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Charkhi Dadri News: शारीरिक कमजोरी को ताकत बनाकर देकर देवेंद्र ने जीता गोल्ड
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गांव किश्कंधा में देवेंद्र का मैच देखते परिजन।
- फोटो : 1
बाढड़ा (चरखीदादरी)। जिंदगी में मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, हौसले बुलंद हों तो मंजिल हासिल की जा सकती है। गांव किश्कंधा के पैरा खिलाड़ी देवेंद्र ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से इसे साबित कर दिखाया है। जापान के आईची-नागोया में चल रहे पैरा एशियन गेम्स में देवेंद्र ने मंगलवार को डिस्कस थ्रो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर गांव, क्षेत्र और देश का नाम रोशन कर दिया। उन्होंने 49.71 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर शानदार प्रदर्शन किया। उनकी इस उपलब्धि के पीछे वर्षों का संघर्ष, नियमित अभ्यास और खेल के प्रति समर्पण छिपा है।
देवेंद्र फिलहाल खेल कोटे से मुंबई में आयकर विभाग में कार्यरत हैं। चार भाइयों में दूसरे नंबर पर आने वाले देवेंद्र ने वर्ष 2018-19 से खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लक्ष्य के साथ नियमित अभ्यास शुरू किया। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच खेल के लिए समय निकालना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। दिल्ली, हिसार, मुंबई और अपने पैतृक गांव में रहकर उन्होंने तैयारी की और लगातार अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने का प्रयास किया। (संवाद)
हादसे के बाद भी नहीं टूटने दिया हौसला
देवेंद्र के पिता धर्मेंद्र ने बताया कि वर्ष 2016 में उनके बेटे के जीवन में ऐसा मोड़ आया जिसने उन्हें नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया। दादरी से घर लौटते समय मांढ़ी गांव के पास उनकी बाइक की कार से टक्कर हो गई। देवेंद्र के पैर में चोट आई। उनकी माता भी उनके साथ थीं। दोनों दादरी से कपड़ा लेकर घर लौट रहे थे। हादसे के बाद स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर कई चुनौतियां सामने आईं लेकिन देवेंद्र ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया और आगे चलकर खेल को ही अपना जुनून बना लिया।
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आज जीते तो नितेश के तीन इवेंट्स में पदक पक्के
जिले के गांव नांधा निवासी नितेश लुहाच भी पैरा एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। वे बैडमिंटन में सिंगल, डबल और मिक्स्ड डबल में खेल रहे हैं। सिंगल में उन्होंने क्वार्टर फाइनल मुकाबला जीत लिया है। मिक्स्ड डबल में सोमवार को वे सेमीफाइनल में पहुंच गए थे। बुधवार को उनका मिक्सडडबल का मुकाबला होगा। इसमें जीतते ही उनके तीनों इवेंट्स में पदक पक्के हो जाएंगे।
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देवेंद्र फिलहाल खेल कोटे से मुंबई में आयकर विभाग में कार्यरत हैं। चार भाइयों में दूसरे नंबर पर आने वाले देवेंद्र ने वर्ष 2018-19 से खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लक्ष्य के साथ नियमित अभ्यास शुरू किया। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच खेल के लिए समय निकालना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। दिल्ली, हिसार, मुंबई और अपने पैतृक गांव में रहकर उन्होंने तैयारी की और लगातार अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने का प्रयास किया। (संवाद)
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हादसे के बाद भी नहीं टूटने दिया हौसला
देवेंद्र के पिता धर्मेंद्र ने बताया कि वर्ष 2016 में उनके बेटे के जीवन में ऐसा मोड़ आया जिसने उन्हें नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया। दादरी से घर लौटते समय मांढ़ी गांव के पास उनकी बाइक की कार से टक्कर हो गई। देवेंद्र के पैर में चोट आई। उनकी माता भी उनके साथ थीं। दोनों दादरी से कपड़ा लेकर घर लौट रहे थे। हादसे के बाद स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर कई चुनौतियां सामने आईं लेकिन देवेंद्र ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया और आगे चलकर खेल को ही अपना जुनून बना लिया।
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आज जीते तो नितेश के तीन इवेंट्स में पदक पक्के
जिले के गांव नांधा निवासी नितेश लुहाच भी पैरा एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। वे बैडमिंटन में सिंगल, डबल और मिक्स्ड डबल में खेल रहे हैं। सिंगल में उन्होंने क्वार्टर फाइनल मुकाबला जीत लिया है। मिक्स्ड डबल में सोमवार को वे सेमीफाइनल में पहुंच गए थे। बुधवार को उनका मिक्सडडबल का मुकाबला होगा। इसमें जीतते ही उनके तीनों इवेंट्स में पदक पक्के हो जाएंगे।