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Charkhi Dadri News: तीन लाख खर्च कर जली रोशनी, एक पोल टूटते ही फिर अंधेरे में डूबा आरओबी
Tue, 20 Oct 2026 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 20 Oct 2026 11:56 PM IST
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रावलधी भिवानी लिंंक मार्ग पर टूटा पड़ा बिजली पोल, जहां से आरओबी तक बिजली आपूर्ति पहुंचाई गई है।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। रावलधी-भिवानी लिंक मार्ग स्थित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर रोशनी की व्यवस्था एक बार फिर ठप हो गई है। करीब दो महीने पहले लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रिकल विंग ने तीन लाख रुपये खर्च कर बंद पड़ी लाइटों को चालू करवाया था।
इससे रात के समय आरओबी से गुजरने वाले राहगीरों व वाहन चालकों को राहत मिली थी लेकिन करीब एक महीने पहले बिजली का पोल टूटने से पुल पर दोबारा अंधेरा छा गया। इसके बाद से लाइटें बंद पड़ी हैं और संबंधित विभाग समस्या का समाधान करने के लिए गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
गौरतलब है कि आरओबी पर तीन साल से बंद पड़ी लाइटों को चालू करवाने के लिए लगातार आवाज उठाई गई थी। संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से अमर उजाला समाचार पत्र में समस्या को कई बार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। इसके बाद लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रिकल विंग ने पहल करते हुए करीब तीन लाख रुपये खर्च कर लाइटों को चालू करवाया था। कुछ समय तक पुल पर रोशनी रहने से लोगों को राहत मिली लेकिन बिजली का पोल टूटने के बाद व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौट आई।
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रावलधी-भिवानी लिंक मार्ग पर स्थित यह आरओबी यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रात के समय यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है। पुल पर अंधेरा रहने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों और रात के समय सफर करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति असुविधाजनक बनी हुई है। रोशनी के अभाव में सामने की स्थिति स्पष्ट दिखाई नहीं देने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को अपेक्षा थी कि लाखों रुपये खर्च कर लाइटें चालू करवाने के बाद अब उन्हें नियमित रूप से रोशनी की सुविधा मिलेगी। मगर बिजली का पोल टूटने के बाद समस्या दोबारा खड़ी हो गई। करीब एक महीने का समय बीतने के बावजूद लाइटें चालू नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
हैंडओवर के बाद जिम्मेदारी नगर परिषद की
लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रिकल विंग आरओबी पर लाइटें लगवाने के बाद इन्हें नगर परिषद के हवाले कर चुकी है। ऐसे में अब बंद पड़ी लाइटों को चालू करवाने की जिम्मेदारी व रख-रखाव की जिम्मेदारी नगर परिषद की बनती है। लेकिन लंबा समय गुजर जाने के बाद भी बंद पड़ी लाइटों की ओर ध्यान नहीं जाने से नगर परिषद की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत
आरओबी पर लाइटें बंद रहने का मुद्दा पहले भी उठता रहा है। तीन साल तक अंधेरे में रहने के बाद लाइटें चालू होने से लोगों को राहत मिली थी, लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। अब जरूरत है कि नगर परिषद और बिजली निगम आपसी तालमेल से टूटे हुए पोल को ठीक करवाएं और बंद पड़ी लाइटों को जल्द चालू करें ताकि रात के समय यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
वर्जन:
हमने रावलधी लिंक मार्ग पर टूटे पड़े बिजली पोल को ठीक करवाने के लिए बिजली निगम में शिकायत दर्ज करवाई है। जल्दी ही बिजली निगम के कर्मचारी टूटे पोल की जगह नया पोल लगाने और केबल जोड़ने का काम करेंगे ताकि बंद पड़ी लाइटें चालू हो सकें।
-- बिजेंद्र शर्मा, लाइट इंस्पेक्टर, नगर परिषद।
वर्जन:
आरओबी पर बिजली पोल के टूटने की फिलहाल हमारे पास कोई जानकारी नहीं है, अगर पोल टूटा हुआ तो कर्मचारियों को भेजकर नया पोल लगवा दिया जाएगा।-- आशीष सोढ़ी, कार्यवाहक एसडीओ शहरी
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इससे रात के समय आरओबी से गुजरने वाले राहगीरों व वाहन चालकों को राहत मिली थी लेकिन करीब एक महीने पहले बिजली का पोल टूटने से पुल पर दोबारा अंधेरा छा गया। इसके बाद से लाइटें बंद पड़ी हैं और संबंधित विभाग समस्या का समाधान करने के लिए गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
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गौरतलब है कि आरओबी पर तीन साल से बंद पड़ी लाइटों को चालू करवाने के लिए लगातार आवाज उठाई गई थी। संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से अमर उजाला समाचार पत्र में समस्या को कई बार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। इसके बाद लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रिकल विंग ने पहल करते हुए करीब तीन लाख रुपये खर्च कर लाइटों को चालू करवाया था। कुछ समय तक पुल पर रोशनी रहने से लोगों को राहत मिली लेकिन बिजली का पोल टूटने के बाद व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौट आई।
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रावलधी-भिवानी लिंक मार्ग पर स्थित यह आरओबी यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रात के समय यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है। पुल पर अंधेरा रहने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों और रात के समय सफर करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति असुविधाजनक बनी हुई है। रोशनी के अभाव में सामने की स्थिति स्पष्ट दिखाई नहीं देने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को अपेक्षा थी कि लाखों रुपये खर्च कर लाइटें चालू करवाने के बाद अब उन्हें नियमित रूप से रोशनी की सुविधा मिलेगी। मगर बिजली का पोल टूटने के बाद समस्या दोबारा खड़ी हो गई। करीब एक महीने का समय बीतने के बावजूद लाइटें चालू नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
हैंडओवर के बाद जिम्मेदारी नगर परिषद की
लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रिकल विंग आरओबी पर लाइटें लगवाने के बाद इन्हें नगर परिषद के हवाले कर चुकी है। ऐसे में अब बंद पड़ी लाइटों को चालू करवाने की जिम्मेदारी व रख-रखाव की जिम्मेदारी नगर परिषद की बनती है। लेकिन लंबा समय गुजर जाने के बाद भी बंद पड़ी लाइटों की ओर ध्यान नहीं जाने से नगर परिषद की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत
आरओबी पर लाइटें बंद रहने का मुद्दा पहले भी उठता रहा है। तीन साल तक अंधेरे में रहने के बाद लाइटें चालू होने से लोगों को राहत मिली थी, लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। अब जरूरत है कि नगर परिषद और बिजली निगम आपसी तालमेल से टूटे हुए पोल को ठीक करवाएं और बंद पड़ी लाइटों को जल्द चालू करें ताकि रात के समय यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
वर्जन:
हमने रावलधी लिंक मार्ग पर टूटे पड़े बिजली पोल को ठीक करवाने के लिए बिजली निगम में शिकायत दर्ज करवाई है। जल्दी ही बिजली निगम के कर्मचारी टूटे पोल की जगह नया पोल लगाने और केबल जोड़ने का काम करेंगे ताकि बंद पड़ी लाइटें चालू हो सकें।
वर्जन:
आरओबी पर बिजली पोल के टूटने की फिलहाल हमारे पास कोई जानकारी नहीं है, अगर पोल टूटा हुआ तो कर्मचारियों को भेजकर नया पोल लगवा दिया जाएगा।