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जिले के सबसे कम उम्र के शहीद जवान गनर भूपेंद्र की अंतिम यात्रा में उमड़ा लोगों का हुजूम

Wed, 09 Sep 2020 11:45 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 09 Sep 2020 11:45 PM IST
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People gathered in last visit of Gunner Bhupendra, the youngest martyr of the district
जम्मू-कश्मीर के नौगाम में पाकिस्तान की तरफ से की गई फायरिंग में गत पांच सितंबर को शहीद हुए बांस गांव निवासी गनर भूपेंद्र सिंह की अंतिम यात्रा में लोगों का हुजूम उमड़ा। जिले के अधिकारियों समेत राजनेता और दूसरे जिलों के लोग शहीद को नमन करने बांस गांव में पहुंचे। बांस गांव में यह पहली शहादत है, जबकि जिले का 117वां जवान शहीद हुआ है। इसकी पुष्टि सैनिक कल्याण बोर्ड के अधिकारी की तरफ से की गई है। भूपेंद्र सिंह वीरगति प्राप्त करने वाले जिले के सैनिकों में सबसे कम उम्र के हैं।
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ढाई हजार की आबादी वाले बांस गांव के लोग अपने लाडले के अंतिम दर्शन के लिए एकजुट नजर आए। सुबह करीब पांच बजे ही ग्रामीण शहीद के घर पहुंचना शुरू हो गए। पिता मलखान सिंह और छोटे भाई दीपक के चेहरे पर परिवार के लाडले को खोने का गम दिख रहा था। हालांकि दोनों ने अपने आंसुओं को न केवल रोके रखा, बल्कि अन्य परिजनों का भी ढाढ़स बंधाते नजर आए।
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सुबह 7 बजे पहुंचने शुरू हो गए अधिकारी व राजनेता
बुधवार सुबह 7:05 बजे तहसीलदार अजय सैनी बांस गांव पहुंचे। इसके एक घंटे बाद डीसी शिवप्रसाद शर्मा और एसपी बलवान सिंह राणा भी पहुंच गए। दोनों प्रशासनिक अधिकारी पहले शहीद के घर पहुंचे। इसके बाद सैन्य अधिकारियों और परिजनों के साथ अंतिम संस्कार वाली जगह पर की गई व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे। पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान के अलावा भाजपा जिला अध्यक्ष सतेंद्र सिंह परमार, कांग्रेस प्रदेश सचिव अजीत सिंह फौगाट भी शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारियों के अनुसार गनर भूपेंद्र सिंह की जिले में 117वीं शहादत है। इनमें से सात कारगिल शहीद हैं। भूपेंद्र सिंह शहादत देने वाले जिले के सबसे कम उम्र के सैनिक भी हैं।
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युवा बोले : शहीद के नाम पर रखा जाए स्टेडियम व स्कूल का नाम
शहीद भूपेंद्र सिंह के दोस्त एवं बांस गांव निवासी संदीप कौशिक ने बताया कि भूपेंद्र की शहादत गांव के लिए फख्र की बात है। युवाओं की मांग है कि सरकार गांव के राजकीय स्कूल और खेल स्टेडियम का नामकरण शहीद भूपेंद्र सिंह के नाम से करे।
पिता बोले - अब छोटे बेटे को भी भेजूंगा सेना में
शहीद के पिता मलखान सिंह ने कहा कि उन्हें बड़े बेटे भूपेंद्र की शहादत पर गर्व है। भगवान हर जन्म में उन्हें ऐसा बेटा ही दें। उन्होंने कहा कि छोटे बेटे दीपक को भी वो सेना में भेजेंगे।
पांच सितंबर की सुबह पत्नी रेखा से हुई थी शहीद भूपेंद्र की बात
शहीद के साले सोमबीर ने बताया कि पांच सितंबर की सुबह भूपेंद्र ने अपनी पत्नी रेखा से फोन पर बातचीत की थी। इसके बाद रेखा मायके झिंझर आ गई थी। वे वहां मंदिर जाने के लिए घर से निकले थे और इसी दौरान शहादत की खबर पहुंच गई। इसके बाद रेखा को बीच रास्ते से ही घर वापस बुला लिया। सोमबीर ने बताया कि उसकी बहन रेखा को उन्होंने शाम को शहादत की बात बताई। सोमबीर ने बताया कि वह भी सेना में है और उनकी पोस्टिंग मेरठ में है।

छोटे से गांव बांस ने देश को दिए 60 सैनिक
बांस गांव के ग्रामीणों ने बताया कि भूपेंद्र से पहले गांव में कोई शहादत नहीं हुई। फिलहाल गांव के करीब 60 युवा सेना में सेवा दे रहे हैं। बांस गांव की आबादी करीब ढाई हजार है। इसमें करीब 400 घर हैं और ज्यादातर परिवारों का व्यवसाय कृषि है।

People gathered in last visit of Gunner Bhupendra, the youngest martyr of the district

People gathered in last visit of Gunner Bhupendra, the youngest martyr of the district- फोटो : CharkhiDadri

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