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महारास लीला आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक : भारत भूषण
Sun, 24 May 2026 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 24 May 2026 12:57 AM IST
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नगर स्थित हरिओम आश्रम में आयोजित कथा में मौजूद भक्त व संत।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। शहर के घिकाड़ा रोड स्थित हरिओम आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को कथावाचक पंडित भारत भूषण महाराज ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि नंदबाबा की ओर से किया गया एकादशी व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मशुद्धि एवं भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एकादशी व्रत मनुष्य को संयम, श्रद्धा और भक्ति की ओर प्रेरित करता है।
महाराज ने महारास लीला का वर्णन करते हुए कहा कि यह लीला आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। गोपियों का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम संदेश देता है कि सच्ची भक्ति में कोई स्वार्थ नहीं होता। कथा में कंस के धनुष यज्ञ एवं भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन का प्रसंग भी सुनाया गया। महाराज ने बताया कि जब अधर्म बढ़ता है तब भगवान स्वयं धर्म की स्थापना के लिए अवतरित होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के हाथों कंस का उद्धार कर मथुरा को अत्याचार से मुक्त करवाना सत्य की विजय का प्रतीक है। कथा के दौरान उद्धव-कृष्ण एवं उद्धव-गोपी संवाद का भी वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव को ब्रज भेजा, तो उद्धव ने गोपियों से सच्चे प्रेम और समर्पण का अर्थ जाना। गोपियों की कृष्ण के प्रति अटूट भक्ति दर्शाती है कि प्रेम में अहंकार और तर्क का कोई स्थान नहीं होता। इस अवसर पर मंदिर प्रधान भगवत फोगाट, रविंद्र गोयल, दलीप गोयल, शिव कुमार गोयल, वेदपाल जाखड़, श्याम शर्मा, लाला शर्मा आदि मौजूद रहे।
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महाराज ने महारास लीला का वर्णन करते हुए कहा कि यह लीला आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। गोपियों का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम संदेश देता है कि सच्ची भक्ति में कोई स्वार्थ नहीं होता। कथा में कंस के धनुष यज्ञ एवं भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन का प्रसंग भी सुनाया गया। महाराज ने बताया कि जब अधर्म बढ़ता है तब भगवान स्वयं धर्म की स्थापना के लिए अवतरित होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के हाथों कंस का उद्धार कर मथुरा को अत्याचार से मुक्त करवाना सत्य की विजय का प्रतीक है। कथा के दौरान उद्धव-कृष्ण एवं उद्धव-गोपी संवाद का भी वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव को ब्रज भेजा, तो उद्धव ने गोपियों से सच्चे प्रेम और समर्पण का अर्थ जाना। गोपियों की कृष्ण के प्रति अटूट भक्ति दर्शाती है कि प्रेम में अहंकार और तर्क का कोई स्थान नहीं होता। इस अवसर पर मंदिर प्रधान भगवत फोगाट, रविंद्र गोयल, दलीप गोयल, शिव कुमार गोयल, वेदपाल जाखड़, श्याम शर्मा, लाला शर्मा आदि मौजूद रहे।
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