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Charkhi Dadri News: मोटा अनाज को प्रोत्साहन मिलने से बाजरा और जौ का जिले में बढ़ेगा रकबा
Thu, 02 Feb 2023 09:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 02 Feb 2023 09:33 AM IST
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बाजरा की फसल। (फाइल फोटो)
चरखी दादरी। मोटा अनाज को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्रीय बजट में विशेष पैकेज का प्रावधान करने पर बाजरा, जौ, चना व ज्वार उत्पादक किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। सरकार ने वैसे भी वर्ष 2023 को मोटा अनाज के रूप में मनाने का निर्णय ले रखा है। अब बजट में इसे तवज्जो देने पर विशेषकर बाजरा, चना, जौ व ज्वार की मांग व पैदावार बढ़ने की उम्मीद है। संसद में लंच में भी सरकार ने बाजरा की खिचड़ी व चूरमा,ज्वार व चना की रोटी को मीनू के रूप में शामिल कर लिया है।
सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से मोटा अनाज को प्रोत्साहन देने का फैसला लिया है। मोटा अनाज को शरीर के गुणकारी एवं पौष्टिक भोजन माना जाता है। चरखी दादरी जिले में हर साल करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र से ज्यादा रकबा में बाजरा बोया जाता है। यह खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों में से एक है। इसी प्रकार जौ की खेती भी करीब तीन से चार हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होती है। रेतीला क्षेत्रों में कुछ किसान चना की खेती भी करते हैं। अब सरकार का ध्यान इन मोटे अनाज की ओर जाने पर इनकी मांग बढ़ने के आसार हैं जिससे भाव में भी इजाफा होने की उम्मीद है।
किसान रामौतार व चांद सिंह कहना कि बाजरा का भाव बढि़या नहीं होने से इस फसल में कम फायदा मिलता है। सीजन के समय बाजरा का रेट 15 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक ही रहता है। अब मोटा अनाज में शामिल होने पर उन्हें इसकी मांग बढ़ने पर भाव अच्छा मिलने की उम्मीद है। इसी प्रकार जौ व चना की खेती को भी बढ़ावा मिल सकता है।
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सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से मोटा अनाज को प्रोत्साहन देने का फैसला लिया है। मोटा अनाज को शरीर के गुणकारी एवं पौष्टिक भोजन माना जाता है। चरखी दादरी जिले में हर साल करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र से ज्यादा रकबा में बाजरा बोया जाता है। यह खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों में से एक है। इसी प्रकार जौ की खेती भी करीब तीन से चार हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होती है। रेतीला क्षेत्रों में कुछ किसान चना की खेती भी करते हैं। अब सरकार का ध्यान इन मोटे अनाज की ओर जाने पर इनकी मांग बढ़ने के आसार हैं जिससे भाव में भी इजाफा होने की उम्मीद है।
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किसान रामौतार व चांद सिंह कहना कि बाजरा का भाव बढि़या नहीं होने से इस फसल में कम फायदा मिलता है। सीजन के समय बाजरा का रेट 15 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक ही रहता है। अब मोटा अनाज में शामिल होने पर उन्हें इसकी मांग बढ़ने पर भाव अच्छा मिलने की उम्मीद है। इसी प्रकार जौ व चना की खेती को भी बढ़ावा मिल सकता है।
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