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अधिकारियों की कमी से शहर के विकास पर ग्रहण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 12:33 AM IST
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Lack of officials eclipsed the development of the city
चरखी गेट से लोहारु रोड की ओर जाने वाली खस्ताहालात सड़क। संवाद - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। शहर में विकास कार्य करवाने की जिम्मेदार नगर परिषद के कंधों पर हैं, लेकिन अधिकारियों की कमी के चलते ब्रेक लगा हुआ है। आलम यह है कि ईओ से लेकर जेई तक करीब दस पद लंबे समय से खाली है। अधिकारी तैनात न होने के चलते विकास कार्यों के साथ भवनों के नक्शे पास करने और अतिक्रमण हटाने जैसे कार्य भी बाधित है।
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करीब डेढ़ करोड़ के एस्टीमेट डेढ़ साल से तैयार हैं, लेकिन एमई और ईओ की तैनाती न होने के चलते टेंडर आमंत्रित नहीं किए जा रहे हैं। भिवानी लिंक ऑफिसर के तबादले के बाद तो हालात और बुरे बन गए है और कार्यालय की फाइलें तक अटकी हुई हैं, जबकि लोग चक्कर लगाकर परेशान हो चुके हैं।
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मानसून की बारिश के बाद तो शहर की अंदरुनी सड़कों और गलियों की हालत खराब हो गई है। इन मार्गों से गुजरना लोगों के लिए आसान नहीं है। दूसरी ओर इन सड़कों और गलियों के पुनर्निर्माण की योजना ठंडे बस्ते में है। नप इंजीनियरिंग ब्रांच जर्जर सड़कों और गलियों के पुनर्निर्माण के एस्टीमेट तैयार कर चुके हैं, लेकिन टेंडर प्रक्रिया अब तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। शहर में विकास का पहिया न घुमने का कारण अधिकारियों की कमी है। दो एमई से लेकर ईओ का पद खाली है और इसके चलते टेंडर प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ पा रही है। दूसरी ओर जर्जर सड़कों से गुजरते समय प्रतिदिन सैंकड़ों लोगों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है।
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नगर पार्षदों का कार्यालय पूरा हो चुका है। इस समय एसडीएम विरेंद्र सिंह के पास नप प्रशासक का अतिरिक्त चार्ज भी है। एसडीएम के सुपरविजन के बाद भी शहर में विकास कार्य की रफ्तार थमी हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण अधिकारियों के पद खाली होना माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नप का खजाना भी खाली है। इसका असर भी सीधे तौर पर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। आलम यह है कि अधिकारी और कर्मचारियों की तनख्वाह का प्रबंध करना भी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में नप को शहर में विकास कार्यों का खाका खींचने के लिए आमदनी के स्रोत खोजने की भी आवश्यकता है। नप की आमदनी जितनी बढ़ेगी, उतने ही ज्यादा विकास कार्य रफ्तार पकड़ेंगे।
चलने लायक नहीं शहर की सड़कें और गलियां
मानसून की बारिश के बाद तो शहर की कई सड़कें और गलियां चलने लायक नहीं है। वैकल्पिक मार्ग से गुजरने पर लोगों को तीन से चार गुना अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। इसके चलते लोग जर्जर सड़कों व गलियों से ही गुजरने को विवश हैं। बारिश के बाद शहर की बीस से अधिक सड़कें और गलियां जर्जर हो चुकी हैं। अभी भी कई गलियों में दूषित पानी भरा हुआ है। अब जर्जर गलियों और सड़कों की बात करें तो दस के पुर्णोद्धार का प्रारूप नप अधिकारी तैयार कर चुके हैं। ईओ और एमई के पद खाली होने से टेंडर आमंत्रित नहीं किए जा रहे हैं।
- इन मुख्य सड़कों समेत गलियों का होना है पुर्नर्निर्माण
नप सूत्रों के अनुसार मेजबान चौक से हुडा सेक्टर की ओर जाने वाली सड़क पर तारकोल की लेयर ही गायब है। इस मार्ग पर गहरे गड्ढे बने हैं। यहां से प्रतिदिन दो हजार से अधिक लोग गुजरते हैं और उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस सड़क के जीर्णोद्धार का एस्टीमेट तैयार किया जा चुका है। इसी प्रकार कोर्ट के सामने से पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस की ओर जाने वाली सड़क का भी पुर्नर्निर्माण होना है। इसके अलावा आठ गलियों के निर्माण के एस्टीमेट भी तैयार किए जा चुके हैं। इन विकास कार्यों पर करीब दो करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
- नगर परिषद में इन अधिकारियों के पद खाली
नगर परिषद में जेई का एक, एमई के दो, एसआई, सीएसआई के पद खाली हैं। इसके अलावा एक्सईएन और बीआई का पद करीब एक साल से खाली है। इस समय नगर परिषद में ईओ भी तैनात नहीं है। इन खाली पदों का लिंक ऑफिसर को अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।
ये कार्य भी बाधित
बीआई का पद लंबे समय से खाली पड़ा है। इसके चलते भवनों के नक्शे, मौका देखना, अतिक्रमण हटाना आदि कार्य बाधित हैं। वहीं, ईओ का पद खाली होने से कार्यालय की कई जरूरी फाइलों का निपटान नहीं हो पा रहा। एमई का पद खाली होने से पहले से तैयार विकास कार्य की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही जबकि विकास के अन्य कार्यों का खाका भी तैयार नहीं हो पा रहा है।

हम तैनाती के लिए मुख्यालय पत्र लिख चुके
अधिकारियों के पद खाली होने से थोड़ी दिक्कतें आई हुई हैं। हम तैनाती के लिए मुख्यालय पत्र लिख चुके हैं। जल्द ही अधिकारियों की तैनाती हो जाएगी। इसके बाद विकास कार्य रफ्तार पकड़ जाएंगे।
- विरेंद्र सिंह, एसडीएम एवं नप प्रशासक
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