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Charkhi Dadri News: महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनी गांव पालड़ी की ममता, सजावट का सामान तैयार कर बन रहीं आत्मनिर्भर
Tue, 09 Dec 2025 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 09 Dec 2025 01:21 AM IST
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गीता महोत्सव में ममता की ओर से लगाई स्टॉल।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। जिले की ग्रामीण महिलाओं में आत्मनिर्भरता का जो नया जूनुन देखने को मिल रहा है, उसी का एक उदाहरण गांव पालड़ी निवासी ममता है। वर्ष 2023 में प्रतीक स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद न केवल ममता की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उन्होंने अपने हुनर के बल पर अलग पहचान भी बनाई है। ममता अपने हाथों से तैयार किए गए सजावट के सामान, लड्डू गोपाल की ड्रेस, पायदान, बच्चों के परिधान व महिलाओं की पारंपरिक पोशाक जैसे लहंगे और लांचा बनाकर अच्छा-खासा मुनाफा कमा रही हैं।
2023 में समूह से जुड़ीं थी ममता
स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले ममता के पास अपने हुनर को बाजार तक पहुंचाने का कोई जरिया नहीं था। सीमित साधन और कम अवसरों के चलते उनका कार्य घर की चहारदीवारी तक सीमित था, लेकिन जैसे ही वह वर्ष 2023 में प्रतीक स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हो गई। समूह ने न केवल उन्हें प्रशिक्षण दिया बल्कि बाजार उपलब्ध करवाने, स्टॉल लगाने और ग्राहकों से जुड़ने का अवसर दिया। इससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हुई और अब वह नियमित रूप से विभिन्न मेलों, प्रदर्शनियों और आयोजनों में स्टॉल लगाकर सजावट का सामग्री व तैयार परिधान बेचती हैं।
लड्डू गोपाल की ड्रेस बन रही पसंद
ममता के बनाए हुए लड्डू गोपाल की ड्रेस लोगाें को खूब पसंद आ रही है। उनका बनाया हुआ सामान न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि आसपास के जिलों तक पसंद किया जा रहा है। खासकर त्योहारों, जन्माष्टमी और शादी-ब्याह के सीजन में मांग काफी बढ़ जाती है। उनकी मेहनत का नतीजा यह है कि आज ममता आत्मनिर्भर है और अच्छे खासे मुनाफे के साथ अपने परिवार को आर्थिक सहयोग दे रही हैं।
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महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
स्वयं सहायता समूह की मदद से मिली यह सफलता ममता के आत्मविश्वास को मजबूत कर रही है। आज वह कई अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। ममता का मानना है कि यदि परिवार और प्रशासनिक मदद मिले तो गांव की हर महिला आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती है। सरकार और जिला प्रशासन की ओर से स्वयं सहायता समूहों को मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन की ओर से आयोजित विभिन्न मेलों में स्टॉल दिलवाने से लेकर प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने तक की व्यवस्था ने महिला उद्यमियों को मजबूत आधार दिया है।
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2023 में समूह से जुड़ीं थी ममता
स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले ममता के पास अपने हुनर को बाजार तक पहुंचाने का कोई जरिया नहीं था। सीमित साधन और कम अवसरों के चलते उनका कार्य घर की चहारदीवारी तक सीमित था, लेकिन जैसे ही वह वर्ष 2023 में प्रतीक स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हो गई। समूह ने न केवल उन्हें प्रशिक्षण दिया बल्कि बाजार उपलब्ध करवाने, स्टॉल लगाने और ग्राहकों से जुड़ने का अवसर दिया। इससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हुई और अब वह नियमित रूप से विभिन्न मेलों, प्रदर्शनियों और आयोजनों में स्टॉल लगाकर सजावट का सामग्री व तैयार परिधान बेचती हैं।
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लड्डू गोपाल की ड्रेस बन रही पसंद
ममता के बनाए हुए लड्डू गोपाल की ड्रेस लोगाें को खूब पसंद आ रही है। उनका बनाया हुआ सामान न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि आसपास के जिलों तक पसंद किया जा रहा है। खासकर त्योहारों, जन्माष्टमी और शादी-ब्याह के सीजन में मांग काफी बढ़ जाती है। उनकी मेहनत का नतीजा यह है कि आज ममता आत्मनिर्भर है और अच्छे खासे मुनाफे के साथ अपने परिवार को आर्थिक सहयोग दे रही हैं।
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महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
स्वयं सहायता समूह की मदद से मिली यह सफलता ममता के आत्मविश्वास को मजबूत कर रही है। आज वह कई अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। ममता का मानना है कि यदि परिवार और प्रशासनिक मदद मिले तो गांव की हर महिला आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती है। सरकार और जिला प्रशासन की ओर से स्वयं सहायता समूहों को मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन की ओर से आयोजित विभिन्न मेलों में स्टॉल दिलवाने से लेकर प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने तक की व्यवस्था ने महिला उद्यमियों को मजबूत आधार दिया है।