिला में इस समय पर्यटन स्थल की कमी खल रही है।
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15 से 20 एकड़ जमीन की थी जरूरत
तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल की योजना के अनुसार स्मारक और पर्यटन स्थल निर्माण के लिए 15 से 20 एकड़ जमीन की दरकार थी। तत्कालीन एसडीएम विरेंद्र सिंह को स्मारक स्थल के लिए जगह तलाशने के आदेश दिए गए थे और उस दौरान एसडीएम जमीन चिह्नित करने के लिए मौका देखने भी गए थे। इसके बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
जो जहाज दुर्घटनाग्रस्त हुए थे उनमें एक सऊदी अरब तो दूसरा कजाकिस्तान एयरलाइंस का था।
ये था स्मारक निर्माण का मकसद
यह हवाई दुर्घटना दुनिया की प्रमुख हवाई दुर्घटनाओं में से एक है। इसके बावजूद हादसे में मारे गए लोगों की स्मृति में यहां कोई स्मारक नहीं है जिससे कि उस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजन यहां आकर अपने प्रियजनों को श्रद्धांजलि दे सकें। ऐसे में तत्कालीन डीसी राजेश जोगपाल ने हवाई दुर्घटना में मारे गए लोगों की याद में एक स्मारक स्थल बनाने की योजना बनाई थी।
ग्रामीण बोले: मृतकों के परिजन कई बार आ चुके घटनास्थल पर
विमान हादसे में जाने गंवाने विदेश नागरिकों में से कुछ के परिजन तो दो या तीन साल में घटना स्थल पर श्रद्धांजलि देने आते हैं। कभी-कभार तो वो एक या दो दिन रुक कर जाते हैं और मेहमानवाजी से काफी खुश होते हैं।
अजीत, टिकान कलां
यह हादसा काफी दुखद था। जहाज गिरने से खेत में काफी गहरा गड्ढा हो गया था और हर तरफ लाश ही लाश थी। विमान हादसे में मारे गए लोगों की स्मृति में प्रशासन को कुछ ऐसी चीज बनानी चाहिए जो काम आ सके।
सुरेश, टिकान कलां
मृतकों के परिजनों को निशुल्क हवाई यात्रा करवाना भी था योजना का हिस्सा
स्मारक निर्माण के बाद विमान हादसे में मारे गए लोगों के परिवार वालों को स्मारक पर आने के लिए निशुल्क हवाई यात्रा करवाने का अनुरोध भी तत्कालीन डीसी की योजना का हिस्सा था। योजना के डेढ़ साल बाद भी मामला ठंडे बस्ते में है और दादरी जिले में पर्यटन स्थल की कमी खल रही है।
मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और न ही ऐसी कोई फाइल अब तक मेरे सामने आई है। अगर ऐसा है तो मैं स्टाफ से अपडेट लूंगी।
प्रीति, डीसी, चरखी दादरी