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Charkhi Dadri News: मेरे बेटों के पास 30 करोड़ की संपत्ति, मुझे देने के लिए दो रोटी नहीं
Fri, 31 Mar 2023 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 31 Mar 2023 12:28 AM IST
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चरखी दादरी। गोपी निवासी आईएएस विवेक आर्य के दादा-दादी के जहर निगलने की चर्चा वीरवार को दिनभर बाढड़ा और पैतृक गांव गोपी में रही। उनके दादा जगदीशचंद ने जहर निगलने के कारण दम तोड़ने से पहले सुसाइड नोट में जो बातें लिखी वो काफी चौंकाने वाली है। उन्होंने लिखा कि मेरे बेटों के पास बाढड़ा में 30 करोड़ की संपत्ति है, लेकिन मुझे देने के लिए दो रोटी नहीं है। इतना ही नहीं उन्होंने अपने हिस्से की जमीन भी आर्य समाज बाढड़ा को दे दी।
एक पेज के सुसाइड नोट में जगदीशचंद ने लिखा कि मैं अपने छोटे बेटे महेंद्र के पास रहता था। 6 साल पहले उसकी मृत्यु हो गई। मुझे कुछ दिन तक महेंद्र की पत्नी नीलम ने रोटी दी, लेकिन बाद में उसने अनैतिक कार्य शुरू कर दिया और गांव निवासी विकास को अपने साथ ले लिया। उसने विकास को साथ रखने का विरोध किया तो उन्होंने पीटकर उसे घर से बाहर निकाल दिया। जगदीशचंद ने सुसाइड नोट में लिखा कि इसके बाद वो दो साल तक अनाथ आश्रम में रहा। जब वह लौटा तो उसे फिर से बाहर निकालकर मकान को ताला लगा दिया। उसी दौरान उसकी पत्नी भागली देवी लकवाग्रस्त हो गई। इस पर वह दूसरे बेटे विरेंद्र के पास रहने लगे। उन्होंने भी उसे रखने से मना कर दिया। वे उसे बासी आटे की रोटी देते। यह मीठा जहर कितने दिन खाता, इसलिए सल्फास निगल ली। मेरी मौत का कारण नीलम, विकास, सुनीता और विरेंद्र है। इतने जल्म इन चारों ने मुझ पर किए हैं, उतने जुल्म किसी संतान को अपने मां-बाप पर नहीं करने चाहिए।
- बेटे-बहुओं को दंड मिलेगा तो मेरी आत्मा को मिलेगी शांति
बुजुर्ग जगदीशचंद ने लिखा कि जो हमारे साथ बेटे और बहुओं ने जो किया उसके लिए सरकार और समाज को उन्हें दंड देना चाहिए। तब जाकर उसकी आत्मा को शांति मिलेगी। बुजुर्ग ने अपनी दो एफडी और दुकानें भी आर्य समाज बाढड़ा के नाम करने की बात सुसाइड नोट में लिखी है।
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- सेना से रिटायर्ड थे जगदीशचंद
जगदीशचंद सेना से सेवानिवृत्त थे। बताया जा रहा है कि वो पंचगांव गुरुकुल के प्रधान भी रह चुके हैं। उनके परिवार का बाढड़ा क्षेत्र में काफी नाम है और यह परिवार विवेक आर्य के आईएएस बनने के बाद सुर्खियों में आया था।
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एक पेज के सुसाइड नोट में जगदीशचंद ने लिखा कि मैं अपने छोटे बेटे महेंद्र के पास रहता था। 6 साल पहले उसकी मृत्यु हो गई। मुझे कुछ दिन तक महेंद्र की पत्नी नीलम ने रोटी दी, लेकिन बाद में उसने अनैतिक कार्य शुरू कर दिया और गांव निवासी विकास को अपने साथ ले लिया। उसने विकास को साथ रखने का विरोध किया तो उन्होंने पीटकर उसे घर से बाहर निकाल दिया। जगदीशचंद ने सुसाइड नोट में लिखा कि इसके बाद वो दो साल तक अनाथ आश्रम में रहा। जब वह लौटा तो उसे फिर से बाहर निकालकर मकान को ताला लगा दिया। उसी दौरान उसकी पत्नी भागली देवी लकवाग्रस्त हो गई। इस पर वह दूसरे बेटे विरेंद्र के पास रहने लगे। उन्होंने भी उसे रखने से मना कर दिया। वे उसे बासी आटे की रोटी देते। यह मीठा जहर कितने दिन खाता, इसलिए सल्फास निगल ली। मेरी मौत का कारण नीलम, विकास, सुनीता और विरेंद्र है। इतने जल्म इन चारों ने मुझ पर किए हैं, उतने जुल्म किसी संतान को अपने मां-बाप पर नहीं करने चाहिए।
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- बेटे-बहुओं को दंड मिलेगा तो मेरी आत्मा को मिलेगी शांति
बुजुर्ग जगदीशचंद ने लिखा कि जो हमारे साथ बेटे और बहुओं ने जो किया उसके लिए सरकार और समाज को उन्हें दंड देना चाहिए। तब जाकर उसकी आत्मा को शांति मिलेगी। बुजुर्ग ने अपनी दो एफडी और दुकानें भी आर्य समाज बाढड़ा के नाम करने की बात सुसाइड नोट में लिखी है।
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- सेना से रिटायर्ड थे जगदीशचंद
जगदीशचंद सेना से सेवानिवृत्त थे। बताया जा रहा है कि वो पंचगांव गुरुकुल के प्रधान भी रह चुके हैं। उनके परिवार का बाढड़ा क्षेत्र में काफी नाम है और यह परिवार विवेक आर्य के आईएएस बनने के बाद सुर्खियों में आया था।