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Charkhi Dadri News: अब महाविद्यालयों में भी विद्यार्थियों की मनोस्थिति और समस्याओं पर होगा मंथन

Fri, 09 Aug 2024 05:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Fri, 09 Aug 2024 05:34 AM IST
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अमर उजाला विशेष:

- उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी महाविद्यालयों को जारी किए निर्देश, अभिभावकों व विद्यार्थियों का सेमिनार करवाना भी अनिवार्य
संवाद न्यूज एजेंसी

चरखी दादरी। अब स्कूलों की तर्ज पर कॉलेजों में भी प्रोफेसर अभिभावकों से विद्यार्थियों की प्रगति और समस्याओं पर चिंतन करेंगे। इसके तहत सभी कॉलेजों में अभिभावकों व विद्यार्थियों का विशेष सेमिनार होगा। इसमें विभिन्न शैक्षिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। कॉलेजों में एक अगस्त से नए शिक्षा सत्र की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। इसके मद्देनजर महाविद्यालय प्रबंधन समिति ने नए आदेश का पालन करने की रूपरेखा तैयार कर ली है।
सामान्य तौर पर स्कूलों में अभिभावकों व शिक्षकों की बैठकें होती हैं। वहीं, स्कूल व कॉलेज शिक्षा में काफी अंतर आ जाता है। कॉलेज का वातावरण थोड़ा अलग होता है। स्कूल में शिक्षकों का छात्रों पर तकरीबन मनोवैज्ञानिक नियंत्रण रहता है। जबकि कॉलेज में ऐसा कम है। कॉलेज में विद्यार्थी थोड़ा स्वतंत्र हो जाता है। वह किशोर अवस्था को पार एक नागरिक की भूमिका में आ जाता है। कॉलेज विद्यार्थी में संवेग कुछ हद तक परिपक्व भी हो जाते हैं। उसका मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक, भावात्मक एवं संवेगात्मक विकास भी कुछ हद तक हो जाता है।
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इतना ही नहीं, उसकी तर्क एवं चिंतन शक्ति भी बढ़ जाती है। इन अपरिपक्व संवेग को सही दिशा देने के लिए शिक्षकों व अभिभावकों की सख्त जरूरत होती है। कॉलेज में तो विद्यार्थी छह घंंटे ही प्रोफेसर के संपर्क में रहता है। 18 घंटे वह समाज एवं परिवार के बीच बिताता है। ऐसे में विद्यार्थी को औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों ही प्रकार की शिक्षा जरूरी होती है। तब जाकर उसका व्यक्तित्व विकास हो पाता है। इसके लिए शिक्षक, विद्यार्थी व अभिभावकों के बीच सामंजस्य का होना जरूरी है। उनके बीच समय-समय पर समस्याओं पर विचार-विमर्श होना जरूरी होता है।
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- नियमित कक्षाओं पर होगा चिंतन

आजकल कॉलेजों में दैनिक उपस्थिति का औसत प्रतिशत मुश्किल से 60 प्रतिशत आ रहा है। यह चिंता का विषय है। इस विषय में भी अभिभावकों से बात करना जरूरी हो गया है। आजकल अभिभावकों की सोच है कि कॉलेज में बच्चे का दाखिला करवा दिया जाए और वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बाहर सेंटर में कोचिंग ग्रहण करे। छात्रों की मनोस्थिति पर भी सेमिनार में चिंतन किया जाएगा। इन तमाम बिंदुओं को देखते हुए उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं।


वर्सन :
सेमिनार में विद्यार्थी की समस्याओं पर चिंतन होगा। इसमें अभिभावकों को भी बुलाया गया है। आजकल के शैक्षिक परिवेश में अभिभावकों से संवाद करना जरूरी हो गया है।
- डॉ. पवन कुमार शर्मा, प्राचार्य, दादरी राजकीय महाविद्यालय

फोटो-23
शहर स्थित जनता महाविद्यालय। संवाद
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