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नागरिक अस्पताल में डेढ़ साल से बंद ओटी जल्द होगी शुरू, सामान के लिए मुख्यालय भेजी डिमांड
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जिले में पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ी ऑपरेशन सुविधा फिर से शुरू होने वाली है। दो एनेस्थेटिक की तैनाती के साथ स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. सुदर्शन पंवार को चरखी दादरी सीएमओ नियुक्त किया है और वो सर्जन भी हैं। डॉ. सुदर्शन करीब 45 हजार ऑपरेशन कर चुके हैं। दादरी सीएमओ का पदभार संभालने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि जल्द ही सिविल अस्पताल में ऑपरेशन सेवा शुरू कर दी जाएगी। ओटी (ऑपरेशन थिएटर) में जिला मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर सभी प्रकार की सर्जरी की जाएंगी।
सिविल अस्पताल पर 172 गांवों की आबादी निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए तीन सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और 14 पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। यहां संसाधनों के अलावा चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की कमी बनी हुई है। इसके कारण मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। जिला अस्पताल में दो साल से सर्जन के पद खाली पड़े थे, जिन पर गत जुलाई में ही तैनाती हुई है। हाल ही में बतौर सीएमओ ज्वाइन करने वाले सुदर्शन पंवार भी सर्जन हैं। प्रदेश में सबसे अधिक सर्जरी करने के मामले में वे सरकारी चिकित्सकों में सबसे आगे चल रहे हैं। उन्होंने जल्द ही ऑपरेशन थिएटर शुरू करने का दावा किया है।
डॉ. पंवार ने कहा कि अस्पताल में ऑपरेशन शुरू करने के लिए ओटी के सामान की डिमांड हेड ऑफिस भेजी गई है, लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली है। जल्द ही सिविल अस्पताल में आंखों के अलावा सामान्य ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे। इसके लिए डिमांड हेड ऑफिस भेजी जा चुकी है।
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एक माह में आंखों के ऑपरेशन के 200 मरीज किए जाते हैं रेफर
जिला अस्पताल में आंखों का विशेषज्ञ पिछले लंबे समय से नहीं है। इसके चलते मरीजों को भिवानी या पीजीआई रेफर किया जाता है। एक माह में सिविल अस्पताल से आंखों के ऑपरेशन के 200 मरीज रेफर किए जाते हैं। ओटी शुरू होने के बाद आंखों के सभी प्रकार के ऑपरेशन यहीं शुरू कर दिए जाएंगे।
पांच से 25 हजार है आंखों के ऑपरेशन का खर्च
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञ की कमी के चलते सिविल अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन की सुविधा बंद पड़ी है। दूसरे जिलों के सिविल अस्पताल में जाने की बजाय ज्यादातर मरीज प्राइवेट अस्पतालों में जाकर ऑपरेशन करवा लेते हैं। प्राइवेट अस्पताल में पांच से 25 हजार तक ऑपरेशन की एवज में मरीज को चुकाने पड़ते हैं।
हादसों में घायल 150 लोगों को किया जाता है एक माह में रेफर
जिले में एक दिन में औसतन तीन से चार लोग अलग-अलग हादसों में घायल होकर सिविल अस्पताल पहुंचते हैं। यहां प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद उन्हें भिवानी सिविल अस्पताल या रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। एक माह में हादसों में घायल 150 लोगों को सिविल अस्पताल से अन्य जिला अस्पतालों में रेफर किया जाता है। अगर सिविल अस्पताल में ऑपरेशन सुविधा हो तो दुर्घटनाओं में घायल लोगों के ऑपरेशन यहीं किए जा सकते हैं।
150 सामान्य ऑपरेशन होते हैं एक माह में
जिला अस्पताल में करीब दो साल पहले तक ऑपरेशन की सुविधा थी। उस समय फोडा, फुंसी व अन्य प्रकार के एक माह में करीब 150 ऑपरेशन होते थे। इस समय ज्यादातर मरीजों को भिवानी भेजा जा रहा है। इसके चलते मरीज और तीमारदारों को 60 किलोमीटर की दूरी तय कर ऑपरेशन करवाना पड़ रहा है।
सीएमओ सुदर्शन पंवार से सीधी बातचीत
सवाल: जिले में ऑपरेशन सुविधा पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ी है?
जवाब: जिले में लंबे समय तक सर्जन का पद खाली रहा है। अब जरनल और आंखों का सर्जन की तैनाती हो चुकी है और जल्द ही ओटी शुरू कर देंगे।
सवाल: दो सर्जन पहले ही मिल चुके हैं तो ओटी शुरू करने में और क्या जरूरत है?
जवाब: उपकरणों की खरीद की डिमांड सरकार को भेज रखी है और खरीद प्रक्रिया के बाद ही ओटी शुरू कर पाएंगे।
सवाल: क्या सिविल अस्पताल में आंखों की ओपीडी शुरू है?
जवाब: आंखों के विशेषज्ञ की तैनाती होते ही हमने व्यवस्था कर आंखों की ओपीडी शुरू करवा दी थी। मरीज आ भी रहे हैं।
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सिविल अस्पताल पर 172 गांवों की आबादी निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए तीन सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और 14 पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। यहां संसाधनों के अलावा चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की कमी बनी हुई है। इसके कारण मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। जिला अस्पताल में दो साल से सर्जन के पद खाली पड़े थे, जिन पर गत जुलाई में ही तैनाती हुई है। हाल ही में बतौर सीएमओ ज्वाइन करने वाले सुदर्शन पंवार भी सर्जन हैं। प्रदेश में सबसे अधिक सर्जरी करने के मामले में वे सरकारी चिकित्सकों में सबसे आगे चल रहे हैं। उन्होंने जल्द ही ऑपरेशन थिएटर शुरू करने का दावा किया है।
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डॉ. पंवार ने कहा कि अस्पताल में ऑपरेशन शुरू करने के लिए ओटी के सामान की डिमांड हेड ऑफिस भेजी गई है, लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली है। जल्द ही सिविल अस्पताल में आंखों के अलावा सामान्य ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे। इसके लिए डिमांड हेड ऑफिस भेजी जा चुकी है।
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एक माह में आंखों के ऑपरेशन के 200 मरीज किए जाते हैं रेफर
जिला अस्पताल में आंखों का विशेषज्ञ पिछले लंबे समय से नहीं है। इसके चलते मरीजों को भिवानी या पीजीआई रेफर किया जाता है। एक माह में सिविल अस्पताल से आंखों के ऑपरेशन के 200 मरीज रेफर किए जाते हैं। ओटी शुरू होने के बाद आंखों के सभी प्रकार के ऑपरेशन यहीं शुरू कर दिए जाएंगे।
पांच से 25 हजार है आंखों के ऑपरेशन का खर्च
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञ की कमी के चलते सिविल अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन की सुविधा बंद पड़ी है। दूसरे जिलों के सिविल अस्पताल में जाने की बजाय ज्यादातर मरीज प्राइवेट अस्पतालों में जाकर ऑपरेशन करवा लेते हैं। प्राइवेट अस्पताल में पांच से 25 हजार तक ऑपरेशन की एवज में मरीज को चुकाने पड़ते हैं।
हादसों में घायल 150 लोगों को किया जाता है एक माह में रेफर
जिले में एक दिन में औसतन तीन से चार लोग अलग-अलग हादसों में घायल होकर सिविल अस्पताल पहुंचते हैं। यहां प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद उन्हें भिवानी सिविल अस्पताल या रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। एक माह में हादसों में घायल 150 लोगों को सिविल अस्पताल से अन्य जिला अस्पतालों में रेफर किया जाता है। अगर सिविल अस्पताल में ऑपरेशन सुविधा हो तो दुर्घटनाओं में घायल लोगों के ऑपरेशन यहीं किए जा सकते हैं।
150 सामान्य ऑपरेशन होते हैं एक माह में
जिला अस्पताल में करीब दो साल पहले तक ऑपरेशन की सुविधा थी। उस समय फोडा, फुंसी व अन्य प्रकार के एक माह में करीब 150 ऑपरेशन होते थे। इस समय ज्यादातर मरीजों को भिवानी भेजा जा रहा है। इसके चलते मरीज और तीमारदारों को 60 किलोमीटर की दूरी तय कर ऑपरेशन करवाना पड़ रहा है।
सीएमओ सुदर्शन पंवार से सीधी बातचीत
सवाल: जिले में ऑपरेशन सुविधा पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ी है?
जवाब: जिले में लंबे समय तक सर्जन का पद खाली रहा है। अब जरनल और आंखों का सर्जन की तैनाती हो चुकी है और जल्द ही ओटी शुरू कर देंगे।
सवाल: दो सर्जन पहले ही मिल चुके हैं तो ओटी शुरू करने में और क्या जरूरत है?
जवाब: उपकरणों की खरीद की डिमांड सरकार को भेज रखी है और खरीद प्रक्रिया के बाद ही ओटी शुरू कर पाएंगे।
सवाल: क्या सिविल अस्पताल में आंखों की ओपीडी शुरू है?
जवाब: आंखों के विशेषज्ञ की तैनाती होते ही हमने व्यवस्था कर आंखों की ओपीडी शुरू करवा दी थी। मरीज आ भी रहे हैं।